बिहार के तीन स्वचालित वाहन फिटनेस केंद्रों पर बड़ा एक्शन: बिना वाहन पहुंचे जारी होते थे फिटनेस सर्टिफिकेट, अब हाई-लेवल जांच शुरू

पटना। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 1 सितंबर 2025 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर के पांच स्वचालित वाहन फिटनेस जांच केंद्रों को बंद कर दिया था। इनमें तीन केंद्र बिहार के हैं।

इन केंद्रों पर आरोप था कि वाहन सेंटर तक आए बिना ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे थे। यह गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बताया गया था।
अब इन केंद्रों के खिलाफ हेराफेरी और फर्जीवाड़े की जांच तेज कर दी गई है।

बिहार के तीन सेंटर 1 सितंबर से बंद, अब जांच की बड़ी तैयारी

मंत्रालय ने जिन तीन केंद्रों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया था, वे हैं—

  • M/s B.K. Construction & Co. (भागलपुर)
  • Aviranjan Kumar Raja (दरभंगा)
  • Golden Vahan Fitness Centre (पटना)

इन केंद्रों पर आरोप है कि—

  • वाहन पेश नहीं किए जाते थे,
  • सिर्फ फोटो देखकर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता था,
  • और फिटनेस प्रमाण पत्रों में हेराफेरी की जाती थी।

सड़क परिवहन मंत्रालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने 10 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर जांच कमेटी गठित की।

जांच कमेटी बनी, लेकिन सबसे अहम—ऑडिट एजेंसी को शामिल नहीं किया गया

परिवहन विभाग ने जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है, जिसमें—

  • प्रवीण कुमार, अपर सचिव (अध्यक्ष)
  • सहायक परिवहन आयुक्त दिव्य प्रकाश
  • आईटी मैनेजर
  • प्रोग्रामर
  • और बंद किए गए फिटनेस सेंटर्स के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि स्टैंडर्ड ऑडिट एजेंसी, जिसे ऐसे केंद्रों की तकनीकी जांच करनी थी, उसे कमेटी में शामिल नहीं किया गया।
इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या जांच पूरी पारदर्शिता से हो पाएगी?

28 नवंबर को पटना के Golden Vahan Fitness Centre की होगी पहली जांच

बंद पड़े केंद्रों की जांच अब शुरू की जा रही है।
सबसे पहले पटना का Golden Vahan Fitness Centre जांच के दायरे में आएगा।
परिवहन विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ने 21 नवंबर को पटना और गया के जिला परिवहन अधिकारियों व मोटरयान निरीक्षकों को पत्र भेजकर जांच के दिन उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

आरोप क्या हैं?

  • वाहन सेंटर तक पहुंचे बिना फिटनेस जारी किया गया
  • डिजिटल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों में हेराफेरी
  • सीसीटीवी फुटेज में कथित गड़बड़ी
  • मशीनरी और उपकरण मानक के अनुरूप नहीं

यह सारा मामला सुरक्षा और सड़क हादसों से जुड़े मानकों पर गंभीर सवाल उठाता है।

जांच कैसे होगी? CCTV फुटेज से खिला जाएगा फर्जीवाड़े का राज

जांच कमेटी के सामने सबसे अहम काम होगा इन बिंदुओं पर सत्यापन—

  • जिस तारीख को वाहन का फिटनेस जारी हुआ, क्या वह वाहन वास्तव में सेंटर पर आया था?
  • क्या सीसीटीवी फुटेज में उसका प्रवेश दिखाई देता है?
  • क्या फिटनेस टेस्ट की मशीनें मानक अनुरूप और चालू अवस्था में थीं?
  • क्या सभी तकनीकी परीक्षण वास्तविक रूप से किए गए थे?

यदि जांच में किसी भी वाहन की उपस्थिति दर्ज नहीं मिलती है, तो यह साबित होगा कि फिटनेस बिना टेस्ट के जारी हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि CCTV फुटेज ही पूरे घोटाले की पोल खोलेगा

उड़ीसा सरकार ने 2024 में ही पकड़ा था फर्जीवाड़ा

इस घोटाले की जड़ें 2024 से ही उजागर होने लगी थीं।
उड़ीसा सरकार के परिवहन कमिश्नर ने MoRTH को पत्र लिखकर बताया था कि—

  • कई बिहार स्थित फिटनेस सेंटर
  • गाड़ियों के सिर्फ फोटो देखकर फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं
  • गाड़ियां ओडिशा में हैं, लेकिन फिटनेस सर्टिफिकेट बिहार से बन रहा है

यह मामला सामने आने के बाद ही केंद्र सरकार सक्रिय हुई और कार्रवाई शुरू हुई।

बड़ा सवाल: क्या बिहार के स्वचालित फिटनेस सेंटर सुरक्षित हैं?

वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र सीधे सड़क सुरक्षा से जुड़ा होता है।
यदि वाहन बिना जांच के फिटनेस प्राप्त कर लें, तो—

  • सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है
  • रूट पर खराब और अनुपयुक्त वाहन चलते रहते हैं
  • सरकार की साख पर सवाल उठते हैं

अब सबकी नजर जांच पर है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता होगी या वास्तविक फर्जीवाड़ा सामने आएगा।

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