पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार के गन्ना किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और उनकी आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ गन्ना उद्योग विभाग ने कमर कस ली है। ‘गन्ना यंत्रिकरण योजना’ के तहत कल, यानी 27 फरवरी को राज्य की सभी कार्यरत चीनी मिलों में विशेष यंत्र कैंपों का आयोजन किया जा रहा है। इन कैंपों के माध्यम से चयनित किसान न केवल खेती में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्रों की खरीद कर सकेंगे, बल्कि उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि का भुगतान भी रिकॉर्ड समय में किया जाएगा।
चीनी मिलों में तैनात किए गए एक दर्जन विशेष अधिकारी
कैंप के सफल संचालन और किसानों की सहायता के लिए विभाग ने राज्य भर में एक दर्जन सहायक निदेशकों और ईख अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है। चीनी मिलवार तैनात किए गए अधिकारियों की सूची इस प्रकार है:
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चीनी मिल का नाम |
प्रतिनियुक्त अधिकारी (सहायक निदेशक/ईख अधिकारी) |
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सिधवलिया (गोपालगंज) |
पल्लवी बिष्ट |
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बगहा |
राहुल त्रिपाठी |
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लौरिया |
राहुल वर्मा |
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नरकटियागंज |
बलबीर कुमार |
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सुगौली |
गौतम कुमार पटेल |
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विष्णु चीनी मिल |
श्रेया सिंह |
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हरिनगर |
कमलकांत यादव |
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हसनपुर |
बांकेबिहारी |
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रीगा |
मनोज कुमार चौधरी |
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प्रतापपुर |
ईख अधिकारी (स्थानीय) |
कैसे होगी यंत्रों की खरीद? केवल ‘लिस्टेड’ वेंडर्स को ही इजाजत
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन कैंपों में केवल उन्हीं विक्रेताओं (Vendors) को स्टॉल लगाने की अनुमति होगी जो विभाग द्वारा सूचीबद्ध (Listed) किए गए हैं।
- चयनित किसान: जिन किसानों का चयन इस योजना के लिए पहले ही हो चुका है, वे ही इन कैंपों में भाग ले सकेंगे।
- अधिकृत खरीद: किसानों को अपनी पसंद के आधुनिक यंत्र केवल इन्हीं अधिकृत विक्रेताओं के स्टॉल से खरीदने होंगे।
- सत्यापन: खरीद के तुरंत बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा यंत्रों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
बड़ी राहत: 3 दिनों के भीतर खाते में आएगी अनुदान राशि
गन्ना उद्योग विभाग ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए अनुदान भुगतान की प्रक्रिया को बेहद तेज कर दिया है। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यंत्रों की खरीद और उनके भौतिक सत्यापन के बाद मात्र 3 दिनों के अंदर लाभुक किसानों के बैंक खाते में अनुदान की राशि भेज दी जाएगी। यह कदम किसानों को आर्थिक बोझ से बचाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
VOB का नजरिया: मशीनीकरण से बदलेगी गन्ने की खेती
बिहार में गन्ने की खेती में अब भी बड़े पैमाने पर पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत बढ़ती है और मुनाफा कम होता है। ‘गन्ना यंत्रिकरण योजना’ के तहत कैंप लगाकर सीधे मिल परिसर में यंत्र उपलब्ध कराना एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल किसानों का समय बचेगा, बल्कि दलालों और बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होगी। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कैंप में सभी प्रकार के छोटे-बड़े कृषि यंत्र पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


