
पटना, 6 अप्रैल: बिहार सरकार ने भूमि एवं राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर एक महत्वपूर्ण नीति बदलाव किया है। अब राज्य में विशेष श्रेणी के आवेदकों—जैसे अनुसूचित जाति/जनजाति, विधवा महिलाएं, सेना के जवान (सेवारत एवं सेवानिवृत्त), सुरक्षाकर्मी और केंद्र सरकार के कर्मचारी—के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों, प्रमंडलीय आयुक्तों और अन्य संबंधित अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
FIFO व्यवस्था अस्थायी रूप से स्थगित
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने स्पष्ट किया है कि मामलों के निस्तारण में लागू FIFO (First In First Out) सिद्धांत को 30 जून 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसका उद्देश्य है कि जरूरतमंद और संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता मिल सके।
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर इन निर्देशों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
आवेदकों को मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत अब कई विशेष श्रेणी के आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जा सकती है। ऐसे मामलों में उनके प्रतिनिधि या अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई की अनुमति होगी।
इस फैसले का उद्देश्य राजस्व प्रशासन को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है।
‘ईज ऑफ लिविंग’ लक्ष्य के तहत पहल
राज्य सरकार ने “ईज ऑफ लिविंग” को ध्यान में रखते हुए 16 दिसंबर 2025 से कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री की “समृद्धि यात्रा” और उपमुख्यमंत्री के “जन कल्याण संवाद” के दौरान आम लोगों से मिले फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
सोमवारीय सभा और शुक्रवारीय दरबार में बड़ी संख्या में लोग भूमि संबंधी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि त्वरित समाधान की आवश्यकता है।
जमीनी स्तर पर दिखी लापरवाही, फिर जारी हुआ निर्देश
हाल ही में सारण (छपरा) और मुंगेर में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान यह पाया गया कि कुछ मामलों में निर्धारित प्राथमिकता का पालन नहीं किया जा रहा था। इसके बाद विभाग ने सख्ती दिखाते हुए दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
किन्हें मिलेगा प्राथमिकता का लाभ?
सरकार ने जिन श्रेणियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, उनमें शामिल हैं:
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आवेदक
- विधवा महिलाएं
- सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान
- सुरक्षाकर्मी
- अन्य राज्यों में कार्यरत केंद्र सरकार के कर्मचारी
संवेदनशील प्रशासन पर जोर
प्रधान सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन आवेदकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए और उन्हें हर संभव सहयोग दिया जाए। इससे न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, बल्कि आम लोगों को राहत भी मिलेगी।
राज्य सरकार का यह कदम जमीन से जुड़े मामलों में तेजी लाने और आम नागरिकों को राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्राथमिकता आधारित निस्तारण से खासकर कमजोर और सेवा-समर्पित वर्गों को बड़ा लाभ मिलेगा, साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेगी।


