दवा कारोबारी पिता ने सोती हुई जुड़वा बेटियों की ‘चापड़’ से ले ली जान, पत्नी को पुलिस ने जगाकर सुनाई ‘प्रलय’ की खबर

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से रविवार, 19 अप्रैल 2026 की सुबह एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को लहूलुहान कर दिया है। शहर के नौबस्ता थाना क्षेत्र स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में एक दवा कारोबारी ने अपनी दो मासूम जुड़वा बेटियों की गला रेतकर नृशंस हत्या कर दी। यह वारदात उस समय अंजाम दी गई जब पूरा अपार्टमेंट गहरी नींद में था और बगल के ही कमरे में आरोपी की पत्नी और बेटा सो रहे थे। हत्या की इस खौफनाक पटकथा को जिस निर्दयता से लिखा गया, उसने न केवल पुलिस महकमे को हिला दिया है, बल्कि अपार्टमेंट के निवासियों के बीच एक गहरा सन्नाटा और दहशत पैदा कर दी है। एक ऐसा पिता, जिसे अपनी बेटियों का रक्षक होना चाहिए था, वही उनका काल बन गया। पुलिस की शुरुआती जांच और आरोपी के कबूलनामे ने इस हत्याकांड के पीछे छिपे घरेलू कलह और मानसिक तनाव के काले साये को उजागर किया है।

आधी रात का ‘खूनी’ सन्नाटा: जब पिता बना जल्लाद

​कानपुर के किदवईनगर इलाके (K-ब्लॉक) में स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट फेज-2 में दवा कारोबारी शशि रंजन मिश्रा अपने परिवार के साथ रहते थे। शनिवार की रात सब कुछ सामान्य लग रहा था। परिवार ने रात का भोजन किया और सोने चले गए। लेकिन शशि रंजन के मन में प्रतिशोध या अवसाद की जो आग सुलग रही थी, उसने रात के सन्नाटे में विकराल रूप ले लिया। पुलिस के अनुसार, तड़के लगभग 2:00 से 2:30 बजे के बीच, जब 11 वर्षीय जुड़वा बेटियां रिद्धि और सिद्धि गहरी नींद में थीं, शशि रंजन ने एक धारदार स्टील के ‘चापड़’ (बड़े छुरे) से उनका गला रेत दिया।

​हैरानी और खौफ की बात यह है कि वारदात के समय शशि रंजन की पत्नी रेशमा छेत्री और उनका बेटा बगल के ही कमरे में सो रहे थे। अपराधी ने इतनी सफाई और खामोशी से इस कृत्य को अंजाम दिया कि पास के कमरे में सो रही माँ को अपनी बेटियों की चीख तक सुनाई नहीं दी। मासूमों को संभलने का एक मौका तक नहीं मिला और जिस बिस्तर पर उन्हें सुनहरे सपने देखने थे, वह चंद मिनटों में उनके खून से लाल हो गया।

खुद पुलिस को फोन कर बोला— ‘मैंने बेटियों को मार डाला’

​इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह कॉल थी, जो सुबह करीब 4:30 बजे यूपी-112 कंट्रोल रूम को मिली। फोन करने वाला कोई और नहीं, बल्कि खुद शशि रंजन मिश्रा था। उसने पुलिस को सूचना दी कि उसने अपनी दोनों बेटियों की हत्या कर दी है। जब तक नौबस्ता पुलिस और यूपी-112 की टीम त्रिमूर्ति अपार्टमेंट के फ्लैट पर पहुँची, तब तक शशि रंजन वहां शांत बैठा था।

​पुलिस ने जब फ्लैट के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य विचलित करने वाला था। रिद्धि और सिद्धि के निर्जीव शरीर बिस्तर पर पड़े थे। पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती उस माँ को जगाना था, जिसे यह अंदाजा भी नहीं था कि उसके जीवन का सबसे बड़ा वज्रपात हो चुका है। पुलिस ने जब बगल के कमरे में सो रही रेशमा को जगाया और बगल के कमरे का हाल दिखाया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक पल में एक खुशहाल परिवार बिखर चुका था। पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयुक्त स्टील का चापड़ बरामद कर लिया और शशि रंजन को हिरासत में ले लिया।

लव मैरिज से ‘डेथ मैरिज’ तक का सफर: 13 साल का विश्वास टूटा

​शशि रंजन मिश्रा और रेशमा छेत्री की कहानी 13 साल पहले एक ‘लव मैरिज’ के साथ शुरू हुई थी। अलग-अलग पृष्ठभूमि होने के बावजूद दोनों ने प्रेम विवाह किया था और समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया था। उनके तीन बच्चे थे—एक बेटा और दो जुड़वा बेटियां। पिछले आठ वर्षों से यह परिवार त्रिमूर्ति अपार्टमेंट के फेज-2 में विवेक गुप्ता के फ्लैट में किराए पर रह रहा था।

​रिद्धि और सिद्धि, दोनों मदर टेरेसा मिशन हाईस्कूल में कक्षा पांच की छात्राएं थीं। पड़ोसियों के अनुसार, दोनों बच्चियां काफी होनहार और मिलनसार थीं। किसी ने नहीं सोचा था कि जिस पिता ने अपनी पसंद से जीवनसाथी चुना और परिवार बसाया, वह अपनी ही संतान का दुश्मन बन जाएगा। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच ‘घरेलू कलह’ चरम पर थी। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद ने शशि रंजन के भीतर एक ऐसा हिंसक अवसाद पैदा कर दिया कि उसने मासूमों को निशाना बनाया। यह हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस 13 साल के भरोसे की भी हत्या है जिसे रेशमा ने संजोया था।

पत्नी की बेबसी: सन्न रह गई माँ, नौकरानी को फोन कर बुलाया

​घटना की जानकारी होते ही रेशमा छेत्री की मानसिक स्थिति ऐसी हो गई कि वे कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं थीं। जब पुलिस ने उन्हें सच्चाई से रूबरू कराया, तो वे पूरी तरह सन्न रह गईं। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि वे किससे मदद मांगे या किसे फोन करें। इसी घबराहट में उन्होंने अपनी नौकरानी अमरावती को फोन किया और उसे तुरंत घर आने को कहा।

​नौकरानी अमरावती जब फ्लैट पर पहुँची, तो वहां पुलिस का पहरा और रेशमा की हालत देखकर दंग रह गई। एक माँ का अपनी ही आँखों के सामने अपनी बेटियों के शवों को देखना किसी प्रलय से कम नहीं था। अपार्टमेंट के अन्य निवासी भी इस घटना से स्तब्ध हैं। आठ साल से यहाँ रह रहे इस परिवार को लेकर कभी किसी ने ऐसी आशंका नहीं जताई थी कि मामला इस हद तक बिगड़ सकता है। फॉरेंसिक टीम ने फ्लैट के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली है और खून के नमूनों के साथ-साथ फिंगरप्रिंट्स भी लिए हैं।

पुलिस की जांच और कानूनी कार्रवाई: डीसीपी साउथ का बयान

​कानपुर के डीसीपी साउथ दीपेंद्र चौधरी ने इस नृशंस हत्याकांड की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला पूरी तरह से स्पष्ट है। पिता ने ही अपनी दोनों बेटियों की हत्या की बात कबूल कर ली है। उन्होंने बताया कि मौके से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटा लिए गए हैं और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। डीसीपी ने कहा, “शशि रंजन मिश्रा को हिरासत में लेकर गहनता से पूछताछ की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह घरेलू कलह और मानसिक विक्षोभ का मामला लग रहा है, लेकिन हम हर उस पहलू की जांच कर रहे हैं जिससे यह पता चल सके कि क्या इसके पीछे कोई तात्कालिक कारण था या यह एक सोची-समझी साजिश थी।”

​इंस्पेक्टर बहादुर सिंह के नेतृत्व में एक टीम शशि रंजन के व्यापारिक लेन-देन और उसके फोन कॉल्स की भी जांच कर रही है। दवा कारोबार में घाटा या किसी बाहरी विवाद की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या हत्या के समय आरोपी किसी नशे या दवा के प्रभाव में था।

घरेलू कलह का ‘खूनी’ अंत: एक सामाजिक विमर्श

​19 अप्रैल 2026 की यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मध्यमवर्गीय परिवारों में बढ़ता तनाव, संवादहीनता और गुस्से पर काबू न होना किस कदर विनाशकारी हो सकता है, त्रिमूर्ति अपार्टमेंट का यह फ्लैट इसका गवाह है। जिस कमरे में जुड़वा बहनों की हंसी गूँजनी चाहिए थी, वहां आज केवल सन्नाटा और खून के धब्बे हैं।

​सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि लव मैरिज के बाद कई बार पारिवारिक दबाव और अपेक्षाएं जब पूरी नहीं होतीं, तो वह आंतरिक कलह का कारण बनती हैं। दवा कारोबारी होने के नाते शशि रंजन पर आर्थिक दबाव भी हो सकता है, लेकिन मासूम बच्चों की बलि चढ़ाना किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराया जा सकता। रिद्धि और सिद्धि, जो अभी जीवन के शुरुआती पड़ाव पर थीं, उन्हें अपने ही पिता की ‘सनक’ की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

न्याय की प्रतीक्षा में मासूम रूहें

​कानपुर का यह हत्याकांड आने वाले कई दिनों तक चर्चा में रहेगा। शशि रंजन मिश्रा अब सलाखों के पीछे है, लेकिन रेशमा और उसके बेटे के लिए जो घाव उसने दिए हैं, वे कभी नहीं भरेंगे। पुलिस इस मामले में कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कह रही है। समाज के लिए यह समय आत्ममंथन का है कि आखिर क्यों हम अपने ही आंगन में असुरक्षित होते जा रहे हैं।

​रिद्धि और सिद्धि का पोस्टमार्टम होने के बाद ही उनकी अंतिम विदाई होगी, लेकिन उनकी मासूम आँखें शायद यही सवाल पूछती रहेंगी कि उनके पिता ने आखिर क्यों उनके सपनों को ‘चापड़’ की धार से काट दिया। वॉइस ऑफ बिहार (VOB) इस खबर के हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करेगा कि इन मासूमों को न्याय मिले। फिलहाल, किदवईनगर के इस अपार्टमेंट में छाया मातम पूरे कानपुर की आँखों में आंसू दे गया है।

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