गंगा के पानी से बदलेगी बांका-मुंगेर की खेती की तस्वीर, हजारों हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा सिंचाई जल

पटना। बिहार में खेती और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया है कि सुल्तानगंज के पास गंगा नदी के जल को बाढ़ अवधि के दौरान संग्रहित कर बदुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाया जाए, ताकि बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों के हजारों किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा मिल सके। सरकार का दावा है कि इस महत्वाकांक्षी योजना के लागू होने के बाद क्षेत्र में खेती की स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी और सूखे जैसी समस्याओं से काफी राहत मिलेगी।

राज्य सरकार के अनुसार जुलाई से अक्टूबर के बीच गंगा नदी में जलस्तर काफी बढ़ जाता है। इसी अतिरिक्त जल का उपयोग करते हुए उसे विशेष पंपिंग प्रणाली के माध्यम से जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद इन जलाशयों में पानी का भंडारण कर कृषि क्षेत्रों तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस योजना का कार्य तेजी से पूरा किया जाए ताकि किसानों को जल्द लाभ मिल सके।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बांका जिले के फुल्लीडूमर प्रखंड को मिलने वाला है। यहां स्थित फुल्लीडूमर, मध्यागिरि और बिलासी जलाशयों में गंगा का पानी संग्रहित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन जलाशयों के जरिए फुल्लीडूमर और अमरपुर प्रखंड के निर्धारित कमांड क्षेत्र के लगभग 4204 हेक्टेयर इलाके में शत-प्रतिशत सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे किसानों को समय पर पानी मिलेगा और फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बदुआ जलाशय के जरिए बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों के कुल 45,850 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं खड़गपुर जलाशय के माध्यम से मुंगेर जिले के लगभग 5,310 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। यानी यह परियोजना सीधे तौर पर तीन जिलों की कृषि व्यवस्था को प्रभावित करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन और अनियमित बारिश के कारण बिहार के कई जलाशयों की जल भंडारण क्षमता प्रभावित हुई है। बदुआ और खड़गपुर जलाशय भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक बदुआ जलाशय की भंडारण क्षमता में करीब 39.78 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि खड़गपुर जलाशय की क्षमता लगभग 69.59 प्रतिशत तक घट गई है। इसका सीधा असर सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा है।

इन दोनों जलाशयों के माध्यम से कुल 51,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन वर्तमान में केवल 19,136 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई संभव हो पा रही है। परिणामस्वरूप किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पा रहा और खेती प्रभावित हो रही है। खासकर धान, गेहूं और दलहन जैसी फसलों पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने गंगा जल उद्वह योजना का विस्तार करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत बिजीखोरवा सिंचाई कॉलोनी में निर्माणाधीन डिटेंशन टैंक से बड़े मोटर पंपों की सहायता से गंगा का पानी उठाया जाएगा। इसके लिए तीन हाई-कैपेसिटी मोटर पंप लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से लगभग 15.02 मिलियन क्यूबिक मीटर जल जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा।

जल संसाधन विभाग के अनुसार पानी को पहुंचाने के लिए लंबी पाइपलाइन प्रणाली विकसित की जा रही है। योजना के तहत 0.90 मीटर व्यास की लगभग 26 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा 0.50 मीटर व्यास की करीब 1.15 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त पाइपलाइन भी बनाई जाएगी। इन पाइपलाइनों के माध्यम से पानी सीधे फुल्लीडूमर, मध्यागिरि और बिलासी जलाशयों तक पहुंचेगा।

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 174.52 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं गंगा जल को बदुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाने वाली व्यापक योजना पर कुल 1866.11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह बिहार की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

सरकार का मानना है कि योजना पूरी होने के बाद खेती पर निर्भर लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को मानसून पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और सालभर सिंचाई की सुविधा मिलने से बहुफसली खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण बना रहता है तो गर्मी और कम वर्षा की स्थिति में भी खेतों तक पानी पहुंचाना संभव होगा। इससे सूखा प्रभावित इलाकों में खेती का संकट काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही भूजल पर निर्भरता भी घटेगी, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

स्थानीय किसानों ने भी इस योजना को राहत देने वाला कदम बताया है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से कम बारिश और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण खेती प्रभावित हो रही थी। समय पर पानी नहीं मिलने से उत्पादन लागत बढ़ रही थी और फसल नुकसान का खतरा बना रहता था। अब यदि गंगा का पानी सीधे जलाशयों तक पहुंचेगा तो खेती की स्थिति बेहतर हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि परियोजना के निर्माण कार्य में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में बिहार के अधिक से अधिक कृषि क्षेत्रों को स्थायी सिंचाई व्यवस्था से जोड़ा जा सके।

राज्य सरकार की यह पहल केवल सिंचाई परियोजना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो बांका, भागलपुर और मुंगेर के हजारों किसानों की खेती और आय दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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