कटिहार में नाला निर्माण को लेकर किसानों का बड़ा विरोध, नगर निगम की टीम को घंटों रोका गया

कटिहार नगर निगम द्वारा शहर की जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू किए गए नाला निर्माण कार्य का बेगना तियारपाड़ा इलाके में जोरदार विरोध देखने को मिला। शुक्रवार को नगर निगम की टीम जब जेसीबी मशीन और अधिकारियों के साथ खुदाई कार्य शुरू कराने पहुंची, तो बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और काम रोक दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और करीब दो घंटे तक मौके पर भारी हंगामा चलता रहा।

स्थानीय किसानों का आरोप था कि नगर निगम शहर का गंदा पानी सीधे उनके खेतों की ओर मोड़ना चाहता है, जिससे फसल बर्बाद हो जाएगी और खेती योग्य जमीन को भी नुकसान पहुंचेगा। किसानों ने साफ कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के वे किसी भी हाल में नाला निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।

जानकारी के अनुसार कटिहार नगर निगम लंबे समय से शहर में जलजमाव की समस्या को दूर करने की योजना पर काम कर रहा है। बारिश के मौसम में शहर के कई हिस्सों में जलभराव की गंभीर स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इसी समस्या के समाधान के लिए नगर निगम प्रशासन ने बेगना तियारपाड़ा क्षेत्र से होकर पानी निकासी के लिए नाला निर्माण की योजना तैयार की है।

शुक्रवार को नगर आयुक्त, कार्यपालक अभियंता और अन्य अधिकारी जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से पानी निकासी के लिए खुदाई का काम शुरू कराया गया। लेकिन जैसे ही मशीनों ने खुदाई शुरू की, स्थानीय किसान और ग्रामीण विरोध में सामने आ गए।

ग्रामीणों का कहना था कि शहर का गंदा और दूषित पानी खेतों में छोड़े जाने से उनकी खेती पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। किसानों ने बताया कि इलाके में इस समय मक्का, धान और मखाना की खेती की जा रही है। यदि लगातार गंदा पानी खेतों में जमा हुआ, तो फसलें खराब हो जाएंगी और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होगी।

विरोध कर रहे किसानों का कहना था कि यह केवल एक-दो खेतों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे इलाके की खेती इससे प्रभावित होगी। स्थानीय किसान मो. फकरुद्दीन और मो. रईस ने बताया कि यह उनकी पुश्तैनी जमीन है, जहां वर्षों से खेती की जा रही है। उनके अनुसार करीब 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खेती होती है और इस इलाके में 100 से ज्यादा किसान पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं।

किसानों ने नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों से चर्चा किए सीधे खुदाई शुरू कर दी गई। उनका कहना था कि प्रशासन को पहले गांव वालों और किसानों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पानी निकासी की समस्या है तो उसका समाधान इस तरह नहीं होना चाहिए कि किसानों की रोजी-रोटी ही खतरे में पड़ जाए।

मौके पर मौजूद कई महिलाओं और ग्रामीणों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। लोगों ने जेसीबी मशीन के आगे खड़े होकर खुदाई रोक दी। स्थिति ऐसी हो गई कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी करीब दो घंटे तक मौके पर फंसे रहे। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शुरुआत में कोई समाधान नहीं निकल सका।

किसानों ने मांग की कि नगर निगम पहले ऐसी तकनीकी व्यवस्था करे जिससे खेतों में गंदा पानी जमा न हो। कुछ किसानों ने सुझाव दिया कि इलाके में बड़े पंपसेट लगाकर पानी का स्तर नियंत्रित किया जाए, ताकि जलजमाव की समस्या भी दूर हो और खेती को भी नुकसान न पहुंचे।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि सरकार या नगर निगम उनकी जमीन और फसल को नुकसान पहुंचाता है, तो प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और यदि खेत खराब हुए तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

विरोध बढ़ता देख प्रशासन ने स्थिति संभालने की कोशिश की। नगर निगम अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया कि नाला निर्माण का उद्देश्य केवल शहर को जलजमाव से राहत दिलाना है। अधिकारियों ने कहा कि पानी निकासी की व्यवस्था वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी और किसानों की समस्याओं पर भी विचार किया जाएगा।

करीब दो घंटे तक चले हंगामे और बातचीत के बाद प्रशासन ने फिलहाल बीच का रास्ता निकाला। नगर निगम की टीम ने किसानों के विरोध वाले हिस्से से कुछ दूरी पर खुदाई कर पानी निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कराई। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और विरोध कर रहे लोग शांत हुए।

हालांकि किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में बिना सहमति के खेतों की ओर पानी छोड़ा गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन और फसल बचाने के लिए किसी भी स्तर तक विरोध करेंगे।

इस घटना के बाद कटिहार में नगर निगम की योजनाओं और ग्रामीण इलाकों पर उसके प्रभाव को लेकर बहस शुरू हो गई है। एक तरफ शहर के लोग जलजमाव से राहत चाहते हैं, तो दूसरी तरफ किसान अपनी खेती और जमीन बचाने को लेकर चिंतित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों की जलनिकासी व्यवस्था सुधारना जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसी योजना बनानी चाहिए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों को नुकसान न पहुंचे। जल प्रबंधन और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर वैज्ञानिक और संतुलित समाधान की जरूरत बताई जा रही है।

फिलहाल नगर निगम प्रशासन और किसानों के बीच टकराव भले अस्थायी रूप से शांत हो गया हो, लेकिन यह मामला आने वाले दिनों में फिर गर्मा सकता है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली रणनीति और किसानों की मांगों पर टिकी हुई है।

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