18 साल बाद घर लौटा लापता बेटा, जिंदा देखकर फूट-फूटकर रो पड़े माता-पिता

मुजफ्फरपुर/सारण। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 18 साल पहले लापता हुआ बेटा जब अचानक जिंदा हालत में घर लौटा, तो माता-पिता अपने जिगर के टुकड़े को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। वर्षों से बिछड़ा परिवार आखिरकार फिर एक हो गया।

गलत संगत में पड़कर घर से निकला था रौशन

यह मामला मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर का है। यहां के निवासी विश्वनाथ शाह और रामपुरी देवी का पुत्र रौशन मैट्रिक परीक्षा के दौरान गलत संगत में पड़ गया था। दोस्तों के साथ वह दिल्ली के लिए निकल पड़ा, लेकिन रास्ते में ही दोस्तों से बिछड़ गया और फिर कभी घर नहीं लौटा।

परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार

रौशन के अचानक गायब होने के बाद परिवार ने उसकी तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता उस समय सरकारी सेवा में थे और हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्षों तक कोई सुराग नहीं मिला। अंततः टूटे हुए परिवार ने बेटे को मृत मानते हुए हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार तक कर दिया

भटकते-भटकते पहुंचा छपरा, हो गया मानसिक रूप से अस्वस्थ

किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रौशन छपरा इलाके में इधर-उधर भटकता रहा और मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया। इसी दौरान सेवा कुटीर से जुड़े लोगों की नजर उस पर पड़ी। उसे संरक्षण में लेकर भोजपुर के मानसिक चिकित्सालय में इलाज कराया गया।

काउंसलिंग से खुला परिवार का राज

इलाज के बाद रौशन की काउंसलिंग कराई गई, जिसमें उसने अपने घर, माता-पिता और गांव से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं। इसके बाद सारण जिला प्रशासन और सेवा कुटीर के अधिकारियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसके परिजनों की तलाश शुरू की।

लंबी प्रक्रिया के बाद मिला परिवार

प्रशासन ने विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई। यह प्रक्रिया काफी लंबी और चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन अधिकारियों ने हार नहीं मानी। आखिरकार 18 साल बाद रौशन के परिजनों का पता चल गया और वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर से एक हो गया।

बेटे को देखकर भावुक हुए माता-पिता

अपने बेटे को जीवित सामने देखकर रौशन के माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार ने सारण जिला प्रशासन और सेवा कुटीर का आभार जताया। स्थानीय लोगों ने भी इस मानवीय पहल की जमकर सराहना की।

सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा—

“सामाजिक न्याय एवं पुनर्वास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सेवा कुटीर सारण द्वारा निराश्रित एवं भिक्षावृत्ति से जुड़े व्यक्तियों के संरक्षण, पुनर्वास और पारिवारिक पुनर्मिलन के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।”

मानवता की मिसाल बना प्रशासन

यह कहानी न सिर्फ उम्मीद की मिसाल है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संवेदनशील प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के प्रयास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।


 

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