HIGHLIGHTS
- मिशन 2026: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फिर से जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय.
- चुनाव कार्यक्रम: 22 मार्च को नामांकन और 24 मार्च तक साफ हो जाएगी तस्वीर.
- एकछत्र राज: 29 दिसंबर 2023 के बाद एक बार फिर पार्टी की पूरी बागडोर नीतीश के पास होगी.
- रणनीति: ‘समृद्धि यात्रा’ के बीच सांगठनिक चुनाव के जरिए पार्टी को एकजुट करने की बड़ी तैयारी.
पटना | 17 मार्च, 2026
बिहार की राजनीति में ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) के निर्विवाद बॉस बनने जा रहे हैं. एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री भागलपुर और बांका की सड़कों पर ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए जनता की नब्ज टटोल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटना में उनकी ताजपोशी की पटकथा तैयार कर ली गई है. जदयू ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसमें नीतीश कुमार का नाम सबसे आगे है.
जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: ‘डेडलाइन’ पर एक नज़र
पार्टी के सांगठनिक चुनाव कार्य के तहत जारी शेड्यूल के अनुसार, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी लेकिन ‘तय’ मानी जा रही है:
कार्यक्रम | महत्वपूर्ण तिथि |
|---|---|
नामांकन (Nomination) | 22 मार्च, 2026 |
नामांकन की जांच (Scrutiny) | 23 मार्च, 2026 |
नाम वापसी (Withdrawal) | 24 मार्च, 2026 |
औपचारिक घोषणा (यदि निर्विरोध) | 24 मार्च, 2026 |
मतदान (यदि आवश्यक हुआ) | 27 मार्च, 2026 |
क्यों अहम है नीतीश की फिर से ताजपोशी?
- पार्टी पर मजबूत पकड़: दिसंबर 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश ने कमान संभाली थी. अब दोबारा अध्यक्ष बनकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि जदयू में उनके कद का कोई दूसरा नेता नहीं है.
- आगामी चुनौतियां: 2025-26 के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए नीतीश कुमार पार्टी की कमान अपने हाथ में रखना चाहते हैं ताकि गठबंधन और टिकट बंटवारे में किसी भी आंतरिक कलह से बचा जा सके.
- वन मैन शो: सूत्रों की मानें तो किसी और ने नामांकन की तैयारी नहीं की है, जिसका मतलब है कि 24 मार्च को नाम वापसी के समय ही उनके नाम की विधिवत घोषणा कर दी जाएगी.
VOB का नजरिया: क्या जदयू को नहीं मिल रहा नीतीश का विकल्प?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि नीतीश कुमार का बार-बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना यह दिखाता है कि जदयू अभी भी ‘नीतीश केंद्रित’ पार्टी बनी हुई है. सांगठनिक चुनाव की यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नजर आती है, क्योंकि पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाला फिलहाल कोई नहीं है. ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान इस घोषणा का होना यह भी दर्शाता है कि नीतीश कुमार सरकार और संगठन, दोनों मोर्चों पर खुद को ‘फ्रंट फुट’ पर रख रहे हैं.


