
समाचार के मुख्य बिंदु: खूनी अंजाम से पहले ही हरकत में आई भागलपुर पुलिस
- बड़ी कामयाबी: भागलपुर जिले के सुलतानगंज थाना क्षेत्र के नवादा बहियार इलाके में पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को अंजाम देने से ठीक पहले कुचल दिया है।
- हत्या का मास्टर प्लान: पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि दो कुख्यात अपराधी मिलकर ग्राम नवादा के निवासी हीरालाल यादव की हत्या करने की पूरी प्लानिंग कर चुके हैं।
- गिरफ्तारी और हथियार: छापेमारी के दौरान पुलिस ने मणि कुमार उर्फ सिटु यादव और सोनू कुमार को रंगे हाथों पकड़ा है। इनके पास से एक देशी पिस्तौल, दो देशी मास्केट और भारी संख्या में कारतूस बरामद हुए हैं।
- कुख्यात इतिहास: गिरफ्तार अपराधियों में शामिल मणि कुमार का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पहले भी संगीन मामलों में जेल की हवा खा चुका है।
- पुलिस टीम का नेतृत्व: यह पूरा ऑपरेशन परिक्ष्यमान सहायक पुलिस अधीक्षक सह थानाध्यक्ष सायम रज़ा के नेतृत्व में चलाया गया, जिसमें सुलतानगंज पुलिस की पूरी टीम ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
- VOB इनसाइट: भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में आपसी रंजिश और वर्चस्व की जंग एक बार फिर सिर उठा रही है। पुलिस की इस प्रो-एक्टिव कार्रवाई ने न केवल एक व्यक्ति की जान बचाई, बल्कि इलाके में संभावित गैंगवॉर को भी टाल दिया है। नवादा बहियार जैसे निर्जन स्थानों का उपयोग अपराधी अपनी सुरक्षित शरणस्थली के रूप में कर रहे हैं।
सुलतानगंज (भागलपुर) | 28 मार्च, 2026
बिहार के भागलपुर जिले के सुलतानगंज थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस की सतर्कता और अपराधियों के दुस्साहस, दोनों को उजागर कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, 27 मार्च की शाम सुलतानगंज पुलिस ने एक ऐसी वारदात को होने से रोक लिया जो पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक या जातीय तनाव का कारण बन सकती थी। नवादा गांव के एक व्यक्ति हीरालाल यादव की हत्या की साजिश रच रहे दो अपराधियों को पुलिस ने हथियारों के जखीरे के साथ दबोच लिया है।
नवादा बहियार में बिछाया गया ‘डेथ ट्रैप’: कैसे हुआ खुलासा?
वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर के कड़े निर्देश पर जिले में अवैध शराब, हथियारों की तस्करी और लूट की वारदातों को रोकने के लिए ‘स्पेशल गश्त’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को पुलिस को एक पुख्ता इनपुट मिला। सूचना यह थी कि नवादा बहियार के सुनसान इलाके में कुछ अपराधी छिपे हुए हैं और वे नवादा गांव के हीरालाल यादव पर जानलेवा हमला करने की अंतिम तैयारी कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (विधि-व्यवस्था) की निगरानी में एक हाई-प्रोफाइल टीम का गठन किया गया। इस टीम की कमान खुद परिक्ष्यमान सहायक पुलिस अधीक्षक सह थानाध्यक्ष सायम रज़ा संभाल रहे थे। पुलिस ने नवादा बहियार की चारों तरफ से घेराबंदी की। जैसे ही अपराधियों को पुलिस की आहट मिली, उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया।
अपराधियों का प्रोफाइल और बरामद ‘जहर’ का ब्यौरा
गिरफ्तार किए गए दोनों अपराधी सुलतानगंज और आसपास के क्षेत्रों में अपनी धमक बनाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने इनकी पहचान इस प्रकार की है:
- मणि कुमार उर्फ सिटु यादव: पिता- सुधीर प्रसाद यादव, निवासी- नवादा, थाना- सुलतानगंज। मणि कुमार का इतिहास पहले से ही दागदार रहा है। सुलतानगंज थाना कांड संख्या 325/25 में भी इसकी संलिप्तता रही है, जिससे साफ है कि वह एक अभ्यस्त अपराधी है।
- सोनू कुमार: पिता- पप्पू यादव, निवासी- तिलकपुर, थाना- सुलतानगंज। सोनू कुमार इस गिरोह का सक्रिय सदस्य है और हथियारों के रख-रखाव और मूवमेंट में मुख्य भूमिका निभाता रहा है।
तलाशी के दौरान बरामद सामग्री की सूची:
- देशी कट्टा (पिस्तौल): 01
- देशी मास्केट: 02 (यह काफी शक्तिशाली हथियार माना जाता है)
- जिंदा कारतूस: 09 (विभिन्न कैलिबर के)
- खोखा: 02 (इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने हाल ही में फायरिंग प्रैक्टिस की थी)
- बैडोरियल: 01 (कारतूस रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला पट्टा)
पुलिस टीम की मुस्तैदी: इन जांबाज अफसरों ने निभाई भूमिका
इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय उन अधिकारियों को जाता है जिन्होंने सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए फील्ड में मोर्चा संभाला। छापेमारी दल में शामिल मुख्य सदस्य:
- सायम रज़ा, परिक्ष्यमान सहायक पुलिस अधीक्षक सह थानाध्यक्ष।
- मृत्युंजय कुमार, पुलिस निरीक्षक, सुलतानगंज।
- कृष्णानंदन कुमार सिंह, पुलिस निरीक्षक।
- विष्णुदेव कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक।
- पवन कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक।
- राजेश कुमार यादव, पुलिस अवर निरीक्षक।
- प्रमोद कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक।
- इसके अलावा सुलतानगंज थाने के कई सशस्त्र बल के जवान इस कार्रवाई का हिस्सा रहे।
VOB का नजरिया: क्या भागलपुर में फिर लौट रहा है रंजिश का दौर?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि हीरालाल यादव की हत्या की यह साजिश किसी गहरी दुश्मनी का हिस्सा हो सकती है।
- इंटेलिजेंस की जीत: यह पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है कि उन्होंने वारदात होने के बाद नहीं, बल्कि वारदात होने से पहले ही आरोपियों को पकड़ लिया। ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ (Preventive Policing) का यह एक बेहतरीन उदाहरण है।
- हथियारों की मंडी: सुलतानगंज और आसपास के दीयरा क्षेत्रों में अवैध हथियारों की पहुंच अब भी एक चुनौती बनी हुई है। देशी मास्केट जैसे हथियारों का मिलना यह बताता है कि स्थानीय स्तर पर हथियारों का निर्माण या तस्करी अब भी सक्रिय है।
- लाइनर और अन्य साथी: पुलिस की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। इस कांड में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किसे हत्या की सुपारी दी गई थी या यह व्यक्तिगत रंजिश थी, इसके लिए पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
अपराधियों के लिए ‘नो टॉलरेंस’
सुलतानगंज पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध की योजना बनाने वालों को भी उतनी ही कड़ी सजा मिलेगी जितनी अपराध करने वालों को। पकड़े गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हीरालाल यादव के परिवार ने पुलिस की इस कार्रवाई पर राहत की सांस ली है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस मामले में होने वाले नए खुलासों, फरार साथियों की गिरफ्तारी और पुलिस की अगली रणनीतिक छापेमारी की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


