
पटना: खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर और ज्ञान बिंदु एकेडमी के संस्थापक रोशन आनंद के बीच चल रहे विवाद में पटना सिविल कोर्ट से खान सर को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक (No Coercive Action) को 3 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है।
3 जुलाई तक टली सुनवाई
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित करते हुए पुलिस को घटना से जुड़ी अपडेटेड केस डायरी और खान सर के निजी बॉडीगार्ड्स के हथियारों के लाइसेंस एवं परमिट संबंधी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों के आने तक खान सर को अंतरिम राहत जारी रहेगी।
कोर्ट ने क्यों मांगी रिपोर्ट?
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से खान सर के निजी सुरक्षाकर्मियों के हथियारों के लाइसेंस की वैधता और पुलिस जांच रिपोर्ट तलब की। साथ ही घटना से संबंधित ताजा केस डायरी भी मांगी गई है।
इन रिपोर्टों के आधार पर ही अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और अग्रिम जमानत पर अंतिम निर्णय करेगी।
कोचिंग संस्थानों के विवाद से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु एकेडमी के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। आरोप है कि 2 जून की रात दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें तोड़फोड़ और कथित हवाई फायरिंग की घटना भी सामने आई।
विरोधी पक्ष का आरोप है कि खान सर के निजी बॉडीगार्ड्स ने भीड़ को डराने के उद्देश्य से गोलियां चलाई थीं।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुई थी एफआईआर
घटना के बाद पटना पुलिस ने खान सर, रोशन आनंद, उनके सुरक्षाकर्मियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।
मामले में खान सर के दोनों निजी बॉडीगार्ड्स को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
दोनों पक्षों को मिल चुकी है राहत
इस मामले में खान सर को 9 जून को अग्रिम जमानत मिली थी। वहीं, 15 जून को ज्ञान बिंदु एकेडमी के संचालक रोशन आनंद को भी नियमित जमानत मिल गई थी।
हालांकि, इसी दौरान रोशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में मौत हो गई थी, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
अब सभी की नजरें 3 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पुलिस की रिपोर्ट और केस डायरी के आधार पर अदालत आगे का फैसला करेगी।


