कानपुर फर्जी डिग्री रैकेट का बड़ा खुलासा: 3 विश्वविद्यालयों की 287 डिग्रियां फर्जी, SIT जांच में सामने आया सच

कानपुर | 20 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट रैकेट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से जुड़ी कुल 287 डिग्रियां और मार्कशीट पूरी तरह फर्जी पाई गई हैं। इस खुलासे के बाद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे ज्यादा फर्जी डिग्रियां एक यूनिवर्सिटी की

जांच के अनुसार, मणिपुर स्थित एशियन यूनिवर्सिटी की 284 डिग्रियां और मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं। SIT ने जब इन डिग्रियों के रोल नंबर और रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि इनका किसी भी आधिकारिक गजट या विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं है।

इसके अलावा, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की 2 डिग्रियां और अरुणाचल प्रदेश की हिमालयन यूनिवर्सिटी की 1 डिग्री भी फर्जी साबित हुई है।

CSJM यूनिवर्सिटी को सौंपे गए दस्तावेज

जांच के दौरान SIT ने 371 संदिग्ध दस्तावेज—जिनमें डिग्रियां, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट शामिल हैं—छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी (CSJMU), कानपुर को सत्यापन के लिए सौंप दिए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन इन दस्तावेजों की जांच 2-3 दिनों में पूरी करेगा।

छापेमारी में मिला था बड़ा नेटवर्क

यह मामला 18 फरवरी 2026 को सामने आया था, जब पुलिस ने किदवई नगर इलाके में स्थित एक एजुकेशन संस्थान पर छापेमारी की थी। वहां से 900 से अधिक फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए थे, जो 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों और यूपी बोर्ड से जुड़े बताए गए थे।

इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी जैसे प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां भी शामिल थीं।

2012 से सक्रिय था गिरोह

जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह करीब एक दशक से ज्यादा समय से सक्रिय था। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा बताया जा रहा है, जो खुद एक शिक्षक है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिना परीक्षा दिए डिग्रियां और मार्कशीट तैयार कर लाखों रुपये में बेचता था। जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के सबूत भी मिले हैं।

कई आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

अब तक इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में विभिन्न राज्यों में छापेमारी की जा रही है।

SIT की टीम देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जाकर रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला शिक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर हो रही धांधली की ओर इशारा करता है। बिना परीक्षा के डिग्रियां जारी होना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ भी अन्याय होता है।

निष्कर्ष

कानपुर का यह फर्जी डिग्री कांड एक बड़े संगठित नेटवर्क का संकेत देता है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे रैकेट को किस हद तक उजागर कर पाती हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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