जमुई रेल हादसे के बाद बड़ी कार्रवाई, आसनसोल DRM विनीता श्रीवास्तव हटाईं गईं

जमुई। बिहार के जमुई जिले में जसीडीह–झाझा रेलखंड पर हुए बड़े रेल हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। आसनसोल रेल मंडल की डीआरएम विनीता श्रीवास्तव को उनके पद से हटा दिया गया है। वह महज पांच महीने पहले, अगस्त 2025 में इस पद पर नियुक्त हुई थीं। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई हादसे की जवाबदेही तय करने के तहत की गई है।

नए डीआरएम को सौंपा गया अतिरिक्त प्रभार

विनीता श्रीवास्तव की जगह सुधीर कुमार शर्मा को आसनसोल रेल मंडल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। पदभार संभालते ही नए डीआरएम ने दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया और बहाली कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

नदी में गिरे थे मालगाड़ी के डिब्बे

इस हादसे के कारण अप और डाउन दोनों लाइनों पर रेल परिचालन पूरी तरह ठप हो गया था। हावड़ा–दिल्ली मुख्य मार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। दर्जनों यात्री ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे संपत्ति को भी बड़ा नुकसान हुआ। राहत और बहाली कार्य युद्धस्तर पर चलाए गए, जिसके बाद कुछ दिनों में परिचालन बहाल किया जा सका।

कब और कैसे हुआ हादसा

यह दुर्घटना 27 दिसंबर 2025 की देर रात हुई थी। जसीडीह–झाझा रेलखंड पर टेलवा बाजार हॉल्ट के पास बरुआ नदी पर बने पुल संख्या 676 पर सीमेंट से लदी मालगाड़ी पटरी से उतर गई। इस हादसे में मालगाड़ी की लगभग 19 बोगियां बेपटरी हो गईं, जिनमें से कई पुल से नीचे नदी में जा गिरीं।

उच्चस्तरीय जांच के आदेश

रेलवे ने हादसे के कारणों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती तौर पर किसी तकनीकी खराबी या मानवीय चूक की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पहले परिचालन बहाल करना प्राथमिकता थी, अब दुर्घटना के हर पहलू की विस्तृत जांच की जाएगी।

कई ट्रेनें रहीं प्रभावित

किउल–जसीडीह–झाझा रेलखंड हावड़ा–दिल्ली मुख्य लाइन का अहम हिस्सा है, जो बिहार और झारखंड को जोड़ता है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां गुजरती हैं। इस मार्ग के बाधित होने से पूरे रेलवे नेटवर्क पर व्यापक असर पड़ा।

सुरक्षा पर सख्ती का संकेत

हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यात्रियों को भारी असुविधा हुई और रेलवे को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। रेल मंत्रालय की ओर से डीआरएम को हटाने की कार्रवाई को सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


 

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