​कटिहार में बिजली का काल: खेत में पानी पटाते समय पति-पत्नी की मौत, चार मासूमों की दुनिया हुई वीरान

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में मातम पसर दिया है और बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनिहारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर पंचायत स्थित चिकनी गांव में शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की सुबह नियति ने एक हँसते-खेलते परिवार को ऐसी बेरहमी से उजाड़ा कि देखने वालों की रूह कांप गई। अपने खेत में सिंचाई (पानी पटाने) के लिए गए एक दंपति की बिजली के नंगे तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल दो जिंदगियां छीन लीं, बल्कि चार मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए हटा दिया। मरने वालों की पहचान रंजन ठाकुर और उनकी पत्नी रंजना देवी के रूप में हुई है। यह हादसा उस समय हुआ जब पति अपनी पत्नी को मौत के मुंह से खींचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और दोनों एक साथ परलोक सिधार गए।

सिंचाई का काम और मौत का अदृश्य जाल

​चिकनी गांव के रहने वाले रंजन ठाकुर और उनकी पत्नी रंजना देवी रोज की तरह अपने खेत में काम करने गए थे। गर्मी के इस मौसम में फसल को बचाने के लिए वे सिंचाई (पानी पटाने) का काम कर रहे थे। सुबह का समय था और सब कुछ सामान्य लग रहा था। खेत के ऊपर और किनारे से गुजर रहे बिजली के तार उनके लिए काल बनकर छिपे हुए थे। अचानक, काम के दौरान रंजना देवी का संपर्क एक ऐसे बिजली के तार से हो गया जो संभवतः नीचे लटका हुआ था या जिसमें रिसाव हो रहा था।

​रंजना देवी को करंट का जोरदार झटका लगा और वे वहीं तड़पने लगीं। अपनी पत्नी को मौत के शिकंजे में फंसे देख रंजन ठाकुर बिना अपनी जान की परवाह किए उन्हें बचाने के लिए दौड़े। उन्होंने जैसे ही रंजना देवी को पकड़ा, वे स्वयं भी उस शक्तिशाली विद्युत प्रवाह की चपेट में आ गए। करंट इतना भीषण था कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे मौके पर ही झुलसकर अचेत हो गए। आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने जब यह मंजर देखा, तो वे चिल्लाते हुए वहां पहुँचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल में मातम और बेबस चिकित्सक

​ग्रामीणों ने किसी तरह लकड़ी के डंडों के सहारे तार को अलग किया और दोनों को तुरंत मनिहारी अनुमंडल अस्पताल ले गए। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की, लेकिन बिजली के झटके इतने घातक थे कि रंजन और रंजना के शरीर ने पहले ही साथ छोड़ दिया था। डॉक्टरों ने औपचारिक जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल परिसर में जैसे ही यह खबर फैली, वहां मौजूद परिजनों और ग्रामीणों की चीख-पुकार से वातावरण बोझिल हो गया।

​डॉक्टरों के अनुसार, शरीर के भीतर बिजली का प्रवाह होने से हृदय की गति तुरंत रुक गई थी (Cardiac Arrest)। शरीर पर झुलसने के गहरे निशान इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि करंट कितना उच्च क्षमता का था। मनिहारी थाना पुलिस को अस्पताल से ही इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की।

चार मासूमों का क्या होगा कसूर? वीरान हुई बच्चों की दुनिया

​इस त्रासदी का सबसे भयावह पहलू वह चार मासूम बच्चे हैं, जो अब पूरी तरह अनाथ हो चुके हैं। रंजन ठाकुर और रंजना देवी के चार छोटे बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और एक बेटा शामिल है। सबसे दुखद बात यह है कि इनमें से सबसे छोटा बच्चा अभी बहुत ही कम उम्र का है, जिसे शायद यह भी नहीं पता कि अब उसकी माँ उसे कभी गोदी में नहीं उठाएगी और पिता का हाथ उसके सिर पर कभी नहीं होगा।

​गांव के लोग उन बच्चों को देखकर अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। एक ही पल में उन बच्चों की दुनिया खुशियों से भरकर वीरानगी में बदल गई। चिकनी गांव के निवासियों का कहना है कि रंजन एक मेहनती किसान थे और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात खेतों में पसीना बहाते थे। उनकी पत्नी रंजना देवी हर कदम पर उनका साथ देती थीं। अब उन बच्चों की परवरिश, शिक्षा और भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन बच्चों के लिए तत्काल विशेष आर्थिक सहायता और परवरिश की व्यवस्था की जाए।

बिजली विभाग की लापरवाही: नंगे तारों का खौफ

​इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा बिजली विभाग पर फूट पड़ा है। चिकनी गांव और आसपास के क्षेत्रों के किसानों का आरोप है कि खेतों के बीच से गुजर रहे बिजली के तार अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं और कई जगहों पर काफी नीचे लटक रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार स्थानीय लाइनमैन और कनीय अभियंता (JE) को इन नंगे तारों को ठीक करने या खंभों की ऊंचाई बढ़ाने के लिए आवेदन दे चुके थे, लेकिन विभाग केवल आश्वासनों की घुट्टी पिलाता रहा।

​ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की इसी लापरवाही ने आज एक परिवार को जड़ से खत्म कर दिया। यदि समय रहते इन तारों को इंसुलेट किया गया होता या उनकी ऊंचाई दुरुस्त की गई होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। आक्रोशित लोगों ने मांग की है कि दोषी बिजली कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और मृतक के परिवार को विभाग की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए।

पुलिस की कार्रवाई और डीएसपी का बयान

​मनिहारी डीएसपी विनोद कुमार ने इस पूरी घटना की पुष्टि करते हुए इसे अत्यंत दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जांच की है और प्रथम दृष्टया यह करंट लगने से हुई मौत का मामला है। विनोद कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस बिजली विभाग की लापरवाही वाले एंगल की भी गंभीरता से जांच करेगी। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​डीएसपी ने यह भी आश्वासन दिया कि वे जिला प्रशासन के माध्यम से पीड़ित परिवार और अनाथ हुए बच्चों को सरकारी मुआवजा दिलाने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी करेंगे। पुलिस टीम गांव के अन्य किसानों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या वहां वास्तव में सुरक्षा के इंतजामों की कमी थी।

समाज और प्रशासन की बढ़ती जिम्मेदारी

​स्थानीय जनप्रतिनिधि बंटी सिंह भी इस घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे। उन्होंने कहा कि “यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गहरा घाव है। रंजन और रंजना का जाना अपूरणीय है, लेकिन अब हमारी प्राथमिकता उन चार बच्चों को संभालना है।” बंटी सिंह ने कहा कि वे मुख्यमंत्री राहत कोष और जिला आपदा प्रबंधन विभाग से सहायता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

​साथ ही, सामुदायिक स्तर पर भी बच्चों की देखभाल के लिए एक समिति बनाने की चर्चा की जा रही है। गांव के लोगों का मानना है कि सरकारी मदद में अक्सर देरी होती है, ऐसे में बच्चों की तत्काल जरूरतों—जैसे भोजन और कपड़ों—के लिए गांव के लोग आगे आ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने बिजली विभाग को अल्टीमेटम दिया है कि 24 घंटे के भीतर पूरे पंचायत के लटके हुए तारों को ठीक किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

खेतों में काम करने वालों के लिए बढ़ता जोखिम

​बिहार के ग्रामीण इलाकों में हर साल सैकड़ों किसान बिजली के झटके का शिकार होते हैं। मानसून से पहले और सिंचाई के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। जर्जर तार, लोहे के खंभों में करंट का उतरना और विभाग की उदासीनता किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। कटिहार की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या अन्नदाता की जान इतनी सस्ती है?

​इस हादसे ने पूरे जिले के प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या बिजली विभाग अपनी गलतियों से सबक लेकर अन्य खेतों में बिछे ‘मौत के जाल’ को साफ करता है या फिर किसी और घर के चिराग बुझने का इंतजार किया जाएगा। फिलहाल, चिकनी गांव में सन्नाटा है और उन चार मासूमों की सिसकियां हर पत्थर दिल को पिघला रही हैं।

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