
पटना/नई दिल्ली: बिहार के लिए गौरव की खबर है। बिहार भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष को केंद्र सरकार ने केंद्रीय सलाहकार परिषद (Central Advisory Council) का सदस्य नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए की गई है और इसके साथ ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े अहम नीतिगत मामलों में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
केंद्र सरकार को देंगे अहम सुझाव
केंद्रीय सलाहकार परिषद आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक महत्वपूर्ण निकाय है, जो रेरा अधिनियम के क्रियान्वयन, नीतिगत सुधार और घर खरीदारों के हितों की रक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को सलाह देता है।
इस परिषद में सदस्य के रूप में अब देशभर के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े अनुभवों और सुधारों को साझा करेंगे और नीतिगत दिशा तय करने में योगदान देंगे।
पहली बार मिला बिहार को यह प्रतिनिधित्व
वर्ष 2017 में रेरा बिहार के गठन के बाद यह पहला मौका है जब राज्य के अध्यक्ष को केंद्रीय सलाहकार परिषद में शामिल किया गया है। इसे बिहार के रियल एस्टेट नियामक तंत्र की कार्यशैली और उपलब्धियों की बड़ी मान्यता माना जा रहा है।
रेरा बिहार के कार्यों की देशभर में सराहना
पिछले कुछ वर्षों में रेरा बिहार ने कई नवाचार किए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
- CPGRAMS (केंद्रीय लोक शिकायत प्रणाली) से प्राप्त आवेदनों को शिकायत में परिवर्तित करने में आवेदकों की मदद
- सैटेलाइट इमेजरी के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स की पहचान
- प्रोजेक्ट्स और प्रमोटरों की रैंकिंग प्रणाली लागू करना
इन पहलों को देखते हुए अन्य राज्यों के रेरा प्राधिकरण भी बिहार के मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
परिषद की भूमिका क्या है?
रेरा अधिनियम की धारा 41 के तहत गठित यह परिषद देशभर में रियल एस्टेट सेक्टर को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए काम करती है।
इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
- रेरा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सुझाव देना
- घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- रियल एस्टेट सेक्टर के विकास के लिए नीतिगत मार्गदर्शन देना
- राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना
जिम्मेदारी के साथ बढ़ा दायित्व
इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए काम करना होगा।
बिहार के लिए क्यों है अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति से बिहार को नीति निर्माण के स्तर पर सीधा प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को और अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निवेश के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।


