
पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में उठे असंतोष के बीच पार्टी नेतृत्व ने बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ दलित नेता Shivchandra Ram का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। पार्टी नेताओं की पहल और बातचीत के बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी दूर हो गई है और उन्होंने संगठन में बने रहने पर सहमति जता दी है।
MLC टिकट नहीं मिलने पर दिया था इस्तीफा
सोमवार को हुए राजनीतिक घटनाक्रम में शिवचंद्र राम ने अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में एससी-एसटी समाज और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। विधान परिषद की रिक्त सीट पर टिकट नहीं मिलने से वे काफी आहत नजर आए थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक होकर रो पड़े थे
इस्तीफे की घोषणा के दौरान शिवचंद्र राम बेहद भावुक हो गए थे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूट-फूटकर रो पड़े थे। उन्होंने अपने दो पन्नों के त्यागपत्र में पार्टी नेतृत्व को लिखा था कि दलित समाज, विशेषकर रविदास समाज और हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को झटका लगा है।
RJD ने कहा- हमारे पुराने और समर्पित सिपाही हैं
राजद के मुख्य प्रवक्ता Shakti Singh Yadav ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
उन्होंने कहा,
“शिवचंद्र राम राजद के पुराने और समर्पित सिपाही हैं। सामाजिक न्याय की विचारधारा के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है और पार्टी उनके योगदान का सम्मान करती है।”
पार्टी के अनुसार मुख्य सचेतक Kumar Sarvjeet समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे मुलाकात कर बातचीत की, जिसके बाद उनकी नाराजगी दूर हो गई।
सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से उठा था विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब RJD ने विधान परिषद चुनाव के लिए Sunil Kumar Singh को उम्मीदवार बनाया। उनकी उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
यहां तक कि Rohini Acharya ने भी सोशल मीडिया पर उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल उठाए थे, जिससे राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई थी।
विपक्ष और सहयोगियों ने भी उठाए सवाल
शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई थी। Tej Pratap Yadav ने उनके समर्थन में बयान दिया था, जबकि केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने भी इस मुद्दे पर RJD नेतृत्व को घेरने की कोशिश की थी।
फिलहाल टला संकट, लेकिन सवाल बरकरार
पार्टी ने भले ही शिवचंद्र राम को मना लिया हो और उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया हो, लेकिन विधान परिषद उम्मीदवार चयन को लेकर उठे सवाल अभी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में RJD के भीतर सामाजिक समीकरणों और टिकट वितरण की राजनीति पर असर डाल सकता है।
फिलहाल, पार्टी नेतृत्व ने तत्काल संकट टाल दिया है और शिवचंद्र राम के संगठन में बने रहने से RJD को बड़ी राहत मिली है।


