
बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत खेल कोटे से मिली सरकारी नौकरियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक खिलाड़ी के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के खुलासे के बाद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने रग्बी खेल से नौकरी पाने वाले करीब 25 खिलाड़ियों के दस्तावेजों और खेल रिकॉर्ड की जांच कराने का फैसला किया है।
प्राधिकरण अब केवल प्रमाणपत्रों की ही नहीं, बल्कि संबंधित प्रतियोगिताओं की वीडियो फुटेज, मैच रिकॉर्डिंग और पुरस्कार वितरण समारोह के रिकॉर्ड की भी जांच करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नौकरी पाने के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का दावा करने वाले खिलाड़ी वास्तव में मैदान पर उतरे थे या नहीं।
सुधांशु कुमार मामले के बाद शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला रग्बी खिलाड़ी सुधांशु कुमार से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022 की जूनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप का प्रमाणपत्र दिखाकर खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल की थी।
जांच में दावा किया गया कि चयनित टीम में उनका नाम शामिल था, लेकिन वास्तविक मुकाबलों में उनकी जगह किसी अन्य खिलाड़ी ने हिस्सा लिया। मामला सामने आने के बाद बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने सुधांशु कुमार को निलंबित कर दिया था।
वीडियो फुटेज और मैच रिकॉर्ड से होगा सत्यापन
खेल प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की वीडियो रिकॉर्डिंग, खिलाड़ियों की भागीदारी, टीम सूची और पुरस्कार वितरण समारोह के फुटेज का मिलान किया जाएगा।
इसके अलावा, संबंधित राष्ट्रीय टूर्नामेंटों का रिकॉर्ड रग्बी इंडिया से भी मांगा जाएगा। यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित खिलाड़ियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संविदा कोच की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान एक संविदा कोच की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। इसी वजह से अब पूरे रग्बी कोटे से हुई नियुक्तियों की व्यापक जांच का निर्णय लिया गया है।
खेल प्राधिकरण का मानना है कि खेल कोटे में पारदर्शिता बनाए रखने और फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए यह कदम जरूरी है।
रग्बी संघ के सचिव पर लगे भाई-भतीजावाद के आरोप
इस बीच बाढ़ निवासी राष्ट्रीय स्तर के रग्बी खिलाड़ी संजीव कुमार ने रग्बी फुटबॉल संघ ऑफ बिहार के सचिव पर भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि खेल कोटे में नियमों की अनदेखी कर एक अभ्यर्थी को नौकरी दिलाई गई, जबकि उसने आवश्यक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया था। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
सचिव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
रग्बी फुटबॉल संघ ऑफ बिहार के सचिव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि टीम चयन और खिलाड़ियों के मैदान पर खेलने की प्रक्रिया में संघ की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर जांच कराई जाती है, तो वह पूरा सहयोग करेंगे।
खेल कोटे की पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का कहना है कि खेल कोटे से सरकारी नौकरी केवल वास्तविक खिलाड़ियों को ही मिले, इसके लिए सभी तथ्यों का गहन सत्यापन किया जाएगा।
प्राधिकरण ने साफ किया है कि यदि किसी खिलाड़ी ने फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देकर नौकरी हासिल की है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इस जांच से खेल कोटे की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।


