बिहार के दरभंगा जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चौपाल कार्यक्रम उस समय हंगामे में बदल गया, जब पार्टी के ही कुछ नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
चौपाल कार्यक्रम में हंगामा
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस कमेटी सदस्य राम नारायण झा ने मंच पर मौजूद दिग्गज नेताओं के सामने ही नाराजगी जताई और जोरदार नारेबाजी की। स्थिति बिगड़ती देख विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा ने हाथ जोड़कर शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं रुका।
बंद कमरे की बैठक पर उठे सवाल
राम नारायण झा ने आरोप लगाया कि जिला कांग्रेस की खामियों पर चर्चा के लिए उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और प्रभारी नेताओं ने बंद कमरे में बैठक कर ली, जबकि कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी गई। इसी कारण विरोध किया गया।
टिकट और संगठन में लेन-देन का आरोप
राम नारायण झा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगठनात्मक पद और टिकट के बदले पैसे लिए गए। उन्होंने दावा किया कि एक बाहरी व्यक्ति को पैसों के बल पर एआईसीसी सदस्य बनाया गया, जबकि वे स्वयं दशकों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे 1979 से कांग्रेस से जुड़े हैं, सात बार निर्वाचित सदस्य रह चुके हैं, लेकिन उन्हें न तो विधानसभा टिकट मिला और न ही संगठन में सम्मानजनक स्थान।
शीर्ष नेतृत्व पर भी साधा निशाना
राम नारायण झा ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कई ईमेल किए, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को न्याय नहीं दे पा रही है, तो देश को न्याय कैसे देगी।
दिग्गज नेताओं के सामने नारेबाजी
कार्यक्रम में मौजूद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और अन्य वरिष्ठ नेताओं के सामने ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए।
करीब 10 मिनट तक चला हंगामा
हंगामा करीब 10 मिनट तक चलता रहा। कुछ कार्यकर्ताओं ने हाथ में पार्टी का झंडा लेकर विरोध किया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब टिकट बेचने के आरोप लगाए गए।
वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
काफी देर तक चले विरोध के बाद वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को समझाया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई। इस घटना ने बिहार कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और असंतोष को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है।


