
जमुई। बिहार के जमुई जिले से खाकी पर प्रहार की एक बेहद गंभीर और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। टाउन थाना क्षेत्र के खैरमा गांव में सोमवार की सुबह उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गई, जब एक कुख्यात अपराधी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर अपराधियों और उनके परिजनों ने मिलकर जानलेवा हमला बोल दिया। कानून के रखवालों को निशाना बनाकर किए गए इस दुस्साहसिक हमले में दो सब-इंस्पेक्टर (SI) और एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अपराधियों ने न केवल पुलिसिया कार्रवाई में बाधा डाली, बल्कि लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर से पुलिस टीम को लहूलुहान कर दिया। हालांकि, खून से लथपथ होने के बावजूद जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और एक दर्जन से अधिक संगीन मामलों में वांछित मुख्य आरोपी ढेबू यादव उर्फ लालमोहन यादव सहित चार लोगों को दबोच लिया। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं कि वे वर्दी पर हाथ डालने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। फिलहाल, घायल जवानों का इलाज अस्पताल में चल रहा है और गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
खैरमा पुल के पास बिछाया गया था जाल: गिरफ्तारी और फिर अचानक हमला
सोमवार की सुबह करीब 10 बजे, जमुई टाउन थाने की एक विशेष टीम गुप्त सूचना के आधार पर खैरमा गांव की ओर रवाना हुई थी। पुलिस का मुख्य लक्ष्य ढेबू यादव उर्फ लालमोहन यादव था, जो पिछले काफी समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। ढेबू यादव पर हत्या, लूट और रंगदारी जैसे एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। केस के अनुसंधानकर्ता (IO) सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार साह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने खैरमा पुल स्थित एक चिमनी भट्ठा के पास घेराबंदी की।
जैसे ही पुलिस ने ढेबू यादव को दबोचा, वहां का मंजर अचानक बदल गया। ढेबू के शोर मचाते ही उसके परिवार के सदस्य और दर्जनों समर्थक लाठी-डंडों के साथ वहां पहुँच गए। इससे पहले कि पुलिस टीम आरोपी को गाड़ी में बैठा पाती, भीड़ ने चारों ओर से पुलिस को घेर लिया। अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से पत्थरबाजी शुरू कर दी और लाठी-डंडों से जवानों पर पिल पड़े। पुलिस टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हमलावर हिंसक हो चुके थे। इस अफरा-तफरी के बीच अपराधियों का एकमात्र मकसद ढेबू यादव को पुलिस की पकड़ से छुड़ाना था।
तीन जवान हुए लहूलुहान: सदर अस्पताल में चल रहा इलाज
भीड़ के इस उग्र हमले में टाउन थाने के सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार साह, बिक्रम कुमार और सिपाही रणबीर कुमार बुरी तरह जख्मी हो गए। हमलावरों ने विशेष रूप से उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया था। लहूलुहान हालत में भी पुलिसकर्मियों ने अपना आपा नहीं खोया और मुख्य आरोपी को अपनी गिरफ्त से छूटने नहीं दिया। घटना की सूचना मिलते ही टाउन थाने से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया, जिसके बाद हमलावर तितर-बितर हुए।
तीनों घायल जवानों को तुरंत जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर मनीष कुमार ने घायलों का प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार, जवानों को गंभीर चोटें आई हैं, विशेषकर ईंट-पत्थरों के प्रहार से शरीर पर गहरे जख्म बन गए हैं। सिपाही रणबीर कुमार की स्थिति नाजुक बताई जा रही थी, लेकिन उपचार के बाद वे अब खतरे से बाहर हैं। अस्पताल परिसर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहा, जिन्होंने घायल साथियों का ढांढस बंधाया और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
एक दर्जन मामलों का आरोपी है ढेबू यादव: पुलिस के लिए था बड़ा सिरदर्द
जमुई के एसडीपीओ सतीश सुमन ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ढेबू यादव एक शातिर और आदतन अपराधी है। उस पर जमुई टाउन थाना के अलावा झाझा रेल थाना और आसपास के अन्य थानों में भी एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। ढेबू यादव की पहचान एक ऐसे अपराधी के रूप में है जो पहले भी पुलिस टीम पर हमला कर चुका है। वह क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अक्सर हिंसक तरीकों का सहारा लेता रहा है।
एसडीपीओ ने बताया कि पुलिस टीम पूरी तैयारी के साथ गई थी, लेकिन परिवार के सदस्यों द्वारा अचानक किए गए हमले ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस पर हमला करना एक गंभीर संवैधानिक अपराध है और इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ढेबू यादव और उसके चार सहयोगियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, क्योंकि उसकी फरारी क्षेत्र में अपराध को बढ़ावा दे रही थी। अब पुलिस इन सभी पर हत्या के प्रयास (धारा 307) और सरकारी कार्य में बाधा डालने की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
आरोपी की दलील: ‘सादे लिबास’ और ‘गोतिया’ विवाद का बहाना
गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में ढेबू यादव ने एक अजीबोगरीब सफाई पेश की है। उसका कहना है कि पुलिस की टीम वर्दी में नहीं बल्कि सादे लिबास में आई थी। ढेबू के अनुसार, उसका अपने गोतिया (करीबी रिश्तेदारों) के साथ जमीन और पुराने विवाद को लेकर काफी समय से झगड़ा चल रहा है। उसने दावा किया कि जब अचानक कुछ लोग उसे पकड़ने आए, तो उसे और उसके परिवार को लगा कि वे उसके दुश्मन या गोतिया के भेजे हुए गुंडे हैं जो उसे मारने आए हैं।
ढेबू यादव ने मीडिया के सामने कहा, “अगर पुलिस वर्दी में होती तो हम हमला नहीं करते। हमें लगा कि वे लोग हमें जान से मारने आए हैं, इसलिए आत्मरक्षा में यह कदम उठाया गया।” हालांकि, पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह केवल गिरफ्तारी से बचने और सजा को कम करवाने के लिए गढ़ा गया एक बहाना है। पुलिस की टीम आधिकारिक वाहन और आवश्यक दस्तावेजों के साथ गई थी, और खैरमा जैसे छोटे गांव में पुलिस की पहचान छिपाना लगभग नामुमकिन होता है। ढेबू के इस बयान को पुलिस उसकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रही है।
सुशासन और खाकी की सुरक्षा पर सवाल
जमुई की यह घटना एक बार फिर बिहार में पुलिस के सामने आने वाली उन चुनौतियों को उजागर करती है, जहाँ अपराधियों को कानून का जरा भी खौफ नहीं रह गया है। खैरमा गांव में जिस तरह से एक अपराधी को बचाने के लिए पूरा परिवार और समर्थक पुलिस पर जानलेवा हमला कर देते हैं, वह समाज के बढ़ते अपराधीकरण का सूचक है। अगर पुलिस अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाएगी, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी?
एसडीपीओ सतीश सुमन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ढेबू यादव के खिलाफ और भी सख्त तरीके से कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब उन अन्य सहयोगियों की भी तलाश की जा रही है जो मौके से फरार होने में सफल रहे। यह हमला बिहार पुलिस के उन जांबाज अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर अपराधियों का पीछा करते हैं। जमुई पुलिस ने यह संदेश दे दिया है कि हमला चाहे कितना भी बड़ा हो, कानून के लंबे हाथ अपराधियों की गर्दन तक पहुँचकर ही रहेंगे। खैरमा गांव अब पुलिस की विशेष निगरानी में है और आने वाले दिनों में यहाँ कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।


