चोरी के शक में खूनी हमला, बांका में चाकू-फरसा से मारपीट, तीन लोग घायल

भागलपुर। बिहार के बांका जिले से एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां चोरी के शक में एक परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया गया। यह घटना चक्काडीह गांव की है, जहां आपसी विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और चाकू तथा फरसा जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इस घटना में एक ही परिवार के तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज फिलहाल भागलपुर के मायागंज अस्पताल में चल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी और पेशे से ट्रक चालक मणिकांत यादव के घर में कुछ दिन पहले चोरी की घटना हुई थी। इस घटना के बाद मणिकांत यादव ने गांव के ही कमल किशोर यादव के परिवार पर चोरी का आरोप लगाया। हालांकि इस आरोप की पुष्टि पुलिस जांच में नहीं हुई थी, लेकिन आरोप के आधार पर दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ता चला गया।

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन कमल किशोर यादव का पुत्र संजीव यादव, उसका भाई धर्मवीर यादव और उनकी मां सोनी देवी एक शादी समारोह से लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे मणिकांत यादव अपने चार-पांच साथियों के साथ वहां पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने सीधे संजीव यादव को निशाना बनाया और उस पर चाकू तथा फरसा से ताबड़तोड़ वार किए। अचानक हुए इस हमले से संजीव गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही गिर पड़ा। अपने बेटे को बचाने के लिए जब धर्मवीर यादव और सोनी देवी आगे आए, तो हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया। इस दौरान दोनों को भी गंभीर चोटें आईं।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। स्थानीय लोगों ने किसी तरह घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई।

घायलों के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचने में देरी की और पहले घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद सभी घायलों को आनन-फानन में बांका सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया।

मायागंज अस्पताल में फिलहाल तीनों घायलों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी की हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है। संजीव यादव को सबसे ज्यादा चोटें आई हैं, जबकि धर्मवीर यादव और सोनी देवी को भी गहरी चोटें लगी हैं।

इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आपसी विवाद का परिणाम प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद को सुलझा लिया जाता, तो इस तरह की हिंसक घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गांव में शांति बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि कैसे छोटी-छोटी बातों पर लोग कानून को हाथ में लेकर हिंसा का रास्ता अपना लेते हैं। चोरी के संदेह मात्र के आधार पर किसी पर हमला करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करता है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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