IIIT भागलपुर में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन पर छह दिवसीय FDP का शुभारंभ, विशेषज्ञों ने इंडस्ट्री 4.0 पर दिया जोर

भागलपुर। तकनीकी शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) भागलपुर में सोमवार को छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ किया गया। मेकाट्रॉनिक्स एवं ऑटोमेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन की आधारभूत अवधारणाएँ एवं आधुनिक प्रवृत्तियाँ” रखा गया है। यह कार्यक्रम मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), आईआईटी पटना के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान प्रवृत्तियों और उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं से जोड़ना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिससे शैक्षणिक और तकनीकी आदान-प्रदान के इस महत्वपूर्ण आयोजन की औपचारिक शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. टी. एन. सिंह उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता IIIT भागलपुर के निदेशक प्रो. मधुसूदन सिंह ने की।

इसके अलावा विशिष्ट अतिथियों के रूप में आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. एस. के. द्विवेदी, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के डीन (कृषि) डॉ. अजय कुमार साह तथा एमएमटीटीसी, आईआईटी पटना के कार्यक्रम निदेशक डॉ. संजय कुमार परिडा मौजूद रहे। इन विशेषज्ञों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय ज्ञान-विनिमय का मंच है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मेकाट्रॉनिक्स एवं ऑटोमेशन इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष और एफडीपी समन्वयक डॉ. अभिनव गौतम ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बुद्धिमान प्रणालियों की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं के लिए नई तकनीकों से लगातार जुड़ना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

डॉ. अभिनव गौतम ने कहा कि रोबोटिक्स और ऑटोमेशन केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज इनका उपयोग स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा, परिवहन, स्मार्ट सिटी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह एफडीपी प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकी प्रवृत्तियों, आधुनिक अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों की गहरी समझ विकसित करने का अवसर देगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. टी. एन. सिंह ने इंडस्ट्री 4.0 के वर्तमान परिदृश्य में कौशल विकास की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित करेंगे। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रह सकती।

उन्होंने कहा कि संस्थानों को ऐसे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने होंगे जो छात्रों और शिक्षकों को उद्योग की वास्तविक मांगों के अनुरूप तैयार करें। प्रो. सिंह ने संस्थानों के बीच सहयोग को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार अकादमिक साझेदारी से ज्ञान का आदान-प्रदान तेज होता है और अनुसंधान को नई दिशा मिलती है।

IIIT भागलपुर के निदेशक प्रो. मधुसूदन सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा में अंतःविषयक दृष्टिकोण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों का समन्वय आज नई तकनीकों का आधार बन चुका है।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि सक्रिय संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से ज्ञान को व्यवहारिक रूप दें। उनके अनुसार शोध आधारित शिक्षा ही भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में सबसे बड़ा आधार बन सकती है।

एमएमटीटीसी, आईआईटी पटना के कार्यक्रम निदेशक डॉ. संजय कुमार परिडा ने अपने संबोधन में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की गतिविधियों और उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नई तकनीकों और अनुसंधान आधारित ज्ञान से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विकास कार्यक्रमों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि एक प्रशिक्षित शिक्षक ही भविष्य के सक्षम इंजीनियर और वैज्ञानिक तैयार कर सकता है। उनके अनुसार तकनीकी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार एक-दूसरे के पूरक हैं।

डॉ. अवनीत कुमार ने एफडीपी की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छह दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ विभिन्न अत्याधुनिक विषयों पर व्याख्यान देंगे।

कार्यक्रम में औद्योगिक रोबोटिक्स, ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियाँ, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंटेलिजेंट कंट्रोल सिस्टम जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये सभी विषय आधुनिक उद्योगों और तकनीकी विकास की धुरी माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्री 4.0 के दौर में स्मार्ट फैक्ट्री, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन आधारित उत्पादन प्रणाली तेजी से उद्योगों का हिस्सा बन रही हैं। इससे रोजगार के स्वरूप में भी बदलाव आ रहा है। भविष्य में ऐसे पेशेवरों की मांग बढ़ेगी जो बहु-विषयक तकनीकी कौशल रखते हों।

इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे वे नए अनुसंधान अवसरों और तकनीकी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

कार्यक्रम के समापन सत्र में मेकाट्रॉनिक्स एवं ऑटोमेशन इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तामेश्वर नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कुल मिलाकर IIIT भागलपुर में आयोजित यह छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित यह पहल न केवल शिक्षकों और शोधार्थियों के ज्ञान को समृद्ध करेगी, बल्कि बिहार को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में भी सहायक बन सकती है।

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