
कानपुर में एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 5 डॉक्टर शामिल हैं। जाँच के दौरान हर रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं।
गंभीर हालत में 30 वर्षीय महिला
इस मामले में एक 30 वर्षीय महिला पारुल तोमर अपनी जान के लिए जूझ रही हैं। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले आईसीयू में भर्ती कराया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया। पारुल बिजनौर की रहने वाली हैं और उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब 80 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन इन्फेक्शन के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई।
किडनी देने वाले की पहचान
पुलिस जांच में सामने आया कि बिहार के समस्तीपुर के MBA छात्र आयुष ने पारुल को अपनी किडनी दी थी। फिलहाल आयुष उत्तराखंड में रह रहे हैं। जालौन निवासी ड्राइवर शिवम अग्रवाल ने इस पूरे रैकेट में मुख्य भूमिका निभाई। मरीज को लाने और छात्रों को फंसाने का काम भी वही करता था।
आज मेडिकल कॉलेज के मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल से दो एंबुलेंस के जरिए डॉक्टरों की टीम पारुल को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गई। वहीं, कानपुर में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है और छापेमारी की जा रही है।
कैसे हुआ मामला फुसफुसा?
मामला तब सामने आया जब एक 50,000 रुपये के विवाद ने करोड़ों रुपये के अवैध किडनी व्यापार का पर्दाफाश किया। रैकेट में गिरफ्तार छह लोगों में पांच डॉक्टर थे। शुरुआती जांच में पता चला कि कम से कम 40 लोगों की अवैध सर्जरी की गई थी, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे।
आरोप है कि किडनी 10 लाख रुपये में खरीदी जाती थी और 60 लाख रुपये में बेची जाती थी, लेकिन मामला तब फुसफुसा जब आयुष को तय रकम से 50,000 रुपये कम मिले। गुस्से में उसने पुलिस को सूचित किया।
जांच में मिले अहम सुराग
जांच में पता चला कि शिवम अग्रवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Telegram का इस्तेमाल कर आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को फंसाता था। आयुष भी उसके जाल में फंस गए। आरोप है कि आरोपी ने पारुल तोमर के परिवार से 60 लाख रुपये ऐंठ लिए थे।
पुलिस अब हर उस व्यक्ति की पहचान कर रही है जो इस रैकेट में शामिल था।


