
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।भागलपुर की भौगोलिक पहचान और उत्तर-दक्षिण बिहार के बीच संपर्क का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र ‘विक्रमशिला सेतु’ अब एक नई प्रशासनिक व्यवस्था का गवाह बनने जा रहा है। दशकों से जाम की समस्या से जूझ रहे इस पुल पर आवाजाही करने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। जिला यातायात पुलिस ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए अब सेतु पर 24 घंटे एक शक्तिशाली हाइड्रोलिक क्रेन की स्थाई तैनाती सुनिश्चित कर दी है। यह फैसला केवल एक मशीन की तैनाती नहीं है, बल्कि भागलपुर की उस लाइफलाइन को सुचारू बनाने की एक गंभीर कोशिश है, जहां एक छोटी सी यांत्रिक खराबी पूरे शहर और आसपास के जिलों की रफ्तार पर ब्रेक लगा देती थी।
ट्रैफिक डीएसपी का औचक निरीक्षण और मौके पर लिया गया बड़ा फैसला
मंगलवार का दिन विक्रमशिला सेतु की यातायात व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हुआ। यातायात पुलिस उपाधीक्षक (DSP) संजय कुमार ने सेतु के जीरो माइल से लेकर जाह्नवी चौक तक के पहुंच पथ और पुल के बीच स्थित ‘यातायात टीओपी’ (Traffic Out Post) का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि पुल पर जाम लगने की सबसे बड़ी और बुनियादी वजह वाहनों का अचानक खराब हो जाना है। पुल की चौड़ाई कम होने के कारण जब भी कोई भारी वाहन या ट्रक बीच रास्ते में दम तोड़ता है, तो उसके पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
निरीक्षण के दौरान डीएसपी संजय कुमार ने टीओपी में तैनात पुलिसकर्मियों से फीडबैक लिया और सुरक्षा मानकों का जायजा लिया। इसी दौरान उन्होंने यह महसूस किया कि अब तक की व्यवस्था में ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (Response Time) एक बड़ी बाधा थी। इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने निर्देश जारी किया कि अब क्रेन किसी बाहरी कॉल का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि वह पुल के शुरुआती पॉइंट यानी टीओपी के पास ही हर समय मुस्तैद रहेगी।
पुराना तंत्र बनाम नई व्यवस्था: आखिर क्यों जरूरी थी स्थाई तैनाती?
अब तक की व्यवस्था यह थी कि जब भी विक्रमशिला सेतु पर कोई ट्रक या बस खराब होती थी, तो सूचना मिलने के बाद भागलपुर शहर या अन्य निजी क्रेन संचालकों से संपर्क किया जाता था। शहर के भारी जाम और भीड़भाड़ को पार कर क्रेन को पुल तक पहुंचने में अक्सर घंटों लग जाते थे। इस बीच, पुल पर दोनों तरफ से वाहनों का दबाव इतना बढ़ जाता था कि क्रेन को खराब वाहन तक पहुंचना भी एक चुनौती बन जाता था।
नई व्यवस्था के तहत अब एक ‘शक्तिशाली हाइड्रोलिक क्रेन’ 24 घंटे टीओपी के पास मौजूद रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि जैसे ही किसी वाहन के खराब होने की सूचना कंट्रोल रूम या ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी को मिलेगी, क्रेन महज 5 से 10 मिनट के भीतर उस स्थान पर पहुंच जाएगी। शक्तिशाली हाइड्रोलिक सिस्टम होने के कारण यह क्रेन भारी से भारी लोडेड ट्रकों को भी पलक झपकते ही खींचकर पुल से बाहर सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सक्षम होगी। इससे जाम लगने की स्थिति पैदा होने से पहले ही संकट को टाल दिया जाएगा।
विक्रमशिला सेतु: उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का संकरा लेकिन महत्वपूर्ण गलियारा
विक्रमशिला सेतु केवल भागलपुर के लिए ही नहीं, बल्कि सीमांचल, कोसी और अंग जनपद के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज से आने वाले तमाम भारी वाहन इसी सेतु के जरिए भागलपुर और झारखंड की ओर जाते हैं। पुल की बनावट और इसकी सीमित चौड़ाई हमेशा से चिंता का विषय रही है। सेतु पर वाहनों का भारी दबाव होने के कारण अक्सर इंजन ओवरहीट हो जाते हैं या एक्सेल टूटने की समस्या आती है।
डीएसपी संजय कुमार का मानना है कि सेतु पर यातायात को सुचारू रखना केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से भी जुड़ा है। अक्सर एम्बुलेंस और बीमार मरीज इस पुल के जाम में फंसे रहते हैं। क्रेन की स्थाई तैनाती से सबसे ज्यादा लाभ उन आपातकालीन सेवाओं को होगा जो समय की कमी के कारण संकट में पड़ जाती हैं।
टीओपी की मजबूती और पुलिसकर्मियों को विशेष निर्देश
निरीक्षण के दौरान डीएसपी ने विक्रमशिला यातायात टीओपी की कार्यप्रणाली में भी कई सुधारों के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीओपी पर तैनात जवानों को केवल वाहन पास कराने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि उन्हें पुल की हर गतिविधि पर नजर रखनी होगी। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग और वायरलेस संदेशों के आदान-प्रदान में तेजी लाने को कहा गया है।
संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि क्रेन के साथ एक विशेष तकनीकी टीम भी तैनात रहेगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि मशीन हमेशा ‘वर्किंग कंडीशन’ में रहे। शिफ्ट के आधार पर क्रेन ऑपरेटरों की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि रात के समय भी यदि कोई हादसा या खराबी हो, तो तुरंत कार्रवाई की जा सके। यह कदम भागलपुर पुलिस की ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
रिस्पॉन्स टाइम में कमी: जाम के नासूर का स्थाई इलाज?
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यस्त मार्ग पर जाम को रोकने का एकमात्र तरीका ‘त्वरित कार्रवाई’ है। जब एक वाहन खराब होता है, तो वह पहले 15 मिनट में केवल 100 मीटर का जाम लगाता है, लेकिन एक घंटे बाद वही जाम 5 किलोमीटर तक फैल जाता है। क्रेन की स्थाई मौजूदगी से भागलपुर पुलिस उस ‘गोल्डन पीरियड’ (शुरुआती 15 मिनट) में ही समस्या का समाधान कर देगी।
पहुंच पथ (Approach Road) पर होने वाली अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर भी डीएसपी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने निर्देश दिया कि क्रेन का उपयोग केवल पुल पर खराब वाहनों को हटाने के लिए ही नहीं, बल्कि उन वाहनों के खिलाफ भी किया जाए जो नियमों का उल्लंघन कर पहुंच पथ पर खड़े रहते हैं और यातायात को बाधित करते हैं।
आम जनता की प्रतिक्रिया: एक पुरानी मांग हुई पूरी
भागलपुर के स्थानीय निवासियों और रोज सफर करने वाले यात्रियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। बरारी और जीरो माइल के निवासियों का कहना है कि पुल पर जाम लगने के कारण पूरा शहर त्रस्त हो जाता था। स्थानीय ट्रक चालकों ने भी इस कदम की सराहना की है, क्योंकि वाहन खराब होने पर उन्हें घंटों तक क्रेन का इंतजार करना पड़ता था और मोटी रकम भी चुकानी पड़ती थी। अब सरकारी क्रेन की मौजूदगी से उन्हें उचित और त्वरित सहायता मिल सकेगी।
निष्कर्ष: सुगम यातायात की ओर एक ठोस कदम
विक्रमशिला सेतु पर 24 घंटे क्रेन की तैनाती भागलपुर जिला प्रशासन और यातायात पुलिस की एक दूरदर्शी पहल है। संजय कुमार के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय आने वाले दिनों में पुल पर लगने वाले भीषण जाम की समस्या को काफी हद तक कम कर देगा। हालांकि, केवल क्रेन की तैनाती ही पर्याप्त नहीं है, पुल की जर्जर स्थिति और दूसरे समानांतर पुल के निर्माण में तेजी लाना भी उतना ही आवश्यक है। फिलहाल, भागलपुर वासियों के लिए यह खबर एक सुकून भरी ठंडी हवा के झोंके जैसी है, जो यह भरोसा दिलाती है कि अब सेतु पर उनकी जिंदगी घंटों तक कैद नहीं रहेगी।


