
मालदा। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। 15 मई से 5 जून तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता, अपशिष्ट पृथक्करण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शुक्रवार को मंडल के कई प्रमुख स्टेशनों पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों और स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस बार अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को कचरे के सही प्रबंधन और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना है। रेलवे का मानना है कि यदि लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिणाम हासिल किया जा सकता है।
मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान के दौरान विशेष रूप से जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग रखने के महत्व पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सही तरीके से अपशिष्ट पृथक्करण करने से न केवल कचरे के निपटान की प्रक्रिया आसान होती है, बल्कि पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
अभियान के तहत न्यू फरक्का, बड़हरवा, हंसडीहा सहित कई रेलवे स्टेशनों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों को अलग-अलग रंग के डस्टबिन के उपयोग, जैविक कचरे के सुरक्षित निपटान और प्लास्टिक कचरे को कम करने के उपायों की जानकारी दी गई। रेलवे अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि स्टेशन परिसर में कचरा फैलाने से न केवल गंदगी बढ़ती है बल्कि इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन) के पर्यवेक्षण में आयोजित इस अभियान के दौरान यात्रियों को यह भी बताया गया कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक जैसे प्लास्टिक कप, प्लेट, बोतल और पॉलीथिन पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हैं। रेलवे प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे कपड़े या जूट के बैग का उपयोग करें और यात्रा के दौरान प्लास्टिक सामग्री के इस्तेमाल से बचें।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि रेलवे स्टेशन केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण केंद्र हैं। हर दिन हजारों लोग रेलवे स्टेशनों से गुजरते हैं, इसलिए यहां चलाए गए जागरूकता अभियान का असर बड़े स्तर पर दिखाई देता है। इसी सोच के साथ मालदा मंडल लगातार पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
अभियान के दौरान कई स्थानों पर कर्मचारियों और यात्रियों के बीच संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इसमें लोगों से पूछा गया कि वे अपने घरों और कार्यस्थलों पर कचरे के प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाते हैं। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यदि घरों में ही जैविक और अजैविक कचरे को अलग कर दिया जाए तो नगर निकायों और सफाई व्यवस्था पर दबाव काफी कम हो सकता है।
रेलवे ने इस दौरान स्वच्छ और हरित रेलवे परिसर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है। कई स्टेशनों पर अतिरिक्त डस्टबिन लगाए गए हैं और नियमित सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके अलावा यात्रियों को स्टेशन परिसर में कचरा न फैलाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्लास्टिक कचरा एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक नदियों, जलाशयों और जमीन में पहुंच जाता है, जिससे प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि यहां प्रतिदिन लाखों लोग आते-जाते हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मालदा मंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक निरंतर प्रयास है। रेलवे कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कार्यस्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएं। कई स्टेशनों पर पेपर कप और पुन: उपयोग योग्य सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अभियान के दौरान लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यदि समाज सामूहिक रूप से जिम्मेदारी निभाए तो प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा और गंदगी जैसी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान स्टेशन परिसर और ट्रेनों में साफ-सफाई बनाए रखें। खाने-पीने की वस्तुओं के रैपर और प्लास्टिक बोतलें इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित डस्टबिन में डालें। इसके साथ ही लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के तहत चल रहे इस अभियान के माध्यम से मालदा मंडल पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी गंभीरता दिखा रहा है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि यदि इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएं तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और आने वाले समय में रेलवे परिसरों को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
मालदा मंडल की यह पहल न केवल रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि यह समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी प्रभावी माध्यम बनती दिखाई दे रही है।


