
नई दिल्ली: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने भारतीय वायुसेना के लिए खुशखबरी दी है। साल 2021 से नई पीढ़ी के तेजस का इंतजार कर रही वायुसेना को अब अप्रैल में इसे मिलना शुरू होगा। तेजस मार्क-1A की डिलीवरी अप्रैल के तीसरे हफ्ते में होने की उम्मीद है।
बैठक में होगा ऐलान
सूत्रों के अनुसार, एचएएल और वायुसेना के प्रमुखों के बीच एक अहम बैठक जल्द होने वाली है, जिसमें नए तेजस की डिलीवरी का ऐलान किया जाएगा। डिलीवरी से पहले एचएएल को नई तकनीक और मारक क्षमता से जुड़ी जानकारी वायुसेना के साथ साझा करनी होगी। इसके बाद ही वायुसेना के एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट के अनुसार कड़े परीक्षण होंगे।
तेजस की जांच की प्रक्रिया
- एचएएल की फैक्ट्री में वायुसेना की तकनीकी टीम सबसे पहले क्वालिटी चेक करेगी।
- फाइटर पायलट इसकी क्षमता का परीक्षण करेंगे।
- सभी निरीक्षण के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी।
- अगर कोई कमी मिलेगी, तो एचएएल को सुधार के लिए वापस भेजा जाएगा।
- परीक्षण के बाद ही तेजस वायुसेना के बेड़े में शामिल होगा।
साल 2024 के एयरो इंडिया में एयर चीफ ने एचएएल को डिलीवरी में देरी पर फटकार लगाई थी। उस समय मुख्य वजह इंजन की समय पर सप्लाई न होना थी। तेजस मार्क-1A के लिए जनरल इलेक्ट्रिक के साथ 2021 में इंजन की डील हुई थी। अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं, जिससे डिलीवरी में तेजी आने की उम्मीद है।
तेजस क्यों है जरूरी?
भविष्य के युद्ध की दृष्टि से इंडियन एयरफोर्स को 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन फिलहाल उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं। तेजस इस कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
- वायुसेना ने पहले ही 38 तेजस (मार्क-1) शामिल कर लिए हैं।
- एचएएल को 83 तेजस मार्क-1A बनाने का ऑर्डर मिला है।
- 97 और तेजस मार्क-1A की डील भी हो चुकी है।
- इन विमानों से कुल 9 नए स्क्वाड्रन तैयार होंगे।
इसलिए एचएएल और वायुसेना के बीच अगली बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, ताकि डिलीवरी समय पर हो और वायुसेना के बेड़े को जल्द से जल्द बल मिले।


