
पटना/किशनगंज। बिहार के सीमावर्ती जिले किशनगंज के लिए गुरुवार, 07 मई 2026 का दिन एक बड़ी सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार और देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक क्रांतिकारी निर्णय की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक संदेश के अनुसार, किशनगंज जिले के पोठिया अंचल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (RTC) की स्थापना के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बिहार सरकार ने 110 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। सीमांचल जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में देश के एक प्रतिष्ठित सुरक्षा बल का प्रशिक्षण केंद्र खुलना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर आर्थिक समृद्धि और रोजगार के हजारों नए अवसरों के द्वार भी खोलेगा। मुख्यमंत्री ने इस बड़े निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए इसे ‘विकसित बिहार’ की दिशा में एक और सशक्त कदम बताया है।
पोठिया में ‘शक्ति केंद्र’: 1000 जवानों के लिए तैयार होगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
किशनगंज का पोठिया अंचल, जो भौगोलिक दृष्टि से बंगाल और अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप है, अब सीआईएसएफ के जांबाजों के प्रशिक्षण का गवाह बनेगा। मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस प्रशिक्षण केंद्र की क्षमता एक हजार (1000) जवानों की होगी।
यहाँ स्थापित होने वाले आरटीसी (RTC) में सीआईएसएफ के नए रंगरूटों और अनुभवी जवानों को आधुनिक युद्ध कौशल, औद्योगिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अत्याधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 110 एकड़ का विशाल परिसर न केवल बैरकों और प्रशासनिक भवनों से सुसज्जित होगा, बल्कि इसमें अत्याधुनिक फायरिंग रेंज, खेल के मैदान और तकनीकी सिमुलेशन सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। यह केंद्र देश की औद्योगिक इकाइयों और हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए तैयार होने वाली सैन्य शक्ति का मुख्य आधार बनेगा।
सीमांचल में रोजगार और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
किशनगंज और आसपास के जिलों (पूर्णिया, अररिया, कटिहार) के लिए यह केंद्र एक ‘इकॉनमिक इंजन’ (Economic Engine) की तरह काम करेगा।
- स्थानीय रोजगार: प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण और भविष्य के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर हजारों अकुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी। साथ ही, परिसर के भीतर और बाहर सहायक सेवाओं (लॉजिस्टिक्स, कैंटीन, मेंटेनेंस) के जरिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- बाजार का विस्तार: 1000 जवानों और प्रशिक्षण स्टाफ की उपस्थिति से स्थानीय बाजारों में मांग बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ होगा।
- बुनियादी विकास: इतने बड़े सुरक्षा संस्थान की स्थापना के कारण पोठिया अंचल में सड़कों, बिजली की आपूर्ति और संचार व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुधारा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना नहीं है, बल्कि बिहार के उन क्षेत्रों में विकास की रोशनी पहुँचाना है जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी: भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल शुरू
घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और किशनगंज जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे चिन्हित 110 एकड़ भूमि का भौतिक सत्यापन कर कानूनी औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।
सरकार का लक्ष्य है कि इस परियोजना का शिलान्यास और निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो ताकि सीआईएसएफ को समय पर जमीन हस्तांतरित की जा सके। यह निर्णय बिहार कैबिनेट द्वारा हाल ही में लिए गए उन फैसलों की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए बड़े निवेश और केंद्रीय सहयोग को आमंत्रित किया गया है।
सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में बिहार की बढ़ती भागीदारी
किशनगंज में सीआईएसएफ के इस केंद्र की स्थापना से बिहार अब देश के सुरक्षा मानचित्र पर एक प्रमुख ट्रेनिंग हब के रूप में उभरेगा। वर्तमान में बिहार में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और औद्योगिक सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन अपना क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र होने से राज्य के युवाओं में भी अर्धसैनिक बलों के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में विश्वास जताया है कि यह केंद्र न केवल राज्य की सुरक्षा अवसंरचना को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि सीमांचल के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को भी बदल कर रख देगा। 9 मई को होने वाली आगामी विभागीय बैठक में इस भूमि अधिग्रहण की प्रगति की समीक्षा भी की जा सकती है।


