​झारखंड मुठभेड़: 15 लाख का इनामी सहदेव महतो समेत 4 नक्सली ढेर

हजारीबाग/चतरा। झारखंड के जंगलों में सक्रिय उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों ने एक ऐसी निर्णायक कार्रवाई की है, जिसने प्रतिबंधित नक्सली संगठन की कमर तोड़कर रख दी है। चतरा और हजारीबाग जिले की सीमावर्ती पहाड़ियों पर स्थित केरेडारी थाना क्षेत्र के कोतीझरना जंगल में शुक्रवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की भीषण जंग हुई। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर सटीक प्रहार करते हुए चार खूंखार नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया। मारे गए नक्सलियों में 15 लाख रुपये का इनामी और रीजनल कमेटी मेंबर (RCM) सहदेव महतो भी शामिल है। यह कामयाबी इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि सहदेव के साथ उसकी पत्नी नताशा, जो स्वयं एक सब-जोनल कमेटी मेंबर थी, का भी अंत हो गया है। इस पूरे ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने कुल 26 लाख रुपये के ‘इनामी आतंक’ का सफाया किया है। कोतीझरना के घने जंगलों में हुई यह कार्रवाई राज्य में उग्रवाद के बढ़ते कदमों को रोकने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक प्रहार साबित हुई है।

कोतीझरना के घने अरण्य में बारूदी संघर्ष की दास्तां

​झारखंड का यह इलाका अपनी भौगोलिक दुर्गमता और घने वृक्षों के कारण लंबे समय से नक्सलियों की सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ था। चतरा और हजारीबाग की सीमाओं को जोड़ने वाले इन जंगलों में नक्सलियों की सक्रियता की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। शुक्रवार की भोर में जब सुरक्षाबल खुफिया सूचनाओं के आधार पर सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तभी कोतीझरना के पास नक्सलियों के एक दस्ते ने जवानों को देखते ही अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले का जवानों ने पूरी बहादुरी और सूझबूझ से जवाब दिया।

​पहाड़ियों और झाड़ियों की ओट लेकर नक्सली लगातार गोलियां बरसा रहे थे, लेकिन झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीम ने मोर्चाबंदी करते हुए नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया। घंटों तक चली इस मुठभेड़ में जंगल गोलियों की गूँज से दहल उठा। दोपहर होते-होते जब नक्सलियों की ओर से गोलीबारी कम हुई, तब सुरक्षाबलों ने इलाके में सघन तलाशी अभियान (Search Operation) शुरू किया। इस तलाशी के दौरान झाड़ियों के बीच से चार नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जिनकी पहचान ने पुलिस प्रशासन को बड़ी राहत पहुँचाई।

सहदेव महतो: 15 लाख के इनाम वाला ‘आतंक का चेहरा’

​मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम सहदेव महतो का है। सहदेव महतो संगठन के भीतर ‘रीजनल कमेटी मेंबर’ (RCM) जैसे प्रभावशाली पद पर तैनात था। उसकी गतिविधियों का दायरा झारखंड के हजारीबाग, चतरा से लेकर बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों तक फैला हुआ था। सहदेव को उग्रवादी खेमे में एक रणनीतिकार के रूप में देखा जाता था, जो न केवल बड़ी घटनाओं की साजिश रचता था, बल्कि नए लड़कों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित भी करता था।

​सहदेव महतो पर राज्य सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके खिलाफ हत्या, लेवी वसूली, आगजनी और सुरक्षाबलों पर हमले के दर्जनों संगीन मामले विभिन्न थानों में दर्ज थे। लंबे समय से पुलिस की रडार पर चल रहे इस नक्सली कमांडर का मारा जाना संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। सहदेव के अंत से चतरा-हजारीबाग कॉरिडोर में नक्सलियों का सूचना तंत्र और नेतृत्व पूरी तरह बिखर गया है।

दंपति का अंत: नताशा की भूमिका और संगठन पर प्रभाव

​इस मुठभेड़ की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सहदेव की पत्नी नताशा का मारा जाना है। नताशा संगठन में ‘सब-जोनल कमेटी मेंबर’ के रूप में कार्य कर रही थी। वह केवल सहदेव की पत्नी ही नहीं थी, बल्कि संगठन की महिला विंग की कमान भी संभालती थी। जंगलों के भीतर रसद पहुँचाने, महिला कैडरों की भर्ती करने और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान में नताशा की अहम भूमिका रहती थी।

​पति-पत्नी की इस जोड़ी ने पिछले कई सालों से इस दुर्गम क्षेत्र को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना रखा था। नताशा की मौत ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षाबल अब उग्रवाद की जड़ों पर सीधा वार कर रहे हैं। नक्सली दंपति का एक साथ ढेर होना उग्रवादी विचारधारा के लिए एक बड़ा मानसिक आघात है। इससे संगठन के भीतर यह संदेश गया है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है।

26 लाख के इनामी नक्सलियों का सफाया: अन्य पहचान

​सहदेव और नताशा के अलावा दो अन्य नक्सलियों की पहचान भी सुरक्षाबलों के लिए बड़ी उपलब्धि रही। इनमें एक रंजीत गंझू है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। रंजीत गंझू को संगठन के सैन्य दस्ते का मजबूत आधार माना जाता था। वह सुरक्षाबलों की मूवमेंट पर नजर रखने और आईईडी (IED) बिछाने जैसे खतरनाक कामों में माहिर था।

​चौथा नक्सली बुधन करमाली के रूप में पहचाना गया है, जिस पर 1 लाख रुपये का इनाम था। बुधन स्थानीय स्तर पर संगठन के लिए काम करता था और गांवों में पैठ बनाने में मदद करता था। इन चारों के मारे जाने के साथ ही सुरक्षाबलों ने एक ही झटके में 26 लाख रुपये की इनामी इबारत को मिटा दिया है। घटना स्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, कारतूस, नक्सली साहित्य और दैनिक उपभोग की सामग्री भी बरामद की गई है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि यहाँ कोई बड़ी सभा या योजना बनाई जा रही थी।

रणनीतिक जीत और विकास की राह में रुकावट का खात्मा

​हजारीबाग और चतरा का यह सीमावर्ती इलाका खनिज संपदा और वन संपदा से समृद्ध है, लेकिन उग्रवाद की छाया के कारण यहाँ विकास कार्य हमेशा बाधित रहे हैं। सहदेव महतो जैसे नक्सली नेता सड़कों, पुलों और मोबाइल टावरों के निर्माण में बड़ी बाधा थे। विकास कार्यों में लगे ठेकेदारों और अधिकारियों से ‘लेवी’ वसूलना इनका मुख्य धंधा था। पैसे न मिलने पर ये निर्माण कार्य में लगी गाड़ियों को फूंक देते थे और मजदूरों को डराते थे।

​चार प्रमुख उग्रवादियों के सफाए के बाद अब इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचों के निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रहार के बाद नक्सलियों का जो बचा-खुचा दस्ता है, वह अब पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में आ जाएगा। यह जीत केवल सुरक्षाबलों की नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की भी है जो रात-दिन नक्सलियों के खौफ के साये में जीने को मजबूर थे।

जंगलों में जारी है सर्च ऑपरेशन: पुलिस की अगली रणनीति

​मुठभेड़ के बाद भी सुरक्षाबलों ने ढिलाई नहीं बरती है। कोतीझरना के आसपास के कई किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया गया है। पुलिस को अंदेशा है कि मुठभेड़ के दौरान कुछ अन्य नक्सली घायल हुए हो सकते हैं और वे घने जंगलों की ओट में छिपे हो सकते हैं। ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वायड की मदद से चप्पे-चप्पे को खंगाला जा रहा है।

​झारखंड पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, उग्रवादियों के खिलाफ यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि राज्य की भूमि से नक्सलवाद का पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो जाता। मारे गए नक्सलियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और उनके परिजनों को सूचित किया जा रहा है। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की ‘आत्मसमर्पण’ की नीति को ठुकरा कर हथियार उठाने वालों के लिए कानून का रास्ता केवल सलाखों के पीछे या मुठभेड़ के मैदान तक ही जाता है।

  • ये भी पढ़े..

    भागलपुर में पिता की स्मृति को समर्पित भावपूर्ण काव्य संध्या, कवियों ने कविता और गीतों से दी श्रद्धांजलि

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर के नए डीडीसी रवि राकेश ने संभाला पदभार, विकास योजनाओं को गति देने पर रहेगा विशेष फोकस

    Share Add as a preferred…