पटना में बड़ी कार्रवाई: फर्जी जमाबंदी और लगान रसीद घोटाले में राजस्व कर्मचारी मधेश राम बर्खास्त, DM ने दिखाई सख्ती

पटना: बिहार की राजधानी पटना में राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने पुनपुन अंचल में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी मधेश राम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उन पर फर्जी लगान रसीद के आधार पर जमाबंदी कायम कराने, नियमों का उल्लंघन करने और सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप साबित हुए हैं।

फर्जी रसीद बनाकर कराया गया जमाबंदी का खेल

जांच में सामने आया कि मधेश राम ने मसौढ़ी अंचल में अपनी तैनाती के दौरान फर्जी तरीके से लगान रसीदें काटीं और उन्हीं के आधार पर भू-धारियों को लाभ पहुंचाने के लिए एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) जारी करने की अनुशंसा की।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन लोगों के नाम पर वर्ष 2019-20 में लगान रसीदें जारी की गईं, उनकी संबंधित जमाबंदी वर्ष 2021-22 में दाखिल-खारिज वादों के माध्यम से बाद में कायम हुई। यानी पहले रसीद जारी की गई और बाद में जमीन का रिकॉर्ड तैयार किया गया, जो नियमों के पूरी तरह विपरीत है।

जांच में सभी आरोप हुए साबित

मामले की शिकायत मिलने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) मसौढ़ी ने आरोप पत्र तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा था। इसके बाद जिलाधिकारी ने विधिवत विभागीय कार्रवाई शुरू कराई।

जांच प्रक्रिया के लिए अपर समाहर्ता (ADM) को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी मसौढ़ी को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया। जांच के दौरान मधेश राम को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उनका जवाब असंतोषजनक, बनावटी और तथ्यों से परे पाया गया।

DM ने कहा- लोकहित के खिलाफ था आचरण

जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने अपने आदेश में कहा कि राजस्व कर्मचारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गलत मंशा से नियमों के विरुद्ध कार्य किया।

उन्होंने कहा कि फर्जी जमाबंदी, फर्जी लगान रसीद और उसके आधार पर भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र की अनुशंसा न केवल राजस्व नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे सरकारी कार्यालय की छवि भी धूमिल हुई है।

तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाया गया

सभी आरोप प्रमाणित होने के बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत मधेश राम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी कार्यों में लापरवाही, भ्रष्टाचार, अनियमितता और नियमों की अवहेलना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

SDO बोले- लगातार मिल रही थीं शिकायतें

मसौढ़ी के अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि मधेश राम के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए।

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी को कार्रवाई की अनुशंसा भेजी गई थी, जिसके बाद यह कठोर निर्णय लिया गया।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि पुनपुन अंचल में फर्जी जमाबंदी और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 24 सितंबर 2024 को तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने भी इसी तरह की अनियमितताओं के आरोप में पुनपुन अंचल के दो लिपिकों को बर्खास्त कर दिया था।

लगातार हो रही कार्रवाई से राजस्व विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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