मोतिहारी में ‘मौत की घूँट’ ने छीनी घर की खुशियाँ: बेटी की डोली उठते ही पिता का उठा जनाजा; जहरीली शराब कांड में आठवीं बलि, कर्ज के बोझ और शराब के जहर ने उजाड़ा परिवार

  • ​बिहार के मोतिहारी जिले में शराबबंदी के दावों के बीच मौत का तांडव रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जहाँ जहरीली शराब के सेवन से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर अब आठ तक पहुँच गया है।
  • ​ताज़ा मामला एक ऐसे पिता का है जिसकी आँखों में कल तक बेटी के सुखद भविष्य के सपने थे, लेकिन आज उसी पिता की लाश पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पड़ी है।
  • ​मृतक मोहम्मद इलियास अंसारी ने अपनी बेटी की विदाई के तुरंत बाद शराब का सेवन किया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
  • ​कर्ज के भारी बोझ तले दबे इलियास ने किसी तरह दो बेटियों की शादी की थी, लेकिन शराब के जहर ने तीसरी कुंवारी बेटी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया।
  • ​मोतिहारी के सदर अस्पताल में शव के पहुँचते ही परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मोतिहारी (द वॉयस ऑफ बिहार)।

खुशियों के घर में पसरा मातम: जब पिता की अर्थी ने तोड़ा परिवार का हौसला

बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जो शराबबंदी की सफलता और विफलता की बहस से परे, एक गरीब परिवार के उजड़ने की दास्तान बयां करती है। यहाँ जहरीली शराब कांड में आठवीं बलि मोहम्मद इलियास अंसारी के रूप में सामने आई है। यह केवल एक मौत नहीं है, बल्कि एक ऐसे पिता का अंत है जो अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कर्ज के जाल में फंसा था। कल जिस घर से शहनाइयों की गूँज सुनाई दे रही थी और बेटी की डोली विदा हुई थी, आज उसी घर के आंगन में रोने-बिलखने की आवाजें आसमान चीर रही हैं। शराब के जहर ने एक हँसते-खेलते परिवार की रीढ़ तोड़ दी है।

बेटी की विदाई और मौत का घूँट: एक खौफनाक अंत

मोहम्मद इलियास अंसारी के घर में पिछले कुछ दिनों से उत्सव का माहौल था। उन्होंने अपनी बेटी की शादी बड़ी धूमधाम से की थी। शनिवार को जब बेटी की विदाई हुई, तो पिता की आँखों में संतोष और गम के मिले-जुले आंसू थे। लेकिन इसी बीच, उन्होंने मौत के उस घूँट को गले से उतार लिया जो उनकी अंतिम सांस साबित होने वाली थी। परिजनों के अनुसार, बेटी की विदाई के बाद उन्होंने कल शाम को शराब पी थी और आज सुबह फिर से शराब का सेवन किया।

​सुबह होते-होते इलियास की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें आँखों से धुंधला दिखने लगा और सीने में तेज जलन की शिकायत हुई। घबराए हुए परिजन उन्हें आनन-फानन में मोतिहारी सदर अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार तो किया, लेकिन उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने हार नहीं मानी और उन्हें लेकर रवाना हुए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। रास्ते में ही इलियास ने दम तोड़ दिया। जब उनकी लाश वापस सदर अस्पताल लाई गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम थीं।

कर्ज की मार और अनाथ होती बेटियां: सामाजिक त्रासदी का चेहरा

मोहम्मद इलियास अंसारी का जीवन संघर्षों से भरा था। उनकी तीन बेटियां हैं। एक गरीब पिता होने के नाते, उन्होंने अपनी दो बेटियों की शादी के लिए समाज से भारी कर्ज लिया था। वे मेहनत-मजदूरी कर उस कर्ज को चुकाने और तीसरी बेटी के भविष्य को संवारने की कोशिश में जुटे थे। लेकिन शराब की लत और बाजार में उपलब्ध जहरीले पेय ने सब कुछ खत्म कर दिया। इलियास के भाई मोहम्मद गुलबास अंसारी ने भारी मन से बताया कि उनके भाई की तबीयत अचानक खराब हुई और वे उन्हें बचा नहीं सके। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलियास द्वारा लिया गया कर्ज कौन चुकाएगा और उनकी तीसरी कुंवारी बेटी का हाथ कौन थामेगा?

प्रशासनिक लीपापोती और बढ़ता मौत का आंकड़ा

मोतिहारी में यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या आठ तक पहुँच चुकी है। हर मौत के बाद प्रशासन पोस्टमार्टम और जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन सवाल वही बरकरार है—बिहार में शराब आ कहाँ से रही है? इलियास अंसारी के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया है, जहाँ पुलिस की कागजी कार्रवाई जारी है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर जबरदस्त आक्रोश है कि पुलिस छोटे-मोटे शराबियों को तो पकड़ लेती है, लेकिन उन बड़े सिंडिकेट तक नहीं पहुँच पा रही है जो मौत का यह सामान खुलेआम बेच रहे हैं।

सूचना तंत्र की भूमिका और जागरूकता का अभाव

इस तरह की सामाजिक बुराइयों और उनसे जुड़ी सूचनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में राज्य के सूचना तंत्र की बड़ी भूमिका होनी चाहिए। पटना स्थित दूरदर्शन केंद्र से प्रसारित होने वाला डीडी बिहार और आकाशवाणी के विभिन्न केंद्र लगातार क्षेत्रीय मुद्दों पर कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं, लेकिन जागरूकता का स्तर अब भी जमीनी स्तर पर कम दिखाई देता है। सरकार द्वारा “न्यूज़ ऑन एयर” मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से सूचनाएं सुलभ कराई जा रही हैं, लेकिन जब तक ग्रामीण अंचलों में शराब माफियाओं के खिलाफ कड़ा एक्शन नहीं होता, तब तक ऐसी मौतें सूचनाओं का हिस्सा बनी रहेंगी।

शराबबंदी और जमीनी हकीकत का कड़वा सच

नीतीश सरकार ने बिहार में शराबबंदी को महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सुधार के लिए लागू किया था। लेकिन इलियास अंसारी जैसे मामलों को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या यह कानून केवल कागजों तक सीमित है? जब एक पिता अपनी बेटी की शादी की खुशी में शराब पीता है और वह शराब जहरीली निकलती है, तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है। मोतिहारी का यह कांड यह बताने के लिए काफी है कि शराबबंदी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में शराब की होम डिलीवरी और जहरीली भट्टियां बदस्तूर जारी हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम अक्सर छोटी मछलियों पर कार्रवाई करती है, जबकि इस काले कारोबार के मगरमच्छ सत्ता और रसूख की आड़ में सुरक्षित बचे रहते हैं।

विपक्ष का हमला और सरकार की खामोशी

मोतिहारी की इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में भी उबाल ला दिया है। विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है कि जहरीली शराब से हो रही इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या उन अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना है? मोहम्मद इलियास अंसारी जैसे लोग जो दिन भर हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं, वे क्यों आसानी से इन मौत के सौदागरों के चंगुल में फंस जाते हैं? प्रशासन की ओर से अब तक किसी बड़ी कार्रवाई का न होना अपराधियों के मनोबल को बढ़ा रहा है।

निष्कर्ष: न्याय का इंतजार और समाज का दायित्व

मोहम्मद इलियास अंसारी की मौत केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक सबक है। यह सबक उन लोगों के लिए है जो कानून तोड़कर शराब बेचते हैं और उन लोगों के लिए भी जो अपनी जान जोखिम में डालकर इसका सेवन करते हैं। इलियास के भाई मोहम्मद गुलबास अंसारी और उनका पूरा परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है। क्या सरकार इस अनाथ हुई बेटी की जिम्मेदारी उठाएगी? क्या उन शराब माफियाओं को फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाएगा जिन्होंने इलियास को जहर परोसा था? द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ है और प्रशासन से यह मांग करती है कि केवल निलंबन की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन जड़ों पर प्रहार करना होगा जहाँ से यह जहर समाज में फैल रहा है।

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