पटना।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 इस बार कई मायनों में अलग होने जा रहा है। एक तरफ एनडीए और महागठबंधन के घटक दलों में सीट बंटवारे की रस्साकशी जारी है, तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव का परिवार पहली बार किसी चुनाव में खंडित रूप में उतर रहा है।
लालू के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल नाम से अपनी नई पार्टी बना ली है और अब वह प्रदेश के कई इलाकों में रैलियां कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तेज प्रताप का फोकस इस बार मुजफ्फरपुर पर ज्यादा है — जहां वह पिछले एक महीने में छह से अधिक बार दौरा कर चुके हैं।
‘गरीबनाथ बाबा’ से आशीर्वाद, और फिर सियासी संदेश
तेज प्रताप हर दौरे की शुरुआत बाबा गरीबनाथ मंदिर से दर्शन के साथ करते हैं। उनके भाषणों में न सिर्फ केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना होती है, बल्कि राजद पर भी परोक्ष हमले झलकते हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि तेज प्रताप का यह अभियान राजद के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश है।
राजद के भीतर उनके इन दौरों को लेकर औपचारिक बयान भले न आए हों, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व की नजर हर गतिविधि पर है।
‘विचारधारा के स्तर पर अलग राह’
तेज प्रताप अपने अंदाज में माता-पिता का सम्मान तो करते हैं, लेकिन यह भी कहते हैं कि “हमारी विचारधारा अलग है, हम गांधी जी के रास्ते पर चलेंगे।”
हाल ही में मीनापुर में बापू की प्रतिमा को भगवा रंग देने की घटना के बाद उन्होंने कहा था —
“बापू की विचारधारा को कोई रंग नहीं दे सकता। हम उनके सिद्धांतों पर चलेंगे।”
बोचहां में उन्होंने राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल पर निशाना साधते हुए कहा, “उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है।”
गायघाट में तेज प्रताप ने यह संकेत भी दे दिया कि उनकी पार्टी कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
‘जनशक्ति जनता दल’ — नई सियासी शक्ति या पारिवारिक बगावत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप का यह कदम सिर्फ “भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक” है।
उनका लक्ष्य युवा और स्वजातीय वोटरों को साधना है।
अगर जनशक्ति जनता दल कुछ सीटों पर प्रभाव दिखाती है, तो इसका सीधा असर राजद और महागठबंधन की गणित पर पड़ेगा।
मुजफ्फरपुर बना सियासत का केंद्र
तेज प्रताप के लगातार दौरे से साफ है कि मुजफ्फरपुर की सीटें इस बार हॉटस्पॉट बनेंगी।
गायघाट, मीनापुर, और बोचहां — तीनों इलाकों में जनशक्ति जनता दल की गतिविधियां बढ़ी हैं।
स्थानीय स्तर पर उनके समर्थक अब “तेज प्रताप जिंदाबाद” और “जनशक्ति जनता दल अमर रहे” के नारे लगा रहे हैं।
तेज प्रताप की यह राजनीतिक यात्रा केवल “पारिवारिक बगावत” नहीं बल्कि स्वतंत्र पहचान गढ़ने की कवायद है।
वहीं, राजद के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है क्योंकि पहली बार लालू परिवार का वोट शेयर दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है।
