
मुजफ्फरपुर: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती एक मरीज के परिजनों पर वार्ड के बाहर शराब पीने का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देसी शराब बरामद की और मरीज के पिता व भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
वार्ड के बाहर छलक रहे थे जाम, मरीजों ने खोली पोल
जानकारी के अनुसार वैशाली जिले के बेलसर थाना क्षेत्र निवासी बबलू शर्मा हड्डी रोग वार्ड संख्या-2 में भर्ती हैं। वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि बबलू शर्मा के पिता और भाई कई दिनों से चोरी-छिपे अस्पताल परिसर में शराब लेकर आ रहे थे और वार्ड के आसपास बैठकर उसका सेवन कर रहे थे।
आरोप है कि शराब को छिपाने के लिए उसे पानी और सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलों में भरकर अस्पताल के अंदर लाया जाता था। इससे वार्ड में भर्ती मरीजों, महिलाओं और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मारा छापा
मामले की सूचना मिलने के बाद SKMCH ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्धों के सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक झोले में रखी कोल्ड ड्रिंक की बोतल से देसी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने मरीज के पिता चंदेश्वर ठाकुर और उसके भाई को हिरासत में ले लिया।
एक मरीज के परिजन ने बताया कि आरोपी अस्पताल परिसर में बैठकर शराब पीते थे और नशे की हालत में हंगामा भी करते थे, जिससे अन्य मरीज परेशान रहते थे।
अस्पताल प्रशासन सख्त, जांच के आदेश
SKMCH अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल इलाज का स्थान है और यहां किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस कर रही जांच, शराब अस्पताल तक कैसे पहुंची?
SKMCH ओपी प्रभारी पिंटू कुमार ने बताया कि बरामद देसी शराब को जब्त कर लिया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि शराबबंदी वाले राज्य में अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर तक शराब कैसे पहुंची और इसमें किसी बाहरी व्यक्ति या अस्पताल कर्मी की भूमिका तो नहीं है।
बड़ा सवाल: अस्पताल में शराब पार्टी, जिम्मेदार कौन?
इस घटना ने बिहार में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अस्पताल जैसे सुरक्षित और संवेदनशील परिसर में शराब पहुंची कैसे और इतने दिनों तक किसी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?


