पटना, 17 जुलाई 2025।बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने चकबंदी वाले गांवों में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जटिलताओं के समाधान की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिलों के समाहर्ताओं को निर्देश जारी किया है कि जहां खतियान, जमाबंदी और कब्जे में अंतर हो, वहां मुआवजा वास्तविक कब्जाधारी रैयत को ही दिया जाएगा।
कब और क्यों लिया गया यह निर्णय?
- बिहार चकबंदी अधिनियम, 1956 के तहत अब तक 5657 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, जिनमें से 2158 गांवों में प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।
- इसके बावजूद कई गांवों में अभी भी पुराना खतियान और वास्तविक कब्जे में भिन्नता है, जिससे भू-अर्जन में परेशानी हो रही है।
- इससे विकास परियोजनाओं में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
क्या है नई अंतरिम व्यवस्था?
- भूमि अधिग्रहण के दौरान वास्तविक कब्जा रखने वाले व्यक्ति को ही हितबद्ध रैयत माना जाएगा और उसे ही मुआवजा दिया जाएगा।
- बशर्ते वह अतिक्रमणकारी न हो और उसका दावा खतियान या पूर्ववर्ती दस्तावेजों से प्रमाणित हो।
- जिला भू-अर्जन पदाधिकारी इस पर आत्मभारित आदेश जारी करेंगे जिसमें स्पष्ट होगा कि भुगतान किन आधारों पर किया गया।
अधिनियम संशोधन प्रक्रिया भी जारी
- सरकार ने इस निर्णय के कानूनी परामर्श भी प्राप्त कर लिए हैं।
- संबंधित अधिनियमों में संशोधन की प्रक्रिया जारी है।
- तब तक यह अंतरिम समाधान लागू रहेगा ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो।


