भागलपुर के रंगरा प्रखंड के चापर गांव में देशभक्ति और आंसुओं से भरा मंजर था। जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों की गोली का शिकार हुए हवलदार अंकित यादव (35) का अंतिम संस्कार घुटने तक पानी में किया गया। बारिश से भरे गांव में ईंट भट्ठे के किनारे तिरंगे में लिपटे जवान को अंतिम सलामी दी गई।
चार साल के बेटे उत्कर्ष ने कांपते हाथों से पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देख हर आंख नम हो उठी। पत्नी रूबी कुमारी ने रोते हुए अपना मंगलसूत्र उतारकर पति के पार्थिव शरीर पर रख दिया और सेना के अफसरों से सवाल किया—
“हमले के वक्त पूरा बटालियन वहां नहीं था क्या?”
अफसरों ने जवाब दिया— “सभी थे।”
पत्नी ने फिर पूछा— “फिर ये कैसे हो गया?”
गांव में गाड़ी फंसी, कंधे पर लाया गया पार्थिव शरीर
बारिश के पानी से गांव की गलियां लबालब थीं। जब सेना का वाहन गांव में घुसा तो गाड़ी बीच रास्ते फंस गई। ऐसे में जवान के साथियों ने कंधों पर पार्थिव शरीर उठाया और घर तक पहुंचाया। इस दौरान भारत माता के जयकारे और देशभक्ति गीत गूंजते रहे।
बारामुला में आतंकियों की फायरिंग में हुए शहीद
12 अगस्त की रात बारामुला जिले के उरी सेक्टर के टिका पोस्ट पर अचानक आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में अंकित गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले AIP-06 और फिर देवी पोस्ट ले जाया गया, जहां रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर ने ढाई घंटे तक जान बचाने की कोशिश की, लेकिन 13 अगस्त की सुबह 6:15 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली।
2009 में सेना में भर्ती, बचपन से था देशसेवा का सपना
2009 में सेना में भर्ती हुए अंकित का बचपन से ही सपना था कि वे देश की सेवा करें। एक माह पहले ही मेरठ से कश्मीर ट्रांसफर हुआ था। 15 दिन पहले ही छुट्टी खत्म कर वे ड्यूटी पर लौटे थे।
2017 में हुई थी शादी
कटिहार की रूबी कुमारी से अंकित की शादी 2017 में हुई थी। उत्कर्ष (4) और उपांश (2) उनके दो बेटे हैं। शहादत की खबर मिलते ही रूबी अपने मायके से भागलपुर पहुंचीं।
गांव और देश के लिए गर्व, पर परिवार की आंखों में दर्द
अंकित के बड़े भाई निरंजन यादव ने कहा—
“छोटे भाई की शहादत पर गर्व है, लेकिन दर्द भी है। वो बचपन से देश की सेवा करना चाहता था।”
शहीद की विदाई में पूरा गांव, प्रशासनिक अफसर, सेना के जवान और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे मौजूद रहे।


