बक्सर : सीआईए को संदेश भेज देश के शीर्ष नेतृत्व को दी चुनौती, पुरानी फाइलों ने खोला अमन तिवारी का कच्चा चिट्ठा

बक्सर। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और विशेष रूप से प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना किसी भी नागरिक के लिए न केवल आत्मघाती कदम है, बल्कि यह देश की संप्रभुता पर प्रहार जैसा है। बक्सर जिले के सिमरी थाना अंतर्गत आशा पड़री गांव में गुरुवार की देर रात जो पुलिसिया कार्रवाई हुई, उसने न केवल पूरे इलाके को सन्न कर दिया बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। एक युवक, जिसने अपनी डिजिटल विशेषज्ञता का उपयोग रचनात्मक कार्यों के बजाय सनक और आपराधिक साजिशों में किया, अब सलाखों के पीछे पहुँचने की दहलीज पर है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) को ईमेल या मैसेज भेजकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नुकसान पहुँचाने का दावा करना और उसके एवज में बड़ी रकम की मांग करना, यह किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन बक्सर पुलिस की इस कार्रवाई ने इसे एक गंभीर और डरावनी हकीकत में बदल दिया है।

​आधी रात की दबिश: जब आशा पड़री गांव में गूँजी सायरन की आवाज

​गुरुवार की रात जब सिमरी के अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तभी भारी पुलिस बल ने आशा पड़री गांव की घेराबंदी कर दी। गोपनीय सूचना इतनी पुख्ता थी कि पुलिस ने बिना समय गंवाए सीधे उस घर पर धावा बोला जहाँ से ‘डिजिटल आतंक’ की सुगबुगाहट सुनाई दे रही थी।

​पुलिस की प्राथमिक टीम ने सबसे पहले अमन तिवारी नामक युवक को हिरासत में लिया। उससे हुई प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस ने दो अन्य सहयोगियों को भी दबोच लिया। गांव के लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि उनके बीच रहने वाला एक युवक अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के संपर्क में था और देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने की बात कर रहा था। देर रात हुई इस छापेमारी में पुलिस ने न केवल आरोपियों को पकड़ा, बल्कि उस डिजिटल ‘कंट्रोल रूम’ को भी ध्वस्त कर दिया जहाँ से यह सारा खेल चल रहा था।

​सीआईए और डिजिटल ब्लैकमेलिंग का खतरनाक मेल

​इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू इसका अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन है। आरोपियों ने कथित तौर पर अमेरिकी एजेंसी सीआईए को मैसेज भेजकर यह दावा किया कि वे प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को भेदने और उन पर हमला करने की क्षमता रखते हैं।

  • धन की मांग: संदेशों के आदान-प्रदान में आरोपियों ने इस ‘हमले को रोकने’ या ‘जानकारी साझा करने’ के बदले में एक बड़ी धनराशि की मांग की थी।
  • साइबर एंगल: एसपी शुभम आर्य के अनुसार, यह मामला केवल एक धमकी भरा संदेश नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा साइबर नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपी डार्क वेब या अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे थे ताकि उनकी पहचान छुपी रहे।
  • गोपनीयता: पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उस राशि का खुलासा नहीं किया है जिसकी मांग आरोपियों ने की थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह राशि अंतरराष्ट्रीय स्तर की थी।

​अमन तिवारी: एक ‘पुराना खिलाड़ी’ जिसका इतिहास है दागदार

​हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपी अमन तिवारी का नाम पुलिस के रिकॉर्ड में नया नहीं है। वह एक ऐसी प्रतिभा का उदाहरण है जिसने अपराध का रास्ता चुना।

  1. 2022 का कांड: अमन तिवारी को साल 2022 में भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। उस समय उसने कोलकाता एयरपोर्ट के सर्वर को हैक करने और उसे उड़ाने की धमकी दी थी।
  2. संयुक्त ऑपरेशन: तब कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। उस घटना के बाद यह माना जा रहा था कि वह सुधर जाएगा, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसने अपने लक्ष्यों को और बड़ा (प्रधानमंत्री तक) कर लिया।
  3. मानसिक स्थिति या गहरी साजिश: पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अमन किसी मानसिक विकार या ‘अटेंशन सीकिंग’ (ध्यान खींचने की प्रवृत्ति) से ग्रस्त है, या वह वास्तव में किसी ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है जो भारत में अस्थिरता पैदा करना चाहता है।

​जब्त उपकरण और सील किया गया ‘साजिश का कमरा’

​छापेमारी के दौरान पुलिस ने अमन तिवारी के घर से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं।

  • लैपटॉप और मोबाइल: पुलिस ने दो लैपटॉप और आधा दर्जन से अधिक मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन उपकरणों को विशेष फॉरेंसिक जांच के लिए पटना भेजा जा रहा है।
  • डिजिटल फुटप्रिंट्स: साइबर एक्सपर्ट्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सीआईए के अलावा आरोपी ने अन्य किन विदेशी एजेंसियों या संगठनों को संदेश भेजे थे।
  • कमरा सील: जिस कमरे से ये गतिविधियां संचालित हो रही थीं, उसे पुलिस ने आधिकारिक रूप से सील कर दिया है। यह कमरा किसी लैब की तरह था जहाँ इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं मौजूद थीं।

​एसपी शुभम आर्य का बयान और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी

​बक्सर के एसपी शुभम आर्य ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं पूरी कार्रवाई की कमान संभाली। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ जुड़ी किसी भी धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

​”हमें गोपनीय सूचना मिली थी कि सिमरी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध संदेश अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को भेजे जा रहे हैं। त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में साइबर धोखाधड़ी और सुरक्षा को चुनौती देने के पुख्ता संकेत मिले हैं। सभी आरोपी पुलिस की कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ जारी है।”

​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियां और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी बक्सर पहुँच सकती है। देश के वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा का मामला होने के कारण अब इसे केवल एक जिला पुलिस की फाइल नहीं माना जा रहा है।

​साइबर सुरक्षा और युवाओं का भटकता रास्ता

​बक्सर की यह घटना एक बड़े सामाजिक खतरे की ओर भी इशारा करती है। आज के डिजिटल युग में इंटरनेट की पहुँच हर गांव तक हो गई है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। अमन तिवारी जैसे युवक, जिनके पास तकनीकी ज्ञान है, वे अपनी क्षमताओं का उपयोग देश की सुरक्षा को चुनौती देने में कर रहे हैं।

  • डिजिटल निगरानी की आवश्यकता: यह घटना यह बताती है कि ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखना कितना जरूरी हो गया है।
  • सनक या अपराध: क्या यह केवल पैसों के लिए की गई ठगी की कोशिश थी, या इसके पीछे कोई वैचारिक कट्टरपंथ काम कर रहा है? यह पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु है।

​बक्सर के शांत गांव में अशांति का बीज

​आशा पड़री गांव में अमन तिवारी की इस हरकत ने शांतिपूर्ण माहौल में तनाव पैदा कर दिया है। प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद के व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने की बात करना भारतीय कानून के तहत देशद्रोह जैसी गंभीर श्रेणियों में आ सकता है। 2022 की गलती से सबक न लेते हुए अमन ने दोबारा वही रास्ता चुना है, जो उसे अब एक लंबे समय के लिए जेल की कालकोठरी में ले जा सकता है।

​फिलहाल, बक्सर पुलिस तीनों हिरासत में लिए गए युवकों से अलग-अलग कमरों में पूछताछ कर रही है। उनके बयानों के विरोधाभास और जब्त लैपटॉप से निकलने वाले डेटा ही यह तय करेंगे कि इस साजिश की गहराई कितनी है। क्या यह केवल एक युवक की ‘साइबर सनक’ थी या फिर सीमा पार से कोई इसे कंट्रोल कर रहा था? इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में ही साफ हो पाएगा। बक्सर की जनता और प्रशासन अब सतर्क है, क्योंकि इस बार मामला देश की धड़कन और उसके नेतृत्व की सुरक्षा का है।

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