मालदा मंडल में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर भव्य आयोजन, हिंदी कार्यान्वयन और सांस्कृतिक विरासत पर विशेष जोर

पूर्व रेलवे के मालदा मंडल में शुक्रवार को साहित्य, संस्कृति और राजभाषा हिंदी को समर्पित एक विशेष आयोजन किया गया। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय स्थित मंदार सभाकक्ष में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती, मंडल राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक और राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन एक साथ किया गया। कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, साहित्य प्रेमियों और विभिन्न शाखाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने की। आयोजन राजभाषा विभाग के तत्वावधान में किया गया, जिसमें हिंदी के प्रचार-प्रसार और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने सबसे पहले श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम के दौरान गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के साहित्यिक, सांस्कृतिक और मानवीय योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि टैगोर केवल कवि या साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मानवीय मूल्यों के वैश्विक प्रतीक थे।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारत के पहले व्यक्ति के रूप में याद किया गया। उनकी प्रसिद्ध कृति “गीतांजलि” का भी विशेष उल्लेख किया गया, जिसने विश्व साहित्य में भारतीय संस्कृति और दर्शन को नई पहचान दिलाई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में टैगोर विचार मंच, साहेबगंज के डॉ. रंजीत कुमार सिंह और हिमांशु गुहा मौजूद रहे। दोनों वक्ताओं ने गुरुदेव के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से अपने विचार रखे।

डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्य के माध्यम से मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना को नई अभिव्यक्ति दी। उनकी रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने का काम करती हैं।

वहीं हिमांशु गुहा ने टैगोर के शिक्षा दर्शन और सांस्कृतिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय परंपरा और आधुनिक विचारधारा के बीच अद्भुत संतुलन स्थापित किया।

कार्यक्रम के दौरान महिला कर्मचारियों द्वारा गुरुदेव के गीतों और कविताओं की प्रस्तुति भी दी गई। संगीत और काव्य के माध्यम से गुरुदेव को श्रद्धांजलि देने का यह विशेष क्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना रहा।

महिला कर्मचारियों ने टैगोर की रचनाओं को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मंडल की राजभाषा ई-पत्रिका “बढ़ते कदम” का औपचारिक विमोचन भी किया गया। मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने ई-पत्रिका का लोकार्पण करते हुए कहा कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में इस तरह की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में ई-पत्रिकाएं हिंदी साहित्य और रचनात्मकता को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। विभिन्न विभागों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग, कार्यालयी कार्यों में राजभाषा के उपयोग और साहित्यिक योगदान के लिए कर्मचारियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

मंडल रेल प्रबंधक ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयी कार्यों में हिंदी के अधिक प्रयोग पर जोर दिया।

तिमाही राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक में मार्च 2026 तक की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा हिंदी में किए गए कार्यों और राजभाषा नीति के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।

अपर मंडल रेल प्रबंधक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी अमरेंद्र कुमार मौर्य सहित सभी शाखा अधिकारी और समिति सदस्य बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग, कार्यालयी पत्राचार में राजभाषा के उपयोग और कर्मचारियों के लिए हिंदी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर सुझाव दिए।

मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि रेलवे जैसे बड़े संगठन में राजभाषा हिंदी का प्रभावी उपयोग प्रशासनिक कार्यों को अधिक सरल और जनसुलभ बनाता है।

उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ भारतीय भाषाई विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में भी लगातार काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि मालदा मंडल समय-समय पर साहित्यिक, सांस्कृतिक और राजभाषा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन कर्मचारियों में सांस्कृतिक जुड़ाव और रचनात्मकता को भी मजबूत करता है।

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में भी मालदा मंडल में हिंदी और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया गया। आयोजन का समापन हिंदी और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के संदेश के साथ हुआ।

मालदा मंडल का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और राजभाषा हिंदी के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक बनकर सामने आया।

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