सीतामढ़ी में नशा और डॉलर का ‘इंटरनेशनल’ खेल! STF की छापेमारी में 2 नेपाली समेत 5 गिरफ्तार; सरगना फरार

HIGHLIGHTS

  • बड़ी संयुक्त कार्रवाई: एसटीएफ (STF) और बेला थाना पुलिस ने सिरसिया गांव में मारा छापा।
  • विदेशी मुद्रा बरामद: नशीली दवाओं के साथ अमेरिकी डॉलर और नेपाली करेंसी मिलने से सुरक्षा एजेंसियां हैरान।
  • गिरफ्तारी: 2 महिलाओं और 2 नेपाली तस्करों समेत कुल 5 धंधेबाज दबोचे गए।
  • नेटवर्क की तलाश: फरार मास्टरमाइंड विजय महतो की तलाश में छापेमारी जारी।

सीतामढ़ी | 15 मार्च, 2026

​भारत-नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी के बेला थाना क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने नशीली दवाओं के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि सीमावर्ती इलाकों में केवल नशे का कारोबार ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्राओं का भी अवैध लेन-देन धड़ल्ले से चल रहा है।

विजय महतो के घर से चल रहा था ‘काला साम्राज्य’

​पुलिस को एसटीएफ के जरिए पुख्ता सूचना मिली थी कि बेला थाने के सिरसिया गांव निवासी विजय महतो के घर से बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की तस्करी की जा रही है। शुक्रवार को जब पुलिस टीम ने घेराबंदी कर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद की गईं। हालांकि, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड विजय महतो पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा।

2 नेपाली तस्कर और 2 महिलाएं गिरफ्तार, डॉलर ने बढ़ाई चिंता

​छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें नेपाल के महोतरी जिले के रहने वाले विकास यादव और विजय यादव शामिल हैं, जो सीमा पार से इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। इनके अलावा स्थानीय निवासी अमृता कुमारी, पुष्पा देवी और अरुण कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है।

​सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात अमेरिकी डॉलर (USD) और नेपाली मुद्रा की बरामदगी है। एएसपी सह सदर एसडीपीओ-टू आशीष आनंद ने बताया कि सीमाई इलाके में अमेरिकी डॉलर का मिलना एक गंभीर मामला है। यह न केवल ड्रग तस्करी बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग या किसी बड़ी साजिश की ओर भी इशारा करता है।

VOB का नजरिया: क्या ‘उड़ता बिहार’ की तैयारी है?

​सीतामढ़ी बॉर्डर पर नशीली दवाओं के साथ अमेरिकी डॉलर का मिलना इस बात का संकेत है कि यह धंधा अब गली-मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय माफियाओं से जुड़े हैं। नेपाली नागरिकों की संलिप्तता और विदेशी मुद्रा की मौजूदगी बताती है कि सीमा पर निगरानी के बावजूद तस्करी के रास्ते खुले हुए हैं। पुलिस के लिए चुनौती केवल इन प्यादों को पकड़ना नहीं, बल्कि उस ‘रूट’ और ‘किंगपिन’ को खत्म करना है जो बिहार की युवा पीढ़ी की नसों में जहर घोल रहा है। डॉलर की मौजूदगी की जांच एनआईए (NIA) या अन्य केंद्रीय एजेंसियों के स्तर से भी होनी चाहिए।

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