
भागलपुर। भागलपुर नगर निगम में स्थायी और सेवानिवृत्त सफाई कर्मियों का आंदोलन अब और गंभीर होता जा रहा है। नगर सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले चल रही भूख हड़ताल गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही। अपनी लंबित मांगों को लेकर धरने पर बैठे सफाई कर्मियों ने नगर निगम प्रशासन पर लगातार उपेक्षा और अनदेखी का आरोप लगाया है। आंदोलन के दौरान दो कर्मचारियों की तबीयत खराब हो जाने से स्थिति और संवेदनशील हो गई। धरना स्थल पर ही दोनों कर्मियों को प्राथमिक उपचार देते हुए सलाईन चढ़ाया गया।
सफाई कर्मियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक नगर निगम प्रशासन या जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी वार्ता के लिए आगे नहीं आया है। कर्मचारियों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
धरने पर बैठे कर्मचारियों की मुख्य मांग स्थायी और सेवानिवृत्त सफाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ देने तथा लंबित भुगतान को जल्द जारी करने की है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। कई रिटायर्ड कर्मचारियों को अब तक उनका बकाया भुगतान नहीं मिला है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार नगर निगम प्रशासन को ज्ञापन देने और वार्ता की कोशिश के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों ने कहा कि वे मजबूरी में भूख हड़ताल करने को विवश हुए हैं क्योंकि लंबे समय से उनकी समस्याएं केवल फाइलों तक सीमित रह गई हैं।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि जब भी वे लोग वेतन, बकाया राशि या अन्य भुगतान की मांग करते हैं तो उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बिना “लेन-देन” के फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती, जिससे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है।
हालांकि नगर निगम प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद सफाई कर्मियों ने कहा कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने में सफाई कर्मियों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सुबह से देर रात तक शहर को साफ रखने वाले कर्मचारी आज खुद अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि शहर की स्वच्छता बनाए रखने वाले कर्मियों की हालत बेहद खराब है, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
भूख हड़ताल के चौथे दिन दो कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। साथी कर्मचारियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की और मौके पर सलाईन चढ़ाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार भूखे रहने और गर्मी के कारण कई अन्य कर्मियों की तबीयत भी खराब होने लगी है।
धरना पर बैठे कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारी संगठन ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर शहर स्तर पर बड़ा प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार भी किया जा सकता है।
नगर सफाई कर्मचारी संघ से जुड़े नेताओं का कहना है कि सातवें वेतनमान का लाभ अन्य विभागों के कर्मचारियों को मिल चुका है, लेकिन सफाई कर्मियों को अब तक इससे वंचित रखा गया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि कई कर्मचारी रिटायर होने के बाद आर्थिक संकट में जीने को मजबूर हैं क्योंकि समय पर उनका भुगतान नहीं हो रहा।
भागलपुर नगर निगम में चल रही इस भूख हड़ताल का असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। कई इलाकों में नियमित सफाई कार्य प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि नगर निगम प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों के आंदोलन के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई कर्मियों की समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए क्योंकि उनका काम सीधे शहर की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। कई नागरिकों ने भी कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम जैसे संस्थानों में सफाई कर्मियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि यही कर्मचारी लंबे समय तक आंदोलन पर रहते हैं तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द समाधान निकालना चाहिए।
धरना स्थल पर मौजूद सफाई कर्मियों ने कहा कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। कर्मचारियों ने दोहराया कि उनका संघर्ष केवल वेतन या भुगतान के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों के लिए भी है।
फिलहाल भागलपुर नगर निगम परिसर के आसपास आंदोलन का माहौल बना हुआ है और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन कब इस मामले में हस्तक्षेप करता है और क्या कर्मचारियों की मांगों पर कोई सकारात्मक पहल होती है या नहीं।


