
पटना/नई दिल्ली। जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर सांगठनिक सुदृढ़ीकरण और आगामी राजनैतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस नई टीम में कुल 24 वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो पार्टी की भविष्यगामी रणनीतियों और मिशन-2026 के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। नीतीश कुमार ने इस फेरबदल के माध्यम से अनुभव, युवा ऊर्जा और सामाजिक संतुलन (Caste Equations) का एक ऐसा मिश्रण तैयार किया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर जदयू की पहचान को और अधिक प्रखर बनाएगा। इस घोषणा में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय संजय कुमार झा को लेकर लिया गया है, जिन्हें लगातार दूसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इसके अतिरिक्त, पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर आसीन कर पार्टी ने अपने कोर वोट बैंक को बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।
संजय कुमार झा: भरोसे और रणनीतिक कौशल का प्रतिफल
जदयू की नई राष्ट्रीय टीम में संजय कुमार झा का कद एक बार फिर बढ़ा है। उन्हें लगातार दूसरी बार कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना इस बात का प्रमाण है कि नीतीश कुमार का उन पर अटूट भरोसा है। संजय झा ने पिछले कार्यकाल के दौरान न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर दिल्ली के राजनैतिक गलियारों में जदयू की स्थिति को मजबूती से पेश किया है। उन्हें ‘संकटमोचक’ और ‘बेहतर समन्वयकर्ता’ के रूप में देखा जाता है। उनकी पुनर्नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि पार्टी के भीतर सांगठनिक निरंतरता बनी रहे और केंद्र सरकार के साथ समन्वय की प्रक्रिया सुचारू रहे। उनके नेतृत्व में पार्टी ने हाल के दिनों में अपने सांगठनिक ढांचे को आधुनिक और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में भी काम किया है।
उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष: सांगठनिक स्थिरता पर जोर
पार्टी ने पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। चंद्रवंशी का लंबा राजनैतिक अनुभव और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) में उनकी गहरी पैठ पार्टी के लिए एक बड़ा ‘एसेट’ साबित होगी। उपाध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका सांगठनिक अनुशासन बनाए रखने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सामंजस्य बिठाने की होगी।
वहीं, सांगठनिक वित्त और संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सांसद आलोक कुमार सुमन को सौंपी गई है, जिन्हें नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। आलोक कुमार सुमन की छवि एक सुलझे हुए और ईमानदार नेता की रही है। उनकी नियुक्ति यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि पार्टी की वित्तीय संरचना पारदर्शी और मजबूत बनी रहे, विशेषकर तब जब आगामी समय में कई राज्यों में सांगठनिक विस्तार की योजनाएं पाइपलाइन में हैं।
12 राष्ट्रीय महासचिवों की टीम: अनुभव और विविधता का संगम
जदयू ने अपनी महासचिवों की सूची में 12 दिग्गजों को स्थान दिया है, जो अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन नियुक्तियों में स्पष्ट रूप से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की झलक मिलती है:
- मनीष कुमार वर्मा: पूर्व आईएएस अधिकारी और नीतीश कुमार के भरोसेमंद रणनीतिकार। इनका मुख्य काम सांगठनिक प्रबंधन और नीतिगत ढांचे को मजबूत करना होगा।
- कहकशां परवीन: भागलपुर की पूर्व मेयर और पूर्व राज्यसभा सांसद। उनकी नियुक्ति से भागलपुर और अंग क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। वे महिला और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का बड़ा चेहरा हैं।
- अशोक चौधरी: बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री और दलित राजनीति के प्रमुख चेहरा। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन विस्तार की जिम्मेदारी दी गई है।
- गुलाम रसूल बलियावी और आफाक अहमद खान: अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को महासचिव बनाया गया है।
- श्याम रजक: राजद से वापसी के बाद उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने दलित समाज को एकजुट करने का संकेत दिया है।
- अन्य नाम: सूची में रमेश सिंह कुशवाहा, रामसेवक सिंह, कपिल हरिश्चंद पाटिल, राज सिंह मान, सुनील कुमार उर्फ इंजीनियर सुनील और हर्षवर्धन सिंह जैसे अनुभवी नेता शामिल हैं, जो महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता: युवा नेतृत्व और प्रभावी संवाद
संगठन के निचले पायदान और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के लिए नीतीश कुमार ने 8 राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की है। इन सचिवों का मुख्य दायित्व राज्यों के प्रभारियों के साथ मिलकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना होगा:
- सचिवों की सूची: राजीव रंजन प्रसाद, रवींद्र प्रसाद सिंह, विद्यासागर निषाद, दयानंद राय, संजय कुमार, मो. निसार, रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी। इन नामों में विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें पूर्वोत्तर भारत (रूही तागुंग) से लेकर बिहार के विभिन्न अंचलों के प्रतिनिधित्व शामिल हैं।
- राष्ट्रीय प्रवक्ता: पार्टी के वैचारिक पक्ष को मीडिया और जनता के सामने मजबूती से रखने के लिए राजीव रंजन को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। राजीव रंजन अपने तर्कपूर्ण और संतुलित बयानों के लिए जाने जाते हैं। उनकी भूमिका विपक्ष के हमलों का सटीक जवाब देने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने की होगी।
राजनैतिक विश्लेषण: मिशन 2026 और सामाजिक समीकरण
जदयू की इस नई कार्यकारिणी का गठन महज एक सांगठनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी राजनैतिक बिसात है। 2026 के इस दौर में, जहाँ बिहार की राजनीति में कई नए समीकरण बन रहे हैं, नीतीश कुमार ने अपनी टीम में उन चेहरों को आगे बढ़ाया है जो जमीन पर पकड़ रखते हैं।
- अति पिछड़ा और दलित कार्ड: उपाध्यक्ष पद पर चंद्रवंशी और महासचिवों की सूची में अशोक चौधरी व श्याम रजक का होना यह बताता है कि जदयू अपने आधार वोट बैंक (EBC और महादलित) को किसी भी कीमत पर बिखरने नहीं देना चाहती।
- प्रशासनिक दक्षता: मनीष वर्मा जैसे पूर्व अधिकारियों को शीर्ष पदों पर रखना यह संकेत देता है कि अब पार्टी का संचालन और चुनावी प्रबंधन अधिक पेशेवर तरीके से किया जाएगा।
- अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व: गुलाम रसूल बलियावी, आफाक अहमद खान और कहकशां परवीन जैसे नामों को शामिल कर पार्टी ने ‘धर्मनिरपेक्ष’ छवि को और पुख्ता किया है।
- महिला शक्ति: कहकशां परवीन और निवेदिता कुमारी जैसी महिलाओं को प्रमुख पदों पर आसीन कर नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण के अपने एजेंडे को संगठन के भीतर भी लागू किया है।


