बिहार में ‘डेटा डकैती’ का बड़ा खुलासा! सॉफ्टवेयर इंजीनियर निकला साइबर ठगों का ‘खबरी’; करोड़ों मोबाइल यूजर्स का निजी डेटा बेचने पर सारण से गिरफ्तार

HIGHLIGHTS

  • बड़ी गिरफ्तारी: बिहार पुलिस की साइबर यूनिट (CCSU) ने सारण से सॉफ्टवेयर इंजीनियर ब्रजेश कुमार को दबोचा।
  • डेटा की सेल: मोबाइल उपभोक्ताओं का SDR (नाम, पता, आधार) टेलीग्राम के जरिए बेचा जा रहा था।
  • टेलीग्राम बॉट का खेल: ‘स्टार्क स्पेस’ जैसे ग्रुप्स और बॉट्स के जरिए चंद सेकंड में लीक हो रही थी निजी जानकारी।
  • पुख्ता सबूत: एप्पल लैपटॉप और मोबाइल बरामद; आरोपी के नंबरों पर पहले से ही दर्ज थीं कई साइबर शिकायतें।

सारण/पटना | 15 मार्च, 2026

​बिहार में आपकी प्राइवेसी पर एक बड़ा ‘डिजिटल हमला’ हुआ है। बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने एक ऐसे शातिर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जो आपकी निजी जानकारी (डेटा) को बाजार में बेच रहा था। सारण जिले के तरैया पचरौर निवासी ब्रजेश कुमार को पुलिस ने उसके आवास से गिरफ्तार किया है। आरोपी पेशे से इंजीनियर है, लेकिन उसने अपने हुनर का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए किया।

टेलीग्राम बॉट से चंद सेकंड में खुल जाती थी ‘कुंडली’

​पूछताछ में ब्रजेश ने जो खुलासा किया है, वह बेहद डरावना है। उसने बताया कि वह ‘स्टार्क स्पेस 2’ (Stark Space 2) और ‘स्टार्क स्पेस इन’ (Stark Space In) जैसे टेलीग्राम बॉट्स का इस्तेमाल करता था। इन बॉट्स में किसी भी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालते ही उसका पूरा नाम, घर का पता और आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी सामने आ जाती थी। ब्रजेश इसी डेटा को साइबर अपराधियों के साथ शेयर और सेल कर रहा था।

सर्वर हैक या मिलीभगत? पुलिस को बड़ी साजिश का शक

​जांच अधिकारियों का मानना है कि इतना सटीक डेटा बिना किसी बड़ी सेंधमारी के मिलना मुश्किल है। पुलिस दो बिंदुओं पर जांच कर रही है:

  1. ​क्या मोबाइल कंपनियों के सर्वर को हैक किया गया है?
  2. ​क्या मोबाइल कंपनियों के अंदर बैठे कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह डेटा लीक हुआ है? यह डेटा (SDR) सीधे तौर पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ठगों को शिकार के बारे में सब कुछ पता चल जाता है।

एप्पल लैपटॉप और मोबाइल में छिपे थे ‘गद्दारी’ के राज

​पुलिस ने ब्रजेश के पास से एक एप्पल का लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किया है। हैरानी की बात यह है कि जब नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (NCRP) पर उसके नंबरों की जांच की गई, तो उसके तीनों सिम कार्ड पर पहले से ही साइबर ठगी से जुड़ी कई शिकायतें दर्ज मिलीं। सारण के साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर अब उससे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुँचा जा सके।

VOB का नजरिया: जब ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बन जाए!

​एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जिससे समाज तकनीक के जरिए उन्नति की उम्मीद करता है, अगर वही ‘डेटा चोर’ बन जाए तो यह डिजिटल इंडिया के लिए बड़ा खतरा है। मोबाइल कंपनियां दावे तो बड़े-बड़े करती हैं, लेकिन आपका आधार और पता ‘टेलीग्राम’ पर सरेआम बिक रहा है—यह सिस्टम की बड़ी विफलता है। प्राइवेसी अब एक भ्रम बनती जा रही है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ आपसे अपील करता है कि अनजान कॉल पर अपनी कोई भी जानकारी साझा न करें और संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप्स से दूर रहें।

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