ट्रेनों में कंबल और चादर चोरी पर लगेगी लगाम: एसी कोच में RFID चिप और स्मार्ट ट्रैकिंग सिस्टम होगा लागू

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के एसी कोचों में यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले कंबल, चादर, तकिया कवर और तौलियों की चोरी रोकने के लिए नई तकनीक अपनाने का फैसला किया है। जल्द ही इन सभी लिनेन सामग्री में आरएफआईडी (RFID) चिप लगाई जाएगी, जिससे उनकी हर समय निगरानी की जा सकेगी। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और यात्रियों को साफ-सुथरा तथा पर्याप्त लिनेन उपलब्ध कराना आसान होगा।

रेलवे अपनाएगा हाईटेक ट्रैकिंग सिस्टम

रेलवे बोर्ड ने लिनेन प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने की योजना तैयार की है। इसके तहत कंबल, चादर, तौलिया और तकिया कवर में विशेष RFID टैग लगाए जाएंगे। इन टैगों की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई सामान किस ट्रेन, किस कोच और किस स्थान पर है। यदि कोई सामग्री गायब होती है तो उसकी तुरंत पहचान की जा सकेगी।

चोरी रोकने के लिए लगाए जाएंगे सेंसर

नई व्यवस्था के तहत ट्रेनों के निकास द्वारों और लिनेन प्रबंधन केंद्रों पर विशेष सेंसर लगाए जाएंगे। यदि कोई यात्री या अन्य व्यक्ति RFID टैग लगे कंबल या चादर को बिना अनुमति बाहर ले जाने का प्रयास करेगा तो सिस्टम तुरंत इसकी जानकारी दर्ज कर लेगा। इससे रेलवे को चोरी की घटनाओं पर नजर रखने और समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों को मिलेगा साफ और बेहतर लिनेन

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू होने से लिनेन की उपलब्धता बेहतर होगी। वर्तमान में बड़ी संख्या में कंबल, चादर और तौलियों की चोरी या गुम होने के कारण यात्रियों को कई बार पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती। नई व्यवस्था लागू होने के बाद साफ-सुथरे और समय पर उपलब्ध लिनेन की समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।

रखरखाव भी होगा आसान

RFID आधारित प्रणाली से प्रत्येक कंबल और चादर का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी वस्तु का कितनी बार उपयोग हुआ, कब धुलाई हुई और कब उसे बदलने की आवश्यकता है। इससे लिनेन की गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर उसके प्रतिस्थापन में भी सुविधा होगी।

चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत

रेलवे इस स्मार्ट लिनेन ट्रैकिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। शुरुआत प्रमुख ट्रेनों और एसी कोचों से की जाएगी। सफल परीक्षण के बाद इसे देशभर की अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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