
बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। गिरधारी यादव के खिलाफ जनता दल (यूनाइटेड) ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने उन पर “पार्टी विरोधी गतिविधियों” में शामिल होने का आरोप लगाया है।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरधारी यादव ने कहा कि उन्हें अभी इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “जब स्पीकर मुझसे सवाल करेंगे, तब मैं जवाब दूंगा। मेरे पास किसी भी पार्टी विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें दिलेश्वर कामत के बयान की जानकारी नहीं है।
एसआईआर का किया था विरोध
गिरधारी यादव पहले भी पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते रहे हैं। पिछले साल बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उन्होंने विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची सही थी, तो कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो सकती है।
बेटे का राजद से चुनाव लड़ना बना मुद्दा
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनके परिवार का रुख पार्टी के खिलाफ माना गया। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि वे जदयू उम्मीदवार मनोज यादव से हार गए। इसी घटना के बाद से गिरधारी यादव पर कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई थीं।
लंबा राजनीतिक अनुभव
गिरधारी यादव बिहार की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वे चार बार लोकसभा सांसद और चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 1997, 2004, 2019 और 2024 में बांका से जीत हासिल की है। विधानसभा में भी वे कटोरिया और बेलहर सीटों से विधायक रहे हैं।
पहले भी रहे विवादों में
2023 में, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में भी गिरधारी यादव ने लोकसभा की नैतिकता समिति की जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया था और यह भी स्वीकार किया था कि वे खुद प्रश्न तैयार नहीं करते, बल्कि उनका स्टाफ यह काम करता है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि जदयू अब अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपना रही है, और आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।


