
कटिहार। बिहार के सीमावर्ती जिले कटिहार में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता ने बड़ी हलचल पैदा कर दी है। मनिहारी थाना क्षेत्र के नवाबगंज बालू टोला निवासी एक साधारण से दिखने वाले युवक, मो. सोहेल को केंद्रीय जांच एजेंसी ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के संदेह में दिल्ली से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी किसी हथियार या विस्फोटक की बरामदगी से नहीं, बल्कि ‘डिजिटल साक्ष्यों’ के आधार पर हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि कट्टरपंथ का जाल अब सोशल मीडिया के जरिए सुदूर ग्रामीण इलाकों तक फैल चुका है। रविवार, 19 अप्रैल 2026 की सुबह जब सोहेल की गिरफ्तारी की खबर कटिहार पहुँची, तो मनिहारी से लेकर जिला मुख्यालय तक सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र अलर्ट मोड पर आ गया। सोहेल के मोबाइल से मिले संदेशों और कॉल डिटेल्स ने एक ऐसे खौफनाक ‘नेटवर्क’ का संकेत दिया है, जो किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में था। वॉइस ऑफ बिहार (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए कैसे एक प्लंबर के मोबाइल ने सुरक्षा एजेंसियों को देशविरोधी साजिश के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
मोबाइल फॉरेंसिक: जब ‘क्लाउड’ से निकले कत्ल और कट्टरपंथ के इरादे
मो. सोहेल की गिरफ्तारी के पीछे की सबसे बड़ी कड़ी उसका मोबाइल फोन बना है। पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले केंद्रीय जांच एजेंसी एक गोपनीय इनपुट के साथ कटिहार पहुँची थी। स्थानीय मनिहारी पुलिस के सहयोग से सोहेल को हिरासत में लेकर प्रारंभिक पूछताछ की गई थी। उस समय उसके पास से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई थी, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों की नजर उसके ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ पर थी।
सोहेल के मोबाइल को तत्काल फॉरेंसिक लैब भेजा गया और उसकी वैज्ञानिक जांच कराई गई। इस जांच में जो राज खुले, उन्होंने जांचकर्ताओं के होश उड़ा दिए। फॉरेंसिक टीम को सोहेल के मोबाइल से निम्नलिखित संदिग्ध साक्ष्य मिले:
- सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा: कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री और भड़काऊ संदेशों का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार।
- संदिग्ध नेटवर्क: देश-विदेश के कई ऐसे नंबरों से संपर्क, जो पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे।
- संदेशों का विश्लेषण: विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स पर किसी ‘बड़ी घटना’ को अंजाम देने के संदर्भ में कोड वर्ड में की गई बातचीत। इन्हीं पुख्ता तकनीकी सबूतों के आधार पर एजेंसी ने सोहेल को दिल्ली तलब किया और कड़ी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
पेशे से प्लंबर, फितरत में कट्टरपंथ: सोहेल की दोहरी जिंदगी
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सोहेल की सामाजिक पहचान और उसकी गोपनीय गतिविधियां एक-दूसरे से बिल्कुल उलट थीं। सूत्रों के अनुसार, सोहेल पेशे से एक प्लंबर था। गरीबी और साधारण पृष्ठभूमि की आड़ में वह एक कट्टरपंथी संगठन के सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहा था।
केंद्रीय एजेंसी ने सोहेल के बैंक खातों की भी गहन जांच की है। हालांकि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आता है, लेकिन उसके खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन और उसके द्वारा सोशल मीडिया पर संचालित किए जा रहे ‘सेल’ ने उसकी मंशा पर मुहर लगा दी। एजेंसियों का मानना है कि सोहेल जैसे युवाओं को ‘स्लीपर सेल’ के तौर पर तैयार किया जा रहा था, जिनका काम कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स या सूचनाएं एकत्र करना था। मोबाइल खंगालने पर पता चला कि वह किसी बड़े संगठन के संपर्क में था और युवाओं को भड़काने के लिए ‘डिजिटल ब्रिगेड’ का हिस्सा बना हुआ था।
अंगूरी खातून का दर्द: “आर्थिक तंगी ने छीन ली पढ़ाई, अब बेटा भी गया”
शनिवार को नवाबगंज स्थित सोहेल के घर पर मातम और सन्नाटे का माहौल था। सोहेल की मां अंगूरी खातून बदहवास हालत में अपने घर के दरवाजे पर बैठी मिलीं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि सोहेल ने स्थानीय लहरू स्मारक उच्च विद्यालय से दसवीं तक की पढ़ाई की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वह आगे पढ़ नहीं सका और घर चलाने के लिए मजदूरी और प्लंबर का काम करने लगा।
अंगूरी खातून को इस बात का यकीन नहीं हो रहा है कि उनका बेटा किसी आतंकी गतिविधि में शामिल हो सकता है। गांव के लोग भी इस खबर से स्तब्ध हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि गरीबी और कम शिक्षा अक्सर कट्टरपंथी संगठनों के लिए ‘हॉट टारगेट’ होते हैं, जहाँ युवाओं को गुमराह करना आसान होता है। मां के आंसुओं और सोहेल के ‘गुनाहों’ के बीच अब केवल कानून की लंबी प्रक्रिया बाकी है।
सुरक्षा एजेंसियों का ‘घेरा’: गांव और आगंतुकों पर पैनी नजर
एसपी शिखर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि भले ही सोहेल दिल्ली में गिरफ्तार हुआ है, लेकिन जांच का दायरा कटिहार और मनिहारी तक विस्तृत है। पुलिस ने सोहेल के परिवार और उसके गांव नवाबगंज बालू टोला में आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत उठाए गए कदम:
- निगरानी: सोहेल के करीबी मित्रों और रिश्तेदारों की गतिविधियों पर खुफिया तंत्र की नजर।
- सत्यापन: गांव में आने वाले बाहरी लोगों का अनिवार्य सत्यापन।
- स्थानीय पुलिस का समन्वय: मनिहारी पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम सूचना साझाकरण। एसपी ने बताया कि इस पूरे मामले की कमान केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी संभाल रही है और कटिहार पुलिस हर संभव सहयोग कर रही है। जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है ताकि किसी भी अन्य ‘स्लीपर सेल’ की सक्रियता को समय रहते पकड़ा जा सके।
बड़ी घटना की साजिश: मोबाइल में छिपे थे खौफनाक मंसूबे
सूत्रों का दावा है कि फॉरेंसिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि सोहेल और उसके संपर्क वाले लोग किसी बड़े हमले या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की योजना पर काम कर रहे थे। उनके सोशल मीडिया हैंडल पर मिले कुछ वीडियो और पीडीएफ फाइलों में कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के तरीके और युवाओं को भर्ती करने के ‘गाइडलाइन्स’ मिले हैं।
केंद्रीय एजेंसी अब सोहेल को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसके गिरोह में और कौन-कौन शामिल है और क्या उसे सीमा पार से भी किसी प्रकार के निर्देश या फंडिंग मिल रही थी। कटिहार जैसे सीमावर्ती जिले में ऐसी गिरफ्तारी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गंभीर मानी जा रही है। 19 अप्रैल 2026 की यह दोपहर कटिहार पुलिस के लिए सतर्कता की एक नई इबारत लिख रही है।


