
नालंदा | 20 मार्च 2026: जहां देश के अधिकांश हिस्सों में ईद-उल-फितर के चांद का इंतजार जारी था, वहीं बिहार के नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के कई गांवों में ईद का त्योहार एक दिन पहले ही मनाया गया। बड़ाकर समेत आसपास के गांवों में शुक्रवार को ही नमाज़-ए-ईद अदा कर लोगों ने जश्न मनाया, जिससे यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
गुरुवार शाम दिखा चांद, शुरू हो गया जश्न
स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार शाम चांद दिखने की पुष्टि होते ही गांवों में ईद की तैयारियां शुरू हो गईं। रात भर मस्जिदों और ईदगाहों में रौनक बनी रही और शुक्रवार सुबह लोगों ने नमाज़ अदा कर एक-दूसरे को गले मिलकर मुबारकबाद दी।
गांवों में हर तरफ “ईद मुबारक” की गूंज सुनाई दी और माहौल पूरी तरह उत्सव में डूबा नजर आया।
सऊदी अरब से जुड़ी है परंपरा
इस अनोखी परंपरा के पीछे इन गांवों का सऊदी अरब से गहरा संबंध बताया जा रहा है। इलाके के बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए सऊदी अरब में रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यहां सऊदी अरब में चांद दिखने के आधार पर ही ईद मनाने की परंपरा चली आ रही है। जैसे ही वहां ईद का ऐलान होता है, गांवों में भी उसी हिसाब से त्योहार मनाया जाता है।
भावनाओं से जुड़ी है परंपरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि विदेश में रहने वाले अपनों से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता भी है। इसी वजह से वे इस परंपरा को आज भी निभा रहे हैं।
नमाज़ और दुआओं के साथ मनाई गई ईद
सुबह होते ही बच्चे, युवा और बुजुर्ग नए कपड़ों में ईदगाह पहुंचे और नमाज़ अदा की। नमाज़ के बाद देश में अमन-चैन, तरक्की और भाईचारे के लिए दुआएं मांगी गईं।
इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दी।
घर-घर में जश्न का माहौल
ईद के मौके पर घरों में सिवइयां और तरह-तरह के पकवान बनाए गए। बच्चों में ईदी को लेकर खास उत्साह देखा गया, जबकि बड़े लोग मेहमानों की खातिरदारी में जुटे रहे।
निष्कर्ष
नालंदा के इन गांवों में एक दिन पहले मनाई गई ईद यह दिखाती है कि परंपराएं सिर्फ कैलेंडर से नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों से भी जुड़ी होती हैं। सऊदी अरब से जुड़े इस खास संबंध ने यहां की ईद को अलग पहचान दे दी है, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है।


