12 साल बाद मोतिहारी तेजाब कांड में आया बड़ा फैसला, सभी आरोपी दोषी करार; 6 जुलाई को होगी सजा का ऐलान

मोतिहारी: बिहार के बहुचर्चित मोतिहारी तेजाब कांड मामले में 12 वर्षों बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मोतिहारी सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। अब इस मामले में सजा पर अंतिम फैसला 6 जुलाई को सुनाया जाएगा। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय की उम्मीद जगी है।

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पप्पू सिंह ने बताया कि यह संवेदनशील मामला पिछले 12 वर्षों से न्यायालय में लंबित था। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से कई गवाह पेश किए गए, वैज्ञानिक साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी गईं। सभी तथ्यों की गहन समीक्षा के बाद न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराया।

पुश्तैनी जमीन के विवाद से शुरू हुआ था पूरा मामला

घटना की शुरुआत वर्ष 2008 में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर हुए विवाद से हुई थी। पीड़ित अभय कुमार कश्यप के अनुसार, उनके पिता ने अपनी संपत्ति तीनों बेटों के बीच बराबर बांट दी थी। आरोप है कि बड़े भाई विजय राय की नजर अभय के हिस्से की जमीन पर थी। चूंकि अभय की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन पर जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने इनकार किया तो विवाद लगातार बढ़ता गया।

जमीन नहीं मिली तो रची गई खौफनाक साजिश

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बड़े भाई विजय राय ने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों के साथ मिलकर अभय की पत्नी पर तेजाब हमला करने की साजिश रची। अचानक हुए इस हमले में अभय की पत्नी गंभीर रूप से झुलस गईं।

जब बीच-बचाव के लिए परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे तो आरोपियों ने उन पर भी तेजाब फेंक दिया। इस हमले में बीच वाले भाई की पत्नी और उनके मासूम बच्चे भी गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

12 साल चली कानूनी लड़ाई

घटना के बाद सभी घायलों का इलाज मोतिहारी सदर अस्पताल में कराया गया और घोड़ासहन थाने में आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई करीब 12 वर्षों तक चली।

लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अब सभी आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है।

6 जुलाई को तय होगी सजा

फिलहाल अदालत ने सजा पर फैसला सुरक्षित रखा है। 6 जुलाई को यह तय होगा कि दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी। पीड़ित परिवार ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।

उम्रकैद तक की हो सकती है सजा

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, तेजाब हमले जैसे मामलों में आईपीसी की धारा 326A के तहत न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जिसका उपयोग पीड़ित के इलाज और पुनर्वास के लिए किया जाता है।

अब पूरे मोतिहारी की निगाहें 6 जुलाई को आने वाले अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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