भागलपुर–बांका में बड़ी कार्रवाई – थानाध्यक्ष सहित चार पुलिसकर्मी निलंबित, कई मामलों में लापरवाही और धांधली उजागर

आईजी विवेक कुमार की सख्त समीक्षा के बाद कार्रवाई तेज

भागलपुर/बांका।बिहार पुलिस में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस मुख्यालय से मिली शिकायतों और आईजी विवेक कुमार की विस्तृत समीक्षा के बाद भागलपुर जिले के विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष और बांका जिले के तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जांच में सिद्ध हुआ कि कई मामलों में जानबूझकर कार्रवाई टाली गई, धाराएं कमजोर की गईं और अनुसंधान महीनों से ठप पड़ा था।


भागलपुर: विश्वविद्यालय थाना प्रभारी सस्पेंड—मालखाना से लेकर लंबित केस तक गंभीर गड़बड़ी
भागलपुर विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष बलबीर विलक्षण पर आरोप थे कि—

  • थाना मालखाना का ठीक से प्रभार नहीं रखा गया
  • महत्वपूर्ण मामलों का अनुसंधान महीनों से लंबित
  • कई केसों की प्रगति रिपोर्ट फर्जी या अधूरी

आईजी की जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।


बांका में तीन पुलिसकर्मी निलंबित—धारा कमजोर कर केस को ‘सेफ पासेज’ देने का आरोप

बांका जिले में निलंबित पुलिसकर्मी—

  1. निरीक्षक देवानंद पासवान
  2. थानाध्यक्ष राकेश कुमार
  3. अवर निरीक्षक ब्रजेश कुमार

इन तीनों पर आरोप है कि कांड संख्या 536/2025 में—

  • वादी के बयान के अनुरूप IPC धारा 109 लगाई जानी चाहिए थी
  • लेकिन जानबूझकर धारा कम कर दी गई ताकि अभियुक्त को लाभ मिले
  • कई अन्य मामलों में भी सत्यापन, गिरफ्तारी, बरामदगी और चार्जशीट लंबित पाई गई

तीनों को तत्काल पुलिसलाइन भेज दिया गया है, मुख्यालय बांका निर्धारित किया गया है।


आईजी की समीक्षा में खुलीं कई परतें: दर्जनों केस वर्षों से लंबित

जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य—

  • कांड 293/22 – तत्कालीन थानाध्यक्ष ने केस का प्रभार ही नहीं दिया
  • कांड 135/23 – अपहृता की बरामदगी अब तक लंबित
  • 143/19 – दो अभियुक्तों का यूपी–ओडिशा से सत्यापन लंबित
  • 170/18 – तीन अभियुक्तों पर अभिक्युतीकरण (Prosecution Sanction) लंबित
  • 384/22 – एक और अपहृता बरामद नहीं
  • 10/23 – अज्ञात अभियुक्त की पहचान में शून्य प्रगति

कुल मिलाकर, थाने में दर्जनों केस फ़ाइलों की धूल साफ करने की भी ज़रूरत महसूस हुई।


आईजी विवेक कुमार का कड़ा संदेश—“लापरवाही बर्दाश्त नहीं, पीड़ित को न्याय पहला लक्ष्य”
आईजी ने कहा—

  • अनुसंधान में ढिलाई पुलिस की छवि को खराब करती है
  • पीड़ित न्याय से वंचित होता है
  • दोषी पुलिसकर्मी बख्शे नहीं जाएंगे

उनके बयान के बाद पुलिस विभाग में स्पष्ट संकेत है कि आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।


एसपी बांका को तीन दिनों का अल्टीमेटम

  • SDPO से रिव्यू कर तुरंत रिपोर्ट दें
  • धाराएं क्यों कम की गईं—इस पर जवाबदेही तय होगी
  • आरोप साबित होने पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित

लोगों की प्रतिक्रिया—“अब मामलों का निस्तारण तेज होगा”
लंबित मामलों से परेशान लोग कहते हैं कि यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है। कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब थानों में केस समय पर निपटेंगे और जांच में पारदर्शिता आएगी।

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