एनडीए में विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में सीट बंटवारे को लेकर खलबली मची हुई है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी के लिए 103 सीटें लॉक करना चाहते थे, लेकिन बंटवारे में जदयू के खाते में केवल 101 सीटें आईं।
नीतीश कुमार की पसंदीदा नौ सीटें जदयू को नहीं मिलीं, जिससे गुस्सा साफ नजर आया। मुख्यमंत्री ने जदयू के वरिष्ठ नेताओं को निर्देश दिया कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं से इस संबंध में चर्चा करें और सुधार कराएं। इसके बाद जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक हुई।
सूत्रों के अनुसार, जिन नौ सीटों को मुख्यमंत्री ने रिजेक्ट किया है, वे जदयू के हिसाब से सही नहीं मानी जा रही हैं। एनडीए के सीट बंटवारे में ये सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में चली गई थीं। जदयू ने एक बार फिर मांग की है कि उन्हें उन सीटों पर उम्मीदवार मिलें, जहाँ से पार्टी के नेता पहले भी चुनाव जीत चुके हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनबरसा सीट के लिए पार्टी विधायक और मंत्री रत्नेश सदा को पार्टी का सिंबल दे दिया है। रत्नेश सदा मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के तल्ख तेवर के कारण सोमवार शाम को एनडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थगित कर दी गई। जदयू और भाजपा के बड़े नेताओं के बीच लंबे समय तक बैठक चली। संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार को एनडीए का प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगा और गठबंधन में सीटों का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद के बाद एनडीए में संतुलन बनाने और गठबंधन में आपसी सहमति कायम करने के लिए अंतिम मिनट तक कई चर्चाएँ जारी रह सकती हैं।


