
पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने रेल सुरक्षा और अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जमालपुर–किऊल रेलखंड के अभैपुर–कजरा ब्लॉक सेक्शन में लेवल क्रॉसिंग गेट संख्या 26 और 27 के स्थान पर लिमिटेड हाइट सबवे (LHS) के लिए आरसीसी बॉक्स एवं स्लैब सेगमेंट का सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह कार्य 26 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ और इसे रेल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना का संचालन मंडल रेल प्रबंधक, मालदा, श्री मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में तथा वरिष्ठ मंडल अभियंता (समन्वय), मालदा, श्री निलेश कुमार गौरव के पर्यवेक्षण में किया गया। परियोजना के तहत प्रत्येक लेवल क्रॉसिंग पर कुल 10 आरसीसी बॉक्स सेगमेंट और 5 बेस स्लैब स्थापित किए गए, जिससे न केवल लेवल क्रॉसिंग को समाप्त करने में मदद मिलेगी, बल्कि रेल और सड़क दोनों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
रेलवे द्वारा लेवल क्रॉसिंग को खत्म करने की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देशभर में कई दुर्घटनाएं इन्हीं क्रॉसिंग पर होती रही हैं। ऐसे में एलएचएस (Limited Height Subway) का निर्माण रेल और सड़क यातायात को अलग-अलग मार्ग प्रदान करता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। इस परियोजना के पूरा होने से स्थानीय लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें ट्रेनों के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और आवागमन सुगम हो जाएगा।
इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। शैडो ब्लॉक के दौरान इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T) और ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (TRD) विभागों ने मिलकर कई महत्वपूर्ण अनुरक्षण और अवसंरचना सुदृढ़ीकरण कार्य भी किए। इन कार्यों में ट्रैक की मजबूती, सिग्नल सिस्टम का उन्नयन और विद्युत आपूर्ति से संबंधित सुधार शामिल थे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की परियोजनाओं के लिए सटीक योजना, समयबद्ध निष्पादन और टीमवर्क बेहद जरूरी होता है। मालदा मंडल ने इन सभी पहलुओं पर खरा उतरते हुए इस जटिल कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह न केवल तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के समर्पण और प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
एलएचएस निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिससे कार्य को सुरक्षित और तेज गति से पूरा किया जा सका। आरसीसी बॉक्स और स्लैब सेगमेंट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे लंबे समय तक टिकाऊ रहें और भारी यातायात का भार भी आसानी से सहन कर सकें। इसके अलावा, निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। आसपास के ग्रामीणों और यात्रियों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे अपने लिए एक बड़ी सुविधा बताया है। पहले जहां लेवल क्रॉसिंग पर लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब एलएचएस के माध्यम से बिना किसी बाधा के आवागमन संभव हो सकेगा।
रेलवे की यह पहल ‘सुरक्षित और निर्बाध यात्रा’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। मालदा मंडल लगातार ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे रेल नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाया जा सके। इस परियोजना के सफल निष्पादन से यह भी स्पष्ट होता है कि रेलवे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने ढांचे को लगातार उन्नत कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को भी समान महत्व देना आवश्यक है। एलएचएस जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आती है, बल्कि यात्रियों और आम जनता का भरोसा भी रेलवे पर मजबूत होता है।
मालदा मंडल द्वारा किए गए इस कार्य से यह संदेश जाता है कि रेलवे केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार संस्था है जो यात्रियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। आने वाले समय में भी ऐसे कई प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रेलवे अपने नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित, सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।
अंततः, जमालपुर–किऊल खंड में एलएचएस बॉक्स का यह सफल लॉन्च पूर्व रेलवे की तकनीकी क्षमता, कुशल प्रबंधन और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह उपलब्धि न केवल मालदा मंडल के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे के लिए एक प्रेरणादायक कदम भी है, जो भविष्य में और बेहतर तथा सुरक्षित रेल सेवाओं की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।


