
मधुबनी। मिथिला की पावन धरा, जो युगों-युगों से ज्ञान, दर्शन और मातृत्व की शक्ति का केंद्र रही है, शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को एक बार फिर अपनी आराध्या माता जानकी के स्वागत में पलक-पावड़े बिछाए नजर आई। अवसर था ‘माँ जानकी नवमी महोत्सव 2026’ का, जिसे माँ जानकी मिथिला पुरुष यादव समिति और जानकी सेना के तत्वावधान में मधुबनी नगर में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ आयोजित किया गया। सुबह की किरणों के साथ शुरू हुआ उत्साह देर रात तक भक्ति और उत्सव के संगम में डूबा रहा। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि खेलकूद और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के माध्यम से मिथिला की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी प्रदान किया। दिनभर आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रमों में भारी जनसैलाब उमड़ा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि माता जानकी के प्रति मिथिलावासियों का अनुराग आज भी उतना ही गहरा है, जितना प्राचीन काल में था।
खेल के मैदान से सांस्कृतिक मंच तक: सुबह का ऊर्जावान सत्र
महोत्सव का आगाज प्रातः 10 बजे शारीरिक और बौद्धिक ऊर्जा के प्रदर्शन के साथ हुआ। नगर के ऐतिहासिक वाटसन स्कूल के मैदान और खेल भवन में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं का उद्घाटन बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा और खेल पदाधिकारी नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं में जिलेभर से आए खिलाड़ियों ने अपनी खेल भावना का परिचय दिया। मैदान पर खिलाड़ियों के पसीने और दर्शकों की तालियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया।
उसी समय, मधुबनी नगर निगम के विवाह भवन में सुरों और लय का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ आयोजित नृत्य और संगीत प्रतियोगिताओं में बच्चों और युवाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। लोकगीतों की गूँज और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने जजों को भी प्रभावित किया। प्रतियोगिता के अंत में सफल प्रतिभागियों का चयन कर उन्हें संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति, विधान पार्षद और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया।
आध्यात्मिक संध्या: वैदिक मंत्रोच्चारण और दीपों की आभा
जैसे-जैसे सूरज ढला, मधुबनी की फिजाओं में भक्ति का रंग और गहरा होता गया। संध्या 4:30 बजे नगर निगम के विवाह भवन में माँ जानकी नवमी का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा और विधान पार्षद घनश्याम ठाकुर द्वारा संयुक्त रूप से माँ जानकी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ किया गया।
इस आध्यात्मिक सत्र की गरिमा आचार्य धर्मेंद्र द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चारण और स्वस्ति पाठ ने बढ़ा दी। मंत्रों की गूँज ने पूरे परिसर को एक दिव्य ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात सांस्कृतिक संध्या का आरंभ हुआ, जिसका नेतृत्व प्रवीण मिश्रा ने किया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजनों और सांस्कृतिक गीतों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। माँ जानकी के जीवन और उनके आदर्शों पर आधारित गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
वक्ताओं के विचार: जानकी नवमी को रामनवमी जैसा स्वरूप देने की अपील
सत्र को संबोधित करते हुए मृत्युंजय कुमार झा ने जानकी सेना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जानकी सेना वर्ष 2010 से निरंतर माता जानकी के गौरव को पुनर्जीवित करने के कार्य में जुटी है। उन्होंने रेखांकित किया कि रथ यात्रा, डोली यात्रा और विभिन्न महोत्सवों के माध्यम से माता जानकी के संघर्ष और उनके पावन आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। मृत्युंजय कुमार झा ने समाज से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम रामनवमी को पूरे धूमधाम से मनाते हैं, उसी प्रकार जानकी नवमी को भी मिथिला के हर घर में एक महोत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे इस पावन अवसर पर अपने घरों में कम से कम 11 दीप जलाकर माता जानकी का अभिनन्दन करें।
वहीं, संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने अपनी संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत और संस्कृति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इनका संरक्षण हम सभी का साझा कर्तव्य है। उन्होंने गौरव के साथ कहा कि मिथिला वह पुण्य भूमि है जहाँ स्वयं माँ जानकी का अवतरण हुआ, अतः ऐसी भूमि पर इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और नैतिक मूल्यों के पुनर्निर्माण में मील का पत्थर साबित होते हैं।
सामूहिक संकल्प और संगठन की एकजुटता
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एक साथ मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने और माता जानकी के आदर्शों पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया। यह पल अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था, जहाँ सैकड़ों हाथ एक साथ समाज की भलाई के लिए उठे थे।
महोत्सव की सफलता में जानकी सेना के पदाधिकारियों की टीम ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रणधीर कुमार यादव द्वारा किया गया, जबकि जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र झा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस आयोजन को सफल बनाने में जानकी सेना के प्रदेश अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह, कार्यक्रम प्रमुख प्रमोद सिंह, प्रो. रामसेवक झा, विनिता ठाकुर, सोनी झा, प्रतिभा रंजन, दीपा झा और श्रवण कुमार महतो ने दिन-रात मेहनत की।
उपस्थिति और जनभागीदारी
इस भव्य महोत्सव के साक्षी बनने के लिए कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मदन मिश्रा, पुष्पक कुमार, पंकज कुमार झा, चंदेस्वरी देवी, शंकर पासवान और अरुण कांत झा सहित नगर के अनेक बुद्धजीवी और श्रद्धालु शामिल थे। मधुबनी के आम नागरिकों की भारी उपस्थिति यह दर्शाती है कि यह महोत्सव अब केवल एक संस्था का कार्यक्रम न रहकर एक ‘जन-उत्सव’ का रूप ले चुका है।


