अगर आप नए साल पर पिकनिक स्पॉट की तलाश में हैं, तो जमुई जिले का भीमबांध आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। कड़ाके की सर्दी में भी यहां के गर्म पानी के कुंड में नहाने का आनंद दोगुना हो जाता है। खास बात यह है कि यहां का पानी कभी ठंडा नहीं होता, चाहे मौसम कितना भी सर्द क्यों न हो।
महाभारत काल से जुड़ा है भीमबांध का इतिहास
बिहार के मुंगेर से जमुई जाने वाले मुख्य मार्ग से करीब 10 किलोमीटर अंदर, घने जंगलों के बीच स्थित भीमबांध सर्दियों में पर्यटकों की पसंदीदा जगह बन जाता है। जानकारों के अनुसार, भीमबांध का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
भीम ने बनाया था बांध, तभी पड़ा नाम भीमबांध
स्थानीय निवासी संतन कुमार बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। उस समय भीम ने पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए बांध का निर्माण किया, जिसके कारण इस स्थान का नाम भीमबांध पड़ा।
यहां दो कुंड हैं—एक में गर्म पानी और दूसरे में ठंडा पानी उपलब्ध रहता है।
“भीमबांध एक बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां की पहाड़ियां और हरियाली लोगों को आकर्षित करती हैं। नववर्ष और ठंड के मौसम में बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं।”
— संतन कुमार, स्थानीय निवासी
जियोथर्मल गतिविधि से गर्म रहता है पानी
वन विभाग के अनुसार, भीमबांध के पानी के गर्म रहने का कारण जियोथर्मल (भूतापीय) गतिविधि है।
पृथ्वी के अंदर से निकलने वाली गर्मी, मैग्मा और भाप चट्टानों के जरिए पानी तक पहुंचती है, जिससे यहां का पानी सालभर गर्म बना रहता है।
कभी नक्सल प्रभावित रहा इलाका
स्थानीय लोगों के अनुसार, भीमबांध इलाका पहले नक्सलियों का गढ़ माना जाता था।
2005 में मुंगेर के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू नक्सलियों द्वारा बिछाए गए बारूद की चपेट में आ गए थे। इसके बाद लंबे समय तक लोगों का यहां आना-जाना कम हो गया था।
सीआरपीएफ कैंप के बाद बदली तस्वीर
“सुरक्षा बलों के कैंप बनने के बाद नक्सल समस्या खत्म हुई। अब यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगे हैं, खासकर ठंड के मौसम में। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अद्भुत है और धीरे-धीरे इसका सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है।”
— संतन कुमार, स्थानीय
कैसे पहुंचे भीमबांध
- दूसरे राज्यों से आने वाले पहले पटना पहुंचें
- इसके बाद बरियारपुर (मुंगेर) या जमुई रेलवे स्टेशन तक ट्रेन लें
- सड़क मार्ग से मुंगेर–बरियारपुर–खड़गपुर या जमुई–लक्ष्मीपुर होते हुए भीमबांध पहुंचा जा सकता है
- चाहें तो निजी वाहन भी लिया जा सकता है
घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा इलाका
जमुई जिला चारों ओर से घने जंगल, नदियों और ऊंची पहाड़ियों से घिरा है। यह इलाका झारखंड बॉर्डर से सटा होने के कारण खनिज संपदा से भी भरपूर है।
यहां स्थित सिमुलतला, जिसे ‘मिनी शिमला’ भी कहा जाता है, पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है।
जमुई के प्रमुख पर्यटन स्थल
- पंचभूरा झरना
- गिद्धेश्वर पहाड़
- कुंड स्थान
- क्षत्रिय कुंड महावीर स्थान
- गरही डैम
- नागी–नकटी डैम
- काकन जैन मंदिर
- महावीर वाटिका
8.90 करोड़ की लागत से हुआ भीमबांध का सौंदर्यीकरण
बिहार सरकार ने भीमबांध का आधुनिक सौंदर्यीकरण कराया है।
8 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से क्षेत्र को विकसित किया गया है। यहां गर्म और ठंडे पानी के लिए अलग-अलग कुंड बनाए गए हैं, ताकि पर्यटक गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म पानी का आनंद ले सकें।


