
पटना: बिहार सरकार ने राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सोमवार को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में वित्तीय वर्ष 2025–26 की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया।
इस दौरान उद्योग विभाग के सचिव सह एमडी, बियाडा एवं आईडीए कुंदन कुमार भी उपस्थित रहे।
बिहार बनेगा पूर्वी भारत का औद्योगिक हब
उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार का औद्योगिक माहौल तेजी से बदल रहा है। नीतिगत स्थिरता, बेहतर प्रशासन और निवेशकों के साथ संवाद के चलते राज्य अब पूर्वी भारत का उभरता हुआ औद्योगिक केंद्र बन रहा है।
सरकार ने अगले पांच वर्षों में ₹50 लाख करोड़ निवेश आकर्षित करने और 1 करोड़ रोजगार सृजित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स और एयर कनेक्टिविटी को तेजी से विकसित किया जा रहा है।
नई नीतियां और बड़े फैसले
सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं:
- BIIPP 2025 के तहत निवेशकों को मुफ्त भूमि, पूंजी अनुदान, ब्याज सब्सिडी और टैक्स रिफंड जैसी सुविधाएं
- बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 से राज्य को टेक्नोलॉजी हब बनाने की तैयारी
- MSME के लिए अलग निदेशालय का गठन
- बिहार राज्य विपणन प्राधिकरण (BSMA) की स्थापना, जिससे छोटे उद्योगों को बाजार मिलेगा
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है—“Policy for All”, यानी हर वर्ग के उद्यमियों को समान अवसर।
देश-विदेश में निवेशकों से संवाद
उद्योग विभाग ने निवेश आकर्षित करने के लिए भारत और विदेशों में कई रोड शो और समिट आयोजित किए। थाईलैंड, बेंगलुरु, कोलकाता, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में आयोजित कार्यक्रमों से राज्य को व्यापक निवेश प्रस्ताव मिले।
निवेश में बड़ी उपलब्धि
वित्तीय वर्ष 2025–26 में बिहार को:
- 747 निवेश प्रस्ताव प्राप्त
- कुल प्रस्तावित निवेश: ₹17,217 करोड़ से अधिक
- BIADA के जरिए 404 एकड़ भूमि आवंटन
- करीब ₹5500 करोड़ निवेश और 22,500 रोजगार की संभावना
इनमें रिलायंस, अल्ट्राटेक, मदर डेयरी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी बड़ी कंपनियों की भागीदारी शामिल है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार
राज्य को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से जोड़ा गया है, जिससे निवेशकों को सभी स्वीकृतियां एक प्लेटफॉर्म पर मिल रही हैं।
इसके अलावा:
- महिलाओं को सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक काम की अनुमति (सुरक्षा शर्तों के साथ)
- फैक्ट्रियों के संचालन नियमों में लचीलापन
- औद्योगिक विवाद कानून में संशोधन से उद्योगों को राहत
बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर काम तेज
राज्य में कई मेगा परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं:
- गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी (IMC)
- मुजफ्फरपुर में टेक्सटाइल और बैग निर्माण यूनिट
- बक्सर और पश्चिमी चंपारण में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ)
- फतुहा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क और प्रस्तावित फिनटेक सिटी
- झंझारपुर में ग्रीन इंडस्ट्रियल एरिया
इसके साथ ही विभिन्न जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है।
स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा
बिहार में स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से मजबूत हो रहा है:
- 2025–26 में 109 नए स्टार्टअप पंजीकृत
- कुल 1653 स्टार्टअप्स को चयन, जिनमें 1456 को वित्तीय सहायता
- अब तक ₹92.2 करोड़ वितरित
- 242 महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप सक्रिय
- IIT पटना के सहयोग से ‘जीरो लैब’ की स्थापना
राज्य को DPIIT द्वारा “Aspiring Leader” की श्रेणी में मान्यता मिली है।
उद्यमी योजनाओं से रोजगार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत अब तक:
- 44,179 लाभुकों को ₹3242 करोड़ से अधिक सहायता
- इस वर्ष 9,347 नए लाभार्थियों का चयन प्रस्तावित
- 6.5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त
वहीं PMEGP और PMFME योजनाओं में भी बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
खादी, हस्तकरघा और ग्रामीण उद्योग को नई पहचान
- खादी मॉल पटना ने ₹22 करोड़ की बिक्री दर्ज की
- पूर्णिया, दरभंगा और झंझारपुर में नए खादी मॉल निर्माणाधीन
- मधुबनी पेंटिंग से जुड़े 200 कलाकारों को टूलकिट
- 68 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन
बिहार फाउंडेशन का वैश्विक विस्तार
बिहार फाउंडेशन के अब तक 47 चैप्टर देश-विदेश में सक्रिय हैं। इसके जरिए निवेश और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार का विजन स्पष्ट
उद्योग मंत्री ने कहा कि बिहार अब “योजना” से आगे बढ़कर “क्रियान्वयन” के चरण में प्रवेश कर चुका है। राज्य का लक्ष्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और रोजगार-प्रधान औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार देश के शीर्ष औद्योगिक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।


