मधुसुदनपुर गोलीकांड का ‘हिस्ट्रीशीटर’ कुंदन यादव दबोचा गया; 8 संगीन केसों का था बोझ

समाचार के मुख्य बिंदु: खूनी वारदातों के ‘सीरियल खिलाड़ी’ की सलाखों के पीछे वापसी

  • बड़ी कामयाबी: भागलपुर पुलिस ने मधुसुदनपुर थाना क्षेत्र में जनवरी में हुए चर्चित गोलीकांड के एक और नामजद आरोपी कुंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया है।
  • वारदात का बैकग्राउंड: 18 जनवरी 2026 को अलीगंज ऊपर गंगटी के रहने वाले मुरारी यादव उर्फ उमेश यादव को जमीनी विवाद में सरेआम गोली मारकर जख्मी कर दिया गया था।
  • गिरफ्तारी की लोकेशन: गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बबरगंज थाना क्षेत्र के महेशपुर स्थित ‘मड़वास्थान’ में छापेमारी कर आरोपी को उसके अपने ही घर से पकड़ा।
  • अपराध का ‘बायोडेटा’: पकड़ा गया अपराधी कुंदन यादव कोई नौसिखिया नहीं है; उसके खिलाफ मोजाहिदपुर (बबरगंज) थाने में साल 2017 से 2023 के बीच हत्या के प्रयास और दंगा जैसे 8 गंभीर मामले दर्ज हैं।
  • पुलिसिया रणनीति: नगर पुलिस अधीक्षक और एसडीपीओ नगर-02 के नेतृत्व में मधुसुदनपुर और बबरगंज थाने की संयुक्त टीम ने इस ‘ऑपरेशन’ को अंजाम दिया।
  • VOB इनसाइट: भागलपुर के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में ‘जमीनी रंजिश’ अब छोटे-मोटे विवादों से बढ़कर ‘गैंगवॉर’ का रूप ले रही है। कुंदन यादव जैसे ‘हिस्ट्रीशीटरों’ का बार-बार जेल से बाहर आकर अपराध करना न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस निगरानी पर बड़े सवाल खड़े करता है। इस गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का अब भी बाहर होना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

भागलपुर | 28 मार्च, 2026

​बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में जमीन के एक टुकड़े के लिए बहने वाला खून थमने का नाम नहीं ले रहा है। मधुसुदनपुर थाना क्षेत्र के चर्चित गोलीकांड में भागलपुर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए अपराधी कुंदन यादव को दबोच लिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरफ्तारी पुलिस की उस निरंतर रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत ‘पुराने और खतरनाक’ अपराधियों को दोबारा जेल की हवा खिलाई जा रही है। 27 मार्च की शाम हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराध की उम्र चाहे जितनी लंबी हो, कानून के हाथ अंततः गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं।

18 जनवरी की वह खूनी दोपहर: क्या था पूरा मामला?

​घटना की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को हुई थी, जब कड़ाके की ठंड के बीच भागलपुर का बाईपास इलाका गोलियों की गूंज से दहल उठा था। अलीगंज ऊपर गंगटी के रहने वाले अनिल यादव के पुत्र मुरारी यादव उर्फ उमेश यादव को कुछ अपराधियों ने घेर लिया था। विवाद की जड़ एक ‘जमीनी विवाद’ थी, जो लंबे समय से सुलग रही थी।

​अपराधियों ने बिना किसी खौफ के मुरारी यादव पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इस संबंध में मधुसुदनपुर थाना में कांड संख्या 13/2026 दर्ज की गई थी, जिसमें कुल 6 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पहले ही 3 मुख्य आरोपियों को जेल भेज दिया था, लेकिन कुंदन यादव जैसे शातिर अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर थे।

8 केसों का ‘सफेदपोश’ दहशतगर्द: कुंदन यादव का क्रिमिनल प्रोफाइल

​गिरफ्तार आरोपी कुंदन यादव का इतिहास किसी मंझे हुए अपराधी जैसा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह बबरगंज और मोजाहिदपुर इलाकों में अपनी दहशत के लिए जाना जाता था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) ने जब उसके आपराधिक इतिहास को खंगाला, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  1. साल 2017: मोजाहिदपुर थाना कांड संख्या 322/17 से अपराध की दुनिया में कदम रखा।
  2. साल 2018: यह कुंदन के लिए सबसे ‘सक्रिय’ साल रहा, जहाँ उसने जनवरी (03/18), अप्रैल (79/18), जून (112/18, 117/18, 186/21) में एक के बाद एक कई वारदातों को अंजाम दिया।
  3. साल 2021 और 2023: जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से मोजाहिदपुर थाना कांड संख्या 185/21 और 33/23 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

​इतने सारे मामलों में संलिप्त होने के बावजूद कुंदन यादव का समाज में खुला घूमना और फिर से एक गोलीकांड में नामजद होना यह दर्शाता है कि कानून का डर ऐसे अपराधियों के मन से खत्म हो चुका है।

मड़वास्थान की घेराबंदी: कैसे बिछाया गया जाल?

​वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर के निर्देश पर अवैध हथियारों और वांछित अपराधियों के खिलाफ एक विशेष टीम (SIT) काम कर रही थी। 27 मार्च को पुलिस को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला कि कुंदन यादव अपने घर महेशपुर (मड़वास्थान) में छिपा हुआ है और वहां से कहीं और भागने की फिराक में है।

​सूचना मिलते ही मधुसुदनपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार मंडल और बबरगंज पुलिस की एक संयुक्त टीम तैयार की गई। पुलिस ने मड़वास्थान इलाके को तीन तरफ से घेर लिया। कुंदन यादव को भागने का मौका नहीं मिला और पुलिस ने उसे उसके घर के भीतर से ही विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस छापेमारी दल में संजय कुमार मंडल के साथ पु०अ०नि० सागर, विशाल कुमार, प्रताप कुमार राम और सशस्त्र बल के जवान शामिल थे।

VOB का नजरिया: भागलपुर में ‘जमीन’ और ‘जहर’ का गठबंधन

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि मुरारी यादव गोलीकांड केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, बल्कि यह भागलपुर के बढ़ते ‘लैंड सिंडिकेट’ की उपज है।

  • जमीनी विवाद की विभीषिका: भागलपुर के बाईपास और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। यही कारण है कि कुंदन यादव जैसे अपराधी ‘लाइनर’ और ‘शूटर’ के तौर पर इन विवादों में दखल देते हैं।
  • हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी: कुंदन यादव पर 8 केस होना यह साबित करता है कि वह एक ‘हैबिचुअल ऑफेंडर’ (अभ्यस्त अपराधी) है। ऐसे अपराधियों की बेल कैंसिल कराने और उन्हें स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाने की जरूरत है।
  • पुलिस की समन्वयकारी भूमिका: मधुसुदनपुर और बबरगंज पुलिस के बीच का यह तालमेल सराहनीय है। अक्सर सीमा विवाद के कारण अपराधी बच निकलते हैं, लेकिन यहाँ पुलिस ने पेशेवर रुख अपनाते हुए सफलता हासिल की।

सुशासन और न्याय की उम्मीद

​कुंदन यादव की गिरफ्तारी से पुलिस ने मधुसुदनपुर गोलीकांड के 6 में से 4 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवार का मानना है कि जब तक इस घटना के पीछे के ‘असली मास्टरमाइंड’ पकड़े नहीं जाते, तब तक न्याय अधूरा है। पुलिस अब कुंदन से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान उसे किसने शरण दी थी और क्या उसके पास कोई अवैध हथियार भी छिपा है।

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